गरीबी हटाओ से गरीबी छिपाओ तक

Published
Wed, 09/16/2026 - 15:50
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दिल्ली की भाजपा सरकार जब से सत्ता में आयी है उसका सबसे चर्चित काम ‘गरीबी हटाओ’ का रहा है। अवैध बस्तियों-कालोनियें को अतिक्रमण के नाम पर जमींदोज करने व वहां के नागरिकों को भगाने का एक तरह से दिल्ली सरकार ने अभियान ही छेड़ दिया था। ये बस्तियां-कालोनियों आज से 40-50 वर्ष पूर्व जब मजदूर-मेहनतकशों ने बसाई तो वह शहर का बाहरी हिस्सा था और तब नये निर्माण के लिए इस आबादी की सरकार को जरूरत थी। अब 40-50 वर्ष बाद ये इलाके शहर के भीतर करोड़ों की भूमि वाले बन चुके हैं और यहां माॅल व अन्य व्यवसाय के लिए पूंजीपति लार टपका रहे हैं। और दिल्ली सरकार का बुलडोजर लाखों गरीब आबादी को उनके मकानों से खदेड़ पूंजीपतियों के मुनाफे की टपकती लार को शांत करना चाहती रही हैं। 
    
दिल्ली देश की राजधानी है और यहां हजारों झुग्गियां, दड़बेनुमा मकान आलीशान इमारतों, संसद भवन आदि के बीच देश की अथाह गरीबी केा दिखाती हैं। मोदी सरकार वैसे तो अपने कुकर्मों से गरीब को और गरीब बना रही है पर जब बात किसी विदेशी नेता या अंतर्राष्ट्रीय आयोजन की होती है तो यह गरीबी का सागर उसे असहज करता रहा है। कभी वह लाखों रुपये फूंक पूरी बस्ती-झुग्गी के बाहर हरी चादरें तनवा देती रही है तो कभी पुलिस का पहरा बैठा सारे रेहड़ी-पटरी वालों को कुछ दिन के लिए काम से रोक देती रही है। ताकि विदेशी मेहमानों के आगे भारत का एक भी गरीब न पड़े। ट्रम्प की भारत यात्रा, जी-20 सम्मेलन के समय ऐसा ही किया गया। हाल में ब्रिक्स सम्मेलन के वक्त भी यही किया गया।
    
वसंत विहार के पास मुनरिका की झुग्गियां पूरी तरह ढ़क दी गयीं। तमाम जगहों पर इंद्रधनुषी रोशनी व चटख निआन लाइट लगाकर भी गरीबी को अदृश्य करने काम किया गया। सारा इंतजाम इस तरह किया गया कि दिल्ली चमकती नजर आये। यहां तक कि नई दिल्ली रेलवे स्टेशन आने वाली ढेरों ट्रेनों को यहां आने से रोक दिया गया। 
    
गरीब का बेटा कहकर खुद की वाहवाही करने वाला प्रधानमंत्री आज देश की राजधानी की गरीबी को पर्दे से ढ़क विदेशी राजनेताओं के आगे चमकती दिल्ली पेश करना चाह रहा है। प्रधानमंत्री दिल्ली की गरीबी पर्दे से छिपाने में जुटा है और उसकी मुख्यमंत्री चुन चुन कर गरीब बस्तियां उजाड़ने में। ऐसा करके ही ये पाखण्डी मान ले रहे हैं कि देश से गरीबी खत्म होने को है। 
    
ये चाहे कितने शब्द जाल रच लें आज जनता समझने लगी है कि इन झूठे-पाखण्डियों के शासन में जनता की तंगहाली-बेकारी घटने के बजाय लगातार बढ़ रही है। 

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