बुलडोजर

/buladojar

अंधेरा है
बहुत घना अंधेरा है
कुछ नहीं दिखाई देता
हिंदू है या मुसलमान है
मगर शायद इंसान है,
अंधेरे को चीरती हुई आ रही हैं
बच्चों की चीखें, महिलाओं की सिसकियां
वो रोते हुए बड़बड़ा रही हैं
क्या कसूर था इन मासूम बच्चों का?
क्या अपराध था मेरा?
क्यों गिरा दिया छोटा सा आशियाना मेरा।

तुम्हें औरंगजेब की कब्र खोदनी है
जरूर खोदो
तुम्हें जिसका भी मकबरा खोदना है
खोदो
मगर जीते जी बूढ़े मां-बाप को
बुलडोजर से मत रौंदो।

अपने आप को योगी, संत, सनातनी कहने वालो
बताओ किस गीता में लिखा है कि
बाप के जुर्म की सजा बच्चों को दो
किस वेद पुराण में लिखा है कि
बेटे के अपराध की सजा मां-बाप को दो
तुम कहते हो कि तुम्हारा धर्म श्रेष्ठ है
तुम्हारी संस्कृति महान है
बस्तियां उजाड़ते हुए तुम्हें दर्द नहीं होता
क्या यही वसुधैव कुटुम्बकम का ज्ञान है।

माना कि बहुत अन्याय है अंधकार है
रोशनी की किरण अभी दूर है
रात घनी अंधियारी है
सूरज भी मजबूर है
मगर जब मशालें लेकर
सड़कों पर जन सैलाब आयेगा
तब अंधियारा छंट जायेगा
और नया सवेरा आयेगा।।    -भारत सिंह

आलेख

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अमरीकी साम्राज्यवादी और इजरायली शासक सोचते थे कि ईरान के शीर्ष नेतृत्व का सफाया करने के बाद ईरानी जनता अपनी सत्ता के विरुद्ध उठ खड़ी होगी और इसका फायदा उठाते हुए अमरीकी साम्राज्यवादी अपनी किसी कठपुतली को सत्ता में स्थापित कर देंगे। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। ईरानी अवाम अपनी सत्ता के समर्थन में मजबूती से खड़ी हो गई। यहां से अमरीकी साम्राज्यवादियों को समझ में आ गया कि वे ईरान पर कब्जा नहीं कर सकते।

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अमेरिकी साम्राज्यवादी पश्चिम एशिया में और सारी दुनिया में अपनी साम्राज्यवादी जकड़न को खत्म नहीं होने देना चाहेंगे। वे इसके खिलाफ हर संभव प्रयास करेंगे। एक हमले में मुंह की खाने के बाद वे सबक लेकर आगे हमला करने से तौबा नहीं करेंगे। यह उनकी साम्राज्यवादी फितरत के खिलाफ होगा। यानी वे ईरान पर काबू पाने के लिए दूसरे तरीकों की खोज में लग जायेंगे।

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पिछले दस-बारह सालों में हिन्दू फासीवादियों ने इस अनौपचारिक आपातकाल की शैली को काफी विकसित किया है। कहां किस छेद का इस्तेमाल करना है, इसमें उन्होंने महारत हासिल की है। इनके इस कृत्य में न्यायपालिका की सहभागिता से यह काम और आसान हो गया है। मतदाता सूची का विशेष गहन पुनर्रीक्षण इस सबका विशिष्ट उदाहरण है।

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जैसा कि इंटरव्यू के शीर्षक से स्पष्ट है कि पिकेटी एक ऐसी दुनिया का ख्वाब परोसते हैं जिसमें बगैर पर्यावरण को नुकसान पहुंचाये ज्यादातर लोग खुशहाल बन सकते हैं। इस सुन्दर दुनिया को हासिल करने के लिए वे किसी वर्ग संघर्ष बढ़ाने या क्रांति की वकालत नहीं करते। बल्कि वे कुछ नुस्खे सुझाते हैं जिस पर चल कर मौजूदा पूंजीवादी-साम्राज्यवादी दुनिया को ही खुशनुमा बनाया जा सकता है। 

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अमरीकी साम्राज्यवादी वर्चस्व को बढ़ाने में पश्चिम एशिया में दृढ़ स्तम्भ इजरायल रहा है। 1979 से पहले ईरान का शासक शाह रजा पहलवी  भी इस क्षेत्र में अमरीका का लठैत रहा है। 1979 में रजा पहलवी का तख्ता उलटने के बाद जो इस्लामी सत्ता आयी, वह लगातार अमरीकी साम्राज्यवाद की वर्चस्ववादी नीतियों का विरोध करती रही थी। यह सत्ता इजरायल द्वारा फिलिस्तीनियों को उजाड़े जाने और उनकी जमीनों पर यहूदी बस्तियां बसाने का विरोध करती रही है।