हालिया विधानसभा चुनाव: कुछ निष्कर्ष
इन सभी राज्यों में मजदूर-मेहनतकश जनता के सामने कोई ऐसी पार्टी नहीं थी जो सच्चे अर्थों में उसके हितों, आकांक्षाओं व भविष्य का प्रतिनिधित्व करती थी। विकल्पहीनता उसे एक धूर्त पूंजीवादी नेता या पार्टी के स्थान पर दूसरे धूर्त नेता या पार्टी की ओर ही धकेलती है। हिन्दू फासीवाद के बढ़ते खतरे का सामना इनमें से कोई भी पार्टी करने में सक्षम नहीं है।