विविध

ट्रेड यूनियन एक्ट, 1926 के सौ साल

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ट्रेड यूनियन एक्ट, 1926 को अस्तित्व में आये 100 साल पूरे हो चुके हैं। मजदूरों को संगठित होने का कानूनी अधिकार देने वाला यह कानून जब अस्तित्व में आया था तब भारत अंग्रेजों

मलिका-ए-तरन्नुम की ‘पहले सी मुहब्बत’

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बात 1950 के दशक के शुरूआत की है। लाहौर स्थित पंजाब विश्वविद्यालय में एक सरकारी कार्यक्रम के तहत नूरजहां के गानों का आयोजन था। तब जनरल अयूब खान पाकिस्तान के राष्ट्रपति थे और आयोजन के मुख्य अतिथि। जब

शहीदे आजम भगतसिंह के जन्मदिवस पर विभिन्न कार्यक्रम

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शहीदे आजम भगतसिंह भारत के क्रांतिकारी आंदोलन की अमर शख्सियत हैं। आज जब देश में फासीवादी ताकतें सत्तासीन होकर जनता का क्रूर दमन कर रही हैं, तब भगतसिंह व उनके साथियों के वि

भारत को खतरा

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हिन्दू फासीवाद निःसंदेह भारत के लिए सबसे बड़ा खतरा है। और यह खतरा न केवल धार्मिक अल्पसंख्यकों बल्कि बहुसंख्यक हिन्दू आबादी के लिए भी उतना ही है। और यह सब मोदी सरकार के पिछले 12 वर्ष के शासनकाल में साबित होता रहा है। पिछले 12 वर्षों में हर वर्ष के साथ महंगाई, बेरोजगारी, सामाजिक असमानता आदि लगातार बढ़ते गये हैं। महंगाई आसमान छू रही है तो बेरोजगारी पिछले पचास वर्षों में सबसे ज्यादा है। हर तीन युवा में एक युवा बेरोजगार है। 

बढ़ती महंगाई के विरोध में प्रदर्शन

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देश भर में चीनी 39 रुपए प्रति किलो से बढ़कर लगभग 70 रुपए प्रति किलो तक पहुंच गई है। इसी के साथ सरसों का तेल, रिफाइंड, दाल, आटा, चावल, मसाले, प्याज, टमाटर, सब्जी, गैस, टेम्

आदिवासी बच्चों की मौत के खिलाफ मध्य प्रदेश सरकार का पुतला दहन

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फरीदाबाद/ पिछले दिनों मध्य प्रदेश के बालाघाट में 32 से ज्यादा मासूम बच्चों की दूषित पानी पीने से मौत हुई। इसके विरोध में इंकलाबी मजदूर केंद्र द्वारा फरीद

‘लव मैरिज’

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सुबह-सुबह का सपना हर रोज पीठ पर पड़ने वाली धौल से टूटता। ‘सात बज गये कब उठेगा’?

अर्जेन्टीना: कटौती कार्यक्रमों के खिलाफ ‘मार्च आफ एंगर’

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19 सितम्बर को अर्जेन्टीना की राजधानी ब्यूनसआयर्स में 350 संगठनों ने राष्ट्रपति मिलेई की नीतियों के खिलाफ ‘मार्च आफ एंगर’ में हिस्सा लिया। इन संगठनों में मजदूर यूनियन, छात

बढ़ती महिला हिंसा - समाधान किधर

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जमुई बिहार में नाबालिग बच्ची के साथ हुई छेड़छाड़ और यौन हिंसा की खबर ने महिलाओं और बच्चियों की सुरक्षा के सवाल को एक बार फिर उठा दिया। ऐसा नहीं है कि ऐसी घटनाएं नहीं होती र

आलेख

/punjivadi-jantantra-and-chunavi-corruption

अठारहवीं सदी के इंग्लैण्ड में होने वाले चुनावी भ्रष्टाचार पर गूगल से ‘सर्च’ करने पर उसका ए आई स्वतः ही यह जवाब हाजिर कर देता हैः 

/election-aayog-hindu-fascist-and-loktantra

एस.आई.आर. प्रक्रिया के दौरान बड़े पैमाने पर मतदाताओं की कटौती की गई। अब तक 13 करोड़ से ज्यादा मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए। जबकि 5-6 करोड़ लोगों को संदेह की आड़ में नोटिस भेजे गए। 13 करोड़ में से 70 प्रतिशत वो लोग थे जिन्हें स्थानांतरित या अनुपस्थित बता दिया गया। इस तरह बड़े स्तर पर मनमानी छंटनी की जा रही है। इसमें सबसे बड़ी संख्या अल्पसंख्यक, दलित, आदिवासी, महिलाओं और मलिन बस्तियों में रहने वालों की है।

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इस मजदूर आंदोलन की विचारधारा मार्क्सवाद का यह स्पष्ट कहना था कि महान फ्रांसीसी क्रांति के जमाने से ही पूंजीपति वर्ग ने अपने समाज के लिए जो आदर्श घोषित कर रखा है- स्वतंत्रता, समता, बंधुत्व का आदर्श- वह पूंजीवाद की निजी सम्पत्ति के कारण कभी भी हासिल नहीं किया जा सकता। पूंजी के रूप में निजी सम्पत्ति के रहते स्वतंत्रता का मतलब होगा बाजार में खरीद-बेच की स्वतंत्रता, समता का मतलब होगा बाजार में खरीददार व विक्रेता की समता तथा बंधुत्व का मतलब होगा खरीद-बेच की व्यवस्था पर सहमति।

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गाजापट्टी में इजरायल की कत्लेआम करने की मुहिम जारी है। इजरायली यहूदी नस्लवादी न तो किसी समझौते को मान रहे हैं और न ही वे अपनी विनाश लीला को रोक रहे हैं। वे नस्लीय सफाये की मुहिम चला रहे हैं। इसके जवाब में हमास और अन्य प्रतिरोध संगठन इजरायली कब्जाकारी सेना पर प्रहार कर रहे हैं। 

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अपने व्यापक नुकसान को देखते हुए अमरीकी साम्राज्यवादियों ने अप्रैल महीने में युद्ध विराम किया और फिर पाकिस्तान की मध्यस्थता में एक ज्ञापन समझौता किया। इस ज्ञापन समझौते में अधिकांशतः ईरान की मांगें स्वीकार की गयीं। यह वस्तुतः अमरीका की पराजय थी। इस समझौते के थोड़े ही दिनों बाद अमरीका ने इसका उल्लंघन शुरू कर दिया। इजरायल ने एक भी दिन इस समझौते को नहीं माना।