उत्तराखंड में देशी-विदेशी पूंजी निवेश की हकीकत

Published
Thu, 07/16/2026 - 08:54

उत्तराखंड की धामी सरकार द्वारा 100 करोड़ रु. का भारी-भरकम खर्च कर 2023 में आयोजित की गई ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में दावा किया गया था कि देशी-विदेशी पूंजी निवेशकों के साथ हुये 1779 MoU (मेमोरेंडम आफ अंडरस्टैंडिंग) के तहत प्रदेश में 356889 करोड़ रु. के पूंजी निवेश की सहमति बन चुकी है। इसके बाद जून 2025 में सरकार ने दावा किया कि इसमें से 1 लाख करोड़ रु. का पूंजी निवेश तो हो भी चुका है, मतलब परियोजनाएं जमीन पर उतर चुकी हैं। लेकिन, हाल ही में न्यूज लाउंड्री द्वारा प्रस्तुत एक विस्तृत रिपोर्ट में सरकार के इन दावों को झूठा और भ्रामक बताया गया है। 
    
सच्चाई यह है कि उत्तराखंड में असल में कोई देशी-विदेशी पूंजी निवेश नहीं हुआ है, और सरकार बस आंकड़ों की बाजीगरी कर लोगों को बेवकूफ बना रही है। ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के पूंजी निवेश से स्पष्ट मतलब देशी-विदेशी निजी पूंजी के निवेश से है, लेकिन धामी सरकार ने पूंजी निवेशकों की जो सूची तैयार की है उसमें सबसे बड़े 10 निवेशों में से 8 सरकारी-सार्वजनिक क्षेत्र के निवेश हैं, और जिनका हिस्सा कुल निवेश का एक तिहाई अर्थात करीब 35 हजार करोड़ रु. है। है न कमाल की बाजीगरी! धामी सरकार द्वारा उत्तराखंड जल विद्युत निगम लिमिटेड (UJVNL), नेशनल थर्मल पावर कारपोरेशन (NTPC) की सब्सिडियरी टिहरी हाइड्रो डेवलपमेंट कारपोरेशन लिमिटेड (THDCIL) एवं 2023 में अस्तित्व में आये संयुक्त उपक्रम THDCIL-UJVNL एनर्जी कारपोरेशन लिमिटेड के निवेश, मतलब सरकारी निवेश, को ही ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट से प्राप्त पूंजी निवेश घोषित कर दिया गया। इतना ही नहीं स्टेट बैंक आफ इंडिया (SBI), PWD, नगरपालिका और पर्यटन सम्बंधी तमाम सरकारी विभागों की योजनाओं को, और तो और, किसान सेवा सहमति समितियों और महिला समूहों तक को भी इसमें शामिल कर लिया गया है। स्पष्ट है कि आंकड़ों की बाजीगरी और झूठ बोलने में धाकड़ धामी छप्पन इंची मोदी के नक्शे कदम पर चल रहे हैं।
    
लेकिन धाकड़ धामी महज इतने पर ही नहीं रुके। वे तो शायद अपने गुरू से भी आगे निकलने की होड़ में हैं। उन्होंने सरकारी दस्तावेजों में करीब 3 दर्जन आटा चक्कियों और सैंकड़ों खाद-बीज की दुकानों तक को ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट का पूंजी निवेश बता दिया है। ये आटा चक्कियां एवं खाद-बीज की दुकानें वे हैं जिन्होंने कि बिजली कनेक्शन एवं लाइसेंस व उसके नवीनीकरण हेतु सरकार के सिंगल विंडो सिस्टम के तहत आवेदन किये थे। न्यूज लाउंड्री ने अपनी रिपोर्ट में इन छोटे-छोटे व्यवसाइयों में से कई के इंटरव्यू के जरिये स्पष्ट किया है कि ये ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट क्या बला है इसका उन्हें पता तक नहीं है और इनमें से बहुतों के व्यवसाय तो इसके आयोजन के पहले से ही अस्तित्वमान थे।
    
लेकिन, सच तो सच है। आंकड़ों की बाजीगरी कर भला सच को कब तक झुठलाया जा सकता है? अपनी तमाम तीन-तिकडमों के बावजूद देश की लगातार खस्ता होती जा रही अर्थव्यवस्था का सच मोदी सरकार भी नहीं छिपा पा रही है। राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर तमाम रिपोर्टें, रेटिंग एजेंसियां, अर्थशास्त्रियों के बयान एवं सबसे बढ़कर भयावह हो चुकी बेरोजगारी सच को बेपर्दा कर दे रही है। इसी तरह धामी सरकार के झूठ का भी पर्दाफाश हो चुका है।

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