फासीवाद / साम्प्रदायिकता,

चुनाव आयोग, हिंदू फासीवाद और ‘लोकतंत्र’

/election-aayog-hindu-fascist-and-loktantra

एस.आई.आर. प्रक्रिया के दौरान बड़े पैमाने पर मतदाताओं की कटौती की गई। अब तक 13 करोड़ से ज्यादा मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए। जबकि 5-6 करोड़ लोगों को संदेह की आड़ में नोटिस भेजे गए। 13 करोड़ में से 70 प्रतिशत वो लोग थे जिन्हें स्थानांतरित या अनुपस्थित बता दिया गया। इस तरह बड़े स्तर पर मनमानी छंटनी की जा रही है। इसमें सबसे बड़ी संख्या अल्पसंख्यक, दलित, आदिवासी, महिलाओं और मलिन बस्तियों में रहने वालों की है।

जमुई कांड मोरल पुलिसिंग का भयानक परिणाम है

/jamui-kand-moral-polising-ka-bhayanak-result-hai-0

19 सितम्बर को बिहार के जमुई में एक घटना घटित हुई जिसने सोशल मीडिया पर भूचाल ला दिया। यह घटना थी दसवीं में पढ़ने वाली एक छात्रा के साथ यौन उत्पीड़न की। सोशल मीडिया पर खबर फै

मोदी-शाह-ज्ञानेश और एस आई आर

/modi-shah-gyanesh-and-s-i-r

अभी हाल ही में एस आई आर पर इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट आने के बाद मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार सवालों के घेरे में आ गये। रिपोर्ट के अनुसार चुनाव आयोग के दो सदस्यों

यहां नक्सल वहां नक्सल

/yahan-naxal-vahan-naxal

जब से देश के गृहमंत्री ने भारत के मध्य पूर्व में नक्सलवाद या माओवाद के सफाये की घोषणा की है तब से नक्सल शब्द हर उस जगह पहुंच गया जहां वह पहले नहीं था। ‘नक्सल’ लाल किले, भ

पुस्तक दहन के नये ध्वजवाहक

/pustak-dahan-ke-naye-dhwzvahak

अपने देश के हिन्दू फासीवादियों को संस्कृतनिष्ठ हिन्दी बहुत पसंद है। इसीलिए शायद उपरोक्त शीर्षक उनको पसंद आये।
    

व्यवस्था के दरकते पहिए: बढ़ता जनाक्रोश

/vyavastha-ke-darakate-pahiye-badhata-janaakrosh

यह वर्ष फासीवादी निजाम कायम करने के लक्ष्य के साथ सत्तासीन मोदी सरकार के सामने एक के बाद एक चुनौती पेश कर रहा है। पहले ठेका मजदूरों के संघर्षों की लहर ने पूरे उत्तर भारत

हिंदू फासीवादी और लद्दाख

/hindu-fascist-and-laddakh

केंद्र सरकार ने लद्दाख को नया झुनझुना थमाने की कोशिश की है। काफी पहले हिंदू फासीवादियों ने जम्मू कश्मीर के विभाजन और 370 के खात्मे से पहले भी इस इलाके की जनता को ढेरों झू

यह कोई हादसा नहीं बल्कि मुनाफाखोरों द्वारा की गई हत्याएं हैं

/yah-koi-haadasa-nahin-balki-munafakhoron-dwara-ki-gai-hattyaein-hain

दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस के एकदम नजदीक सत्यनिकेतन नाम के एक पीजी की ईमारत ढहने की घटना ने देश की बदहाल हो चुकी शिक्षा व्यवस्था को एक बार फिर उघाड़ कर रख दिया है।

गरीबी हटाओ से गरीबी छिपाओ तक

/gareebi-hatao-se-gareebi-chipaao-tak

दिल्ली की भाजपा सरकार जब से सत्ता में आयी है उसका सबसे चर्चित काम ‘गरीबी हटाओ’ का रहा है। अवैध बस्तियों-कालोनियें को अतिक्रमण के नाम पर जमींदोज करने व वहां के नागरिकों को

आलेख

/punjivadi-jantantra-and-chunavi-corruption

अठारहवीं सदी के इंग्लैण्ड में होने वाले चुनावी भ्रष्टाचार पर गूगल से ‘सर्च’ करने पर उसका ए आई स्वतः ही यह जवाब हाजिर कर देता हैः 

/election-aayog-hindu-fascist-and-loktantra

एस.आई.आर. प्रक्रिया के दौरान बड़े पैमाने पर मतदाताओं की कटौती की गई। अब तक 13 करोड़ से ज्यादा मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए। जबकि 5-6 करोड़ लोगों को संदेह की आड़ में नोटिस भेजे गए। 13 करोड़ में से 70 प्रतिशत वो लोग थे जिन्हें स्थानांतरित या अनुपस्थित बता दिया गया। इस तरह बड़े स्तर पर मनमानी छंटनी की जा रही है। इसमें सबसे बड़ी संख्या अल्पसंख्यक, दलित, आदिवासी, महिलाओं और मलिन बस्तियों में रहने वालों की है।

/uddharak-ideology-ki-talaas

इस मजदूर आंदोलन की विचारधारा मार्क्सवाद का यह स्पष्ट कहना था कि महान फ्रांसीसी क्रांति के जमाने से ही पूंजीपति वर्ग ने अपने समाज के लिए जो आदर्श घोषित कर रखा है- स्वतंत्रता, समता, बंधुत्व का आदर्श- वह पूंजीवाद की निजी सम्पत्ति के कारण कभी भी हासिल नहीं किया जा सकता। पूंजी के रूप में निजी सम्पत्ति के रहते स्वतंत्रता का मतलब होगा बाजार में खरीद-बेच की स्वतंत्रता, समता का मतलब होगा बाजार में खरीददार व विक्रेता की समता तथा बंधुत्व का मतलब होगा खरीद-बेच की व्यवस्था पर सहमति।

/war-and-diplomacy-uthal-puthal-se-bhari-duniyaa

गाजापट्टी में इजरायल की कत्लेआम करने की मुहिम जारी है। इजरायली यहूदी नस्लवादी न तो किसी समझौते को मान रहे हैं और न ही वे अपनी विनाश लीला को रोक रहे हैं। वे नस्लीय सफाये की मुहिम चला रहे हैं। इसके जवाब में हमास और अन्य प्रतिरोध संगठन इजरायली कब्जाकारी सेना पर प्रहार कर रहे हैं। 

/amerika-ka-iran-par-operation-d-day-hatasha-ka-parinam

अपने व्यापक नुकसान को देखते हुए अमरीकी साम्राज्यवादियों ने अप्रैल महीने में युद्ध विराम किया और फिर पाकिस्तान की मध्यस्थता में एक ज्ञापन समझौता किया। इस ज्ञापन समझौते में अधिकांशतः ईरान की मांगें स्वीकार की गयीं। यह वस्तुतः अमरीका की पराजय थी। इस समझौते के थोड़े ही दिनों बाद अमरीका ने इसका उल्लंघन शुरू कर दिया। इजरायल ने एक भी दिन इस समझौते को नहीं माना।