एस आई आर : मुसलमानों के नाम काटने के हथकंडे
संघ-भाजपा में एक प्रतियोगिता चल रही है। यह प्रतियोगिता इस बात की है कि कौन सा नेता कितना घटिया-जहरीला-नफरती बयान दे सकता है। कौन मुसलमानों को कितनी भद्दी भाषा में गरिया स
संघ-भाजपा में एक प्रतियोगिता चल रही है। यह प्रतियोगिता इस बात की है कि कौन सा नेता कितना घटिया-जहरीला-नफरती बयान दे सकता है। कौन मुसलमानों को कितनी भद्दी भाषा में गरिया स
किसी जमाने में ‘जय श्री राम’ का नारा गूंजने पर महसूस होता था कि कोई धार्मिक आस्थावान टोली मंदिर की ओर पूजा के लिए जा रही हो। पर आज इस नारे के तेवर और अर्थ बदल गये हैं। इस
फासीवादी ब्रिगेड ने रामनवमी पर इस बार भी जमकर उत्पात मचाया और विभिन्न राज्यों में शोभा यात्राओं के नाम पर भड़काऊ जुलूस निकाले। इस दौरान डी जे पर बेहद तेज आवाज में अश्लील औ
17 मार्च को महाराष्ट्र के नागपुर में साम्प्रदायिक हिंसा भड़क उठी। हिंसा में पुलिसकर्मी और नागरिक घायल हुए। कई इलाकों में पथराव, आगजनी, तोड़फोड़ हुई। इसके बाद कई इलाकों में क
हिंदू फासीवादियों ने तो जैसे कसम ही खा रखी है कि अब हर हिंदू त्यौहार को सांप्रदायिकता की आंच में सेंके बिना नहीं मनाएंगे। कि अब त्यौहार शांति, सद्भावना के प्रतीक न रहकर न
पवन कल्याण आंध्र प्रदेश की चन्द्रबाबू नायडू सरकार में उपमुख्यमंत्री हैं। उनकी पार्टी का नाम है जन सेना। राजनीति में आने से पहले वे तेलगू सिनेमा की एक प्रमुख हस्ती थे। जैस
अभी ज्यादा दिन नहीं बीते जब रेलवे के पुलिसकर्मी चेतन ने चलती ट्रेन में अपने अधिकारी और मुस्लिम समुदाय के तीन लोगों की हत्या कर दी थी। तब उस पुलिसकर्मी को बचाने के लिए उसक
जिन्दगी और मौत के बीच फासला बहुत कम रह जाता है। यह तब महसूस हुआ जब किसी को केवल मुसलमान होने पर मारा जा सकता है। 31 जुलाई को नूंह में हुई साम्प्रदायिक हिंसा को आधार बनाकर
राजस्थान, जिला अलवर के गांव टिकरी गोविंदगढ़ का निवासी सैकुल खान अलवर में रहकर पढ़ाई कर रहा था। वह पुलिस भर्ती की तैयारी कर रहा था। उसकी अभी लगभग 2 महीने पहले ही शादी हुई थी
फरीदाबाद/ आज हिंदू फासीवादी जिस हिंदू राष्ट्र को बनाने की बात कर रहे हैं, उसकी छोटी-बड़ी झलकें आज भारत में घट रही घटनाओं में देखी जा सकती हैं। इसी कड़ी में
अठारहवीं सदी के इंग्लैण्ड में होने वाले चुनावी भ्रष्टाचार पर गूगल से ‘सर्च’ करने पर उसका ए आई स्वतः ही यह जवाब हाजिर कर देता हैः
एस.आई.आर. प्रक्रिया के दौरान बड़े पैमाने पर मतदाताओं की कटौती की गई। अब तक 13 करोड़ से ज्यादा मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए। जबकि 5-6 करोड़ लोगों को संदेह की आड़ में नोटिस भेजे गए। 13 करोड़ में से 70 प्रतिशत वो लोग थे जिन्हें स्थानांतरित या अनुपस्थित बता दिया गया। इस तरह बड़े स्तर पर मनमानी छंटनी की जा रही है। इसमें सबसे बड़ी संख्या अल्पसंख्यक, दलित, आदिवासी, महिलाओं और मलिन बस्तियों में रहने वालों की है।
इस मजदूर आंदोलन की विचारधारा मार्क्सवाद का यह स्पष्ट कहना था कि महान फ्रांसीसी क्रांति के जमाने से ही पूंजीपति वर्ग ने अपने समाज के लिए जो आदर्श घोषित कर रखा है- स्वतंत्रता, समता, बंधुत्व का आदर्श- वह पूंजीवाद की निजी सम्पत्ति के कारण कभी भी हासिल नहीं किया जा सकता। पूंजी के रूप में निजी सम्पत्ति के रहते स्वतंत्रता का मतलब होगा बाजार में खरीद-बेच की स्वतंत्रता, समता का मतलब होगा बाजार में खरीददार व विक्रेता की समता तथा बंधुत्व का मतलब होगा खरीद-बेच की व्यवस्था पर सहमति।
गाजापट्टी में इजरायल की कत्लेआम करने की मुहिम जारी है। इजरायली यहूदी नस्लवादी न तो किसी समझौते को मान रहे हैं और न ही वे अपनी विनाश लीला को रोक रहे हैं। वे नस्लीय सफाये की मुहिम चला रहे हैं। इसके जवाब में हमास और अन्य प्रतिरोध संगठन इजरायली कब्जाकारी सेना पर प्रहार कर रहे हैं।
अपने व्यापक नुकसान को देखते हुए अमरीकी साम्राज्यवादियों ने अप्रैल महीने में युद्ध विराम किया और फिर पाकिस्तान की मध्यस्थता में एक ज्ञापन समझौता किया। इस ज्ञापन समझौते में अधिकांशतः ईरान की मांगें स्वीकार की गयीं। यह वस्तुतः अमरीका की पराजय थी। इस समझौते के थोड़े ही दिनों बाद अमरीका ने इसका उल्लंघन शुरू कर दिया। इजरायल ने एक भी दिन इस समझौते को नहीं माना।