पश्चिम बंगाल में भाजपाइयों का आतंक

Published
Thu, 07/16/2026 - 08:53
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एक जुलाई को पश्चिम बंगाल के नादिया जिले में महुआ मोइत्रा के स्थानीय ट्रांजिट पार्टी कार्यालय पर हमला हुआ। यह कार्यालय राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे स्थित है जहां संघी भाजपाइयों की भीड़ हाथ में भाजपा के झंडे लेकर इकठ्ठा हुई और महुआ मोइत्रा के ऊपर अंडे, टमाटर, पत्थर आदि फेंके। जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। 
    
इस घटना पर महुआ मोइत्रा का कहना है कि इस हमले के पीछे सत्ताधारी बीजेपी सरकार का हाथ है। महुआ मोइत्रा ने डीजीपी को फोन किया तब उन्होंने फोन नहीं उठाया, बाद में फोन पर बात हुई जिसके बाद डीजीपी ने उनकी लोकेशन मांगी। उसके बाद पुलिस आई और दो घंटे चुपचाप खड़ी रही। परन्तु भीड़ को नहीं हटाया गया, भीड़ के ऊपर कोई कार्यवाही नहीं हुई।
    
एक अन्य वीडियो में महुआ मोइत्रा बता रही हैं कि वह भाजपाइयों की भीड़, उनकी गुंडागर्दी से डरती नहीं है। वह अपनी पार्टी टीएमसी के साथ है, उसका झंडा थामे हुए है। भाजपा उन्हें डरा नहीं सकती, कभी चुप नहीं करा सकती है।
    
पश्चिम बंगाल में चुनाव के बाद भाजपा सत्ता में आई। उसने ‘बदला नहीं बदलाव’ का नारा दिया लेकिन सारे नारे-वादों की तरह ही यह भी झूठा ही नारा था। चुनाव जीतते ही वह ममता बनर्जी से बदला लेने लगी। चुनाव के बाद से ही टीएमसी में तोड़-फोड़ करना, उनके नेताओं/कार्यकर्ताओं को डराना-धमकाना, उनके कार्यालयों में तोड़-फोड़ करना आदि काम किया जा रहा है। भाजपा के कार्यकर्ताओं ने पश्चिम बंगाल में गुंडागर्दी मचा रखी है। 
    
इन घटनाओं की वजह से राज्य में कानून-व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो रही है। इन तमाम घटनाओं पर हाल ही में उच्च न्यायालय ने डीजीपी को उचित सुरक्षा उपाय सुनिश्चित करने का निर्देश दिया था। लेकिन उसके बाद भी इस तरह की घटनाएं हो रही हैं ये बड़े शर्म की बात है। केवल टीएमसी नेताओं पर ही यह संघी भीड़ हमलावर नहीं है बल्कि मुसलमान कारोबारियों, मीट-मछली विक्रेताओं, चर्चों, धर्म निरपेक्ष प्रतीकों और आम बंगाली जनता पर भी ये हमलावर हैं। ये सबको जबरन शांत कराना चाहते हैं ताकि इनकी बेखौफ फासीवादी लंपटता का तांडव पूरे बंगाल में आम हो जाये।  
    
वैसे पश्चिम बंगाल के भाजपा के नेता इस हमले से अपने को अलग कर रहे हैं। उनका कहना है कि इसके पीछे उनका कोई हाथ नहीं है। तो सवाल उठता है कि इतनी भीड़ जिसके हाथ में भाजपा के झंडे हैं जो वीडियो में साफ-साफ दिखाई दे रहा है वे कौन हैं? दूसरा यह कि इन लोगों के दिमाग में इतनी नफरत घोलने का काम किसने किया? जब ऊपर से लेकर नीचे तक संघी ताकतें भीड़ तंत्र बनाने में जुटीं हों। जब पूरे देश में किसी की हत्या, घरों को जलाना, दंगे करना, बुलडोजर चलाना आदि भीड़ के द्वारा या उसके नाम पर करायी जा रही हों, उनको प्रोत्साहन दिया जा रहा हो तो ऐसे में अगर पश्चिम बंगाल में भी यह बड़े पैमाने पर हो रहा है तो यह आश्चर्यजनक नहीं है।
    
वैसे ऐसा नहीं है कि तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) कोई दूध की धुली है जिसने अपने शासन काल में आम जनता का शोषण-उत्पीड़न न किया हो। एक तरह से ममता मोदी की छोटी बहन ही थी। उसने अपनी बारी में संसदीय वामपंथियों को सत्ता से हटाने के लिए भी सारे तीन तिकड़म किए और आज वही उसके साथ भाजपा कर रही है। लेकिन यह और ज्यादा नग्न रूप में किया जा रहा है। 
    
जब एक सांसद अपने ही संसदीय क्षेत्र में सुरक्षित नहीं हो, भाजपाई भीड़ कार्यालय पर आकर उत्पात मचाने लगे तो यह भाजपा की नंगी तानाशाही को ही दिखाता है। जब किसी विपक्षी जनप्रतिनिधि को सिर्फ इसलिए परेशान किया जाता है क्योंकि वह उनके हिसाब से चलने से और उनके सामने झुकने से इनकार करती है।
    
यह घटना भारतीय पूंजीवादी लोकतंत्र के चरित्र को भी उजागर करती है। जहां विपक्षी पार्टी का सांसद भी सुरक्षित नहीं है, उस पर भाजपा के गुंडों द्वारा हमला किया जा सकता है और पुलिस तमाशबीन बन कर देखती रहती है। ऐसे में देश के किसी सामान्य नागरिक की तो बात ही क्या? भाजपा पूंजीवादी लोकतंत्र को खत्म कर नंगी फासीवादी तानाशाही थोपना चाहती है। 
    
पश्चिम बंगाल का चुनाव भाजपा ने कैसे जीता यह किसी से छिपा नहीं है। और जब से भाजपा बंगाल में जीती है तब से वह लगातार टीएमसी के नेताओं को डराकर, धमकाकर, खरीदकर टीएमसी को खत्म करने का प्रयास कर रही है। कभी कार्यकर्ताओं पर हमला तो कभी उनके कार्यालयों पर हमला करवा रही है। पश्चिम बंगाल के लोगों में भाजपा ने एक नैरेटिव चलाया कि तृणमूल कांग्रेस की जगह भाजपा आयेगी तो बंगाल में बदलाव होगा। टीएमसी इतने सालों से सत्ता में रही लेकिन अब यहां कुछ बदलाव होगा। लेकिन यह सोचना भूल ही है। भाजपा जो हिंदू फासीवादी राजनीति पूरे देश में कर रही है जो जनता का दमन-उत्पीड़न पूरे देश में कर रही है वही तो वह बंगाल में भी करेगी।
    
बदलाव सत्ता परिवर्तन से नहीं आएगा बल्कि बदलाव के लिए इस पूंजीवादी व्यवस्था को ध्वस्त करने की जरूरत है तभी कोई बदलाव हो सकता है।

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