उम्मीद -प्रियदर्शन

Published
Wed, 09/16/2026 - 15:50
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मुझे इतिहास से उम्मीद थी
कि वह लोगों को कुछ जरूरी सबक देगा
मुझे वर्तमान से उम्मीद थी
कि वह पुरानी गलतियां नहीं दुहराएगा
मुझे भविष्य पर भरोसा था
कि वह पुरानी भूलों को पीछे छोड़ आएगा।
लेकिन यह सारा समय एक सा निकला
रूप और नाम बदल कर आते रहे आततायी
स्पार्टाकस को मारते रहे
रोहित वेमुला को मरने पर मजबूर करते रहे
पहले वे युद्ध करते रहे
फिर लाते रहे शांति प्रस्ताव
बीच-बीच में उदार होकर देते रहे
इतनी मोहलत
कि भर जाएं पीड़ितों के घाव।
सारा समय उनकी मुट्ठी में रहा।
भूत-वर्तमान-भविष्य सब उनकी सेवा में।
बस वे इस बात पर हैरान होते रहे
बार-बार कुचले जाने के बावजूद
कुछ लोग बार-बार कैसे खड़े हो जाते हैं
इंसाफ और अमन के लिए लड़ने को तैयार
अतीत को पीछे छोड़, वर्तमान का पहिया मोड़
भविष्य को अपनी तरह से गढ़ने को तैयार।                                  

साभार:  samalochan.com

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