वेतन को लेकर ठेका मजदूरों ने किया काम बन्द

पंतनगर/ दिनांक 26 फरवरी 2024 को विगत जनवरी 2024 माह के वेतन भुगतान नहीं होने से नाराज विश्वविद्यालय के फसल अनुसंधान केन्द्र के ठेका मजदूर काम बंद कर डायरेक्टर के आफिस के सामने धरने पर बैठ गए। उन्होंने लम्बित जनवरी माह का वेतन और हर माह की 7 तारीख तक वेतन तथा माह में 26/27 कार्य दिवसों का वेतन भुगतान कराने की मांग की। डायरेक्टर से हुई वार्ता के बाद आश्वासन पर ही मजदूर काम पर लौटे।                                                               
    
मालूम हो कि सरकारी संस्था विश्वविद्यालय में वर्षों से लगातार कार्यरत ठेका मजदूर श्रम कानूनों द्वारा देय अवकाश, बोनस, बीमा, ग्रेच्युटी से वंचित हैं। श्रम नियमानुसार इन्हें माह की 7 तारीख तक वेतन भुगतान किया जाना चाहिए। हालांकि विश्व विद्यालय  श्रम  कल्याण अधिकारी के  आदेश  द्वारा हर माह की 7 तारीख तक एवं निदेशक प्रशासन एवं अनुश्रवण के आदेश द्वारा हर माह की 10 तारीख तक वेतन भुगतान करने के निर्देश दिए गए हैं। इतना ही नहीं विगत वर्ष 2021 में वर्तमान कुलपति महोदय द्वारा हर माह के प्रथम सप्ताह में वेतन भुगतान के साथ माह में 26/27 कार्य दिवसों का वेतन भुगतान किए जाने के निर्देश दिए गए हैं। इन आदेशों का आज तक पालन नहीं किया गया। कभी समय से वेतन भुगतान नहीं किया जा रहा है। पूरे माह काम नहीं, यदि किसी माह सरकारी छुट्टी पड़ गई तो उसका भी वेतन काट दिया जाता है। ठेका मजदूरों को माह में 20 कार्य दिवसों का वेतन भुगतान किया जा रहा है। कुलपति महोदय के आदेश के बावजूद माह में 26/27 कार्य दिवसों का वेतन भुगतान नहीं किया जा रहा है।
    
दिनांक 5 मार्च 2024 को ठेका मजदूरों ने काम बंद कर प्रशासनिक भवन पर धरना प्रदर्शन किया और ठेका मजदूर कल्याण समिति पंतनगर द्वारा कुलपति विश्वविद्यालय, निदेशक प्रशासन एवं अनुश्रवण विश्व विद्यालय पंतनगर तथा उपश्रमायुक्त, ऊधम सिंह नगर, उत्तराखंड को पत्र देकर विगत  जनवरी एवं फरवरी 2024 माह के लम्बित वेतन भुगतान कराने की मांग की गई। कई  विभागों के  ठेका मजदूर इससे पहले भी वेतन को लेकर विभागों में धरना प्रदर्शन कर चुके हैं।  
    
समय से वेतन भुगतान न होने से एक ओर अति अल्प न्यूनतम मजदूरी पर कार्यरत ठेका मजदूरों को बच्चों की स्कूल फीस, आवास किराया, राशन, सब्जी इत्यादि परिवार के पालन-पोषण में अत्यधिक आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। आवास किराया समय पर जमा नहीं होने से विश्वविद्यालय द्वारा ठेका मजदूरों से विलम्ब शुल्क वसूला जा रहा है। जब वेतन समय से नहीं मिलेगा तो आखिर ठेका मजदूर आवास किराया, जल, विद्युत शुल्क कैसे समय से जमा करेंगे? इस तरह करीब 2500 ठेका मजदूरों के साथ अमानवीय व्यवहार, अन्याय किया जा रहा है। दूसरी ओर श्रम कानूनों, विश्वविद्यालय के आदेशों का भी घोर उल्लंघन किया जा रहा है जिसको लेकर लगातार मजदूरों में आक्रोश फूटता रहता है।
    
उत्तराखंड सरकार लम्बे समय से बजट कटौती कर विश्वविख्यात विश्वविद्यालय की उपेक्षा कर बरबादी की ओर ले जा रही है। जिससे विश्वविद्यालय के नियमित कर्मचारी, शिक्षक तो प्रभावित हैं ही, छात्रों के शिक्षण एवं शोध कार्य भी प्रभावित हो रहे हैं। ऊपर से अफसरों  की अनदेखी, उपेक्षा के कारण ठेका मजदूर अल्प वेतन भुगतान को लेकर अक्सर काम बंद करने को बाध्य होते हैं। मोदी सरकार के तथाकथित विकास के तहत भारत के गौरवशाली विश्वविद्यालय में श्रम कानूनों का पालन नहीं किया जा रहा है। ठेका मजदूरों को श्रम नियमों के तहत नियमितीकरण, देय सुविधाएं देना तो दूर की बात, जनवरी एवं फरवरी दो माह काम करते बीत गए तीसरा महीना चल रहा है; अभी तक वेतन भुगतान नहीं किया गया है। मजदूरों के सामने अपने संगठन में संगठित होकर संघर्ष के अलावा और कोई रास्ता नहीं है। 
        -पंतनगर संवाददाता
 

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