मुझे खेद है, अंकिता -कोलिन गोंसाल्वेस
मुझे खेद है, अंकिता कि आपकी हत्या की सीबीआई जांच की मांग करने वाले सुप्रीम कोर्ट में आपके मामले का निपटारा कर दिया गया और हम अभी तक मुख्य अपराधी को पकड़ने में कामयाब नहीं
मुझे खेद है, अंकिता कि आपकी हत्या की सीबीआई जांच की मांग करने वाले सुप्रीम कोर्ट में आपके मामले का निपटारा कर दिया गया और हम अभी तक मुख्य अपराधी को पकड़ने में कामयाब नहीं
सेंटर फार स्टडी आफ सोसाइटी एंड सेक्युलरिज्म (CSSS) की निगरानी के अनुसार, भारत में 2024 में 59 सांप्रदायिक दंगे हुए, जो 2023 में 32 दंगों की तुलना में 84 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है। सांप्रदायिक दं
(फिलिस्तीन एक्शन कार्यकर्ता फ्रांसेस्का नादिन, 39, को 29 जून से मुकदमे की प्रतीक्षा में रिमांड पर जेल में रखा गया है।
गाजा में लोग 27 जनवरी 2025 को अपने बचे हुए घरों और पड़ोस की ओर उत्तर की ओर लौट रहे हैं।
पिछले साल 7 अक्टूबर की सुबह को मैं और मेरी पत्नी हनीन ने फज्र की नमाज पढ़ी और नाश्ता किया। हम दोनों शिक्षक हैं और काम पर जाने से पहले अपने बच्चे मज्द को उसकी दादी के पास छ
रायपुरः दक्षिण मुंबई में बेस्ट (विद्युत वितरण कंपनी) ने स्मार्ट बिजली मीटर लगाने के काम को स्थगित कर दिया है। इस कंपनी के 10.8 लाख आवासीय और व्यवसायिक उप
अमरीकी साम्राज्यवादी और इजरायली शासक सोचते थे कि ईरान के शीर्ष नेतृत्व का सफाया करने के बाद ईरानी जनता अपनी सत्ता के विरुद्ध उठ खड़ी होगी और इसका फायदा उठाते हुए अमरीकी साम्राज्यवादी अपनी किसी कठपुतली को सत्ता में स्थापित कर देंगे। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। ईरानी अवाम अपनी सत्ता के समर्थन में मजबूती से खड़ी हो गई। यहां से अमरीकी साम्राज्यवादियों को समझ में आ गया कि वे ईरान पर कब्जा नहीं कर सकते।
अमेरिकी साम्राज्यवादी पश्चिम एशिया में और सारी दुनिया में अपनी साम्राज्यवादी जकड़न को खत्म नहीं होने देना चाहेंगे। वे इसके खिलाफ हर संभव प्रयास करेंगे। एक हमले में मुंह की खाने के बाद वे सबक लेकर आगे हमला करने से तौबा नहीं करेंगे। यह उनकी साम्राज्यवादी फितरत के खिलाफ होगा। यानी वे ईरान पर काबू पाने के लिए दूसरे तरीकों की खोज में लग जायेंगे।
पिछले दस-बारह सालों में हिन्दू फासीवादियों ने इस अनौपचारिक आपातकाल की शैली को काफी विकसित किया है। कहां किस छेद का इस्तेमाल करना है, इसमें उन्होंने महारत हासिल की है। इनके इस कृत्य में न्यायपालिका की सहभागिता से यह काम और आसान हो गया है। मतदाता सूची का विशेष गहन पुनर्रीक्षण इस सबका विशिष्ट उदाहरण है।
जैसा कि इंटरव्यू के शीर्षक से स्पष्ट है कि पिकेटी एक ऐसी दुनिया का ख्वाब परोसते हैं जिसमें बगैर पर्यावरण को नुकसान पहुंचाये ज्यादातर लोग खुशहाल बन सकते हैं। इस सुन्दर दुनिया को हासिल करने के लिए वे किसी वर्ग संघर्ष बढ़ाने या क्रांति की वकालत नहीं करते। बल्कि वे कुछ नुस्खे सुझाते हैं जिस पर चल कर मौजूदा पूंजीवादी-साम्राज्यवादी दुनिया को ही खुशनुमा बनाया जा सकता है।
अमरीकी साम्राज्यवादी वर्चस्व को बढ़ाने में पश्चिम एशिया में दृढ़ स्तम्भ इजरायल रहा है। 1979 से पहले ईरान का शासक शाह रजा पहलवी भी इस क्षेत्र में अमरीका का लठैत रहा है। 1979 में रजा पहलवी का तख्ता उलटने के बाद जो इस्लामी सत्ता आयी, वह लगातार अमरीकी साम्राज्यवाद की वर्चस्ववादी नीतियों का विरोध करती रही थी। यह सत्ता इजरायल द्वारा फिलिस्तीनियों को उजाड़े जाने और उनकी जमीनों पर यहूदी बस्तियां बसाने का विरोध करती रही है।