विविध

आई टी सी ने किया सेंचुरी मिल का अधिग्रहण

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सेन्चुरी मिल जो पिछले 42 वर्ष या चार दशक से कागज उद्योग में अपना महत्वपूर्ण स्थान रखे हुए थी उसका नाम ‘‘सेन्चुरी पल्प एण्ड पेपर मिल’’ से अब आई टी सी लिमिटेड हो चुका है जि

जेन जी के बाद जेन अल्फा

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पिछले दिनों जंतर मंतर पर जेन जी का विरोध प्रदर्शन हुआ। जेन जी की मांग पेपर लीक मामले में शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफे की थी। शुरूआत में तो मोदी सरकार और लगु

एथेनाल ब्लेंड पेट्रोल: दावे और हकीकत

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आजकल ई-20 पेट्रोल का मामला काफी चर्चा में है। मोदी सरकार ने ई-20 एथेनाल मिश्रित पेट्रोल को ‘आत्मनिर्भर भारत’, ‘किसान कल्याण’ और ‘ऊर्जा सुरक्षा’ जैसे दावों के साथ बिना बहस

अखिल भारतीय विरोध कार्यक्रम के तहत विरोध प्रदर्शन

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रुद्रपुर/ 10 अगस्त को अंग्रेजो भारत छोड़ो आंदोलन की 83वीं बरसी पर मोदी सरकार की जन विरोधी नीतियों के खिलाफ विभिन्न संगठनों एवं यूनियनों ने श्रमिक संयुक्त

जी राम जी योजना पहले महीने में ही धड़ाम

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मोदी सरकार ने ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना मनरेगा को समाप्त कर उसकी जगह वी बी जी राम जी योजना बड़े गाजे-बाजे के साथ प्रस्तुत की थी। दावा किया गया था कि इसमें अब वर्ष में 10

उधमसिंह के शहादत दिवस एवं मुंशी प्रेमचंद के जन्मदिवस पर विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन

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प्रतिवर्ष 31 जुलाई को हमारे देश के प्रगतिशील-क्रांतिकारी संगठन महान क्रांतिकारी उधमसिंह का शहादत दिवस और महान कथा सम्राट मुंशी प्रेमचंद का जन्मदिवस मनाते हैं। उधमसिंह, जि

काकरोच सरदार और समाजवादी जनतांत्रिक मोर्चा

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उदारवादी या वाम-उदारवादी अपनी प्रकृति से ही पूंजीवादी समाज के मूल अंतर्विरोधों को देखने में असमर्थ होते हैं। इसीलिए वे इसकी आम गति को देखने में असमर्थ होते हैं। उनका निजी सम्पत्ति, पैसे, प्रतियोगिता, इत्यादि में दृढ़़ विश्वास होता है। इनके बिना वे किसी समाज की कल्पना नहीं कर पाते। और ठीक इसी कारण वे यह नहीं देख पाते कि भ्रष्टाचार निजी सम्पत्ति, पैसा और प्रतियोगिता का अनिवार्य परिणाम है। कि इस समाज में भ्रष्टाचार को कानूनी वैधता प्रदान की जा सकती है, उसे खत्म नहीं किया जा सकता।

चाय बागान मजदूरों के अनशन-आंदोलन के 100 दिन

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दार्जिलिंग पहाड़ियों के गाड़ीधुरा और पंखाबाड़ी के बीच स्थित लांगव्यू चाय बागान कभी दार्जिलिंग के सबसे बड़े बागानों में से एक था। इसकी उत्पादकता भी काफी अधिक थी। 1879 में स्था

जंतर-मंतर पूरे देश में फैल रहा है!

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जंतर-मंतर पर छात्र-युवा आंदोलन के आगे घुटने टेकते हुए मोदी सरकार ने सोचा था कि एक बार घुटने टेक कर वह छात्रों-युवाओं के उभार की लहर को थाम लेगी और अपनी सरकार को और नुकसान

‘जेन-जी’ और शहीद भगत सिंह का ‘युवक’

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पंूजीवादी दुनिया में फैशन आते-जाते रहते हैं। आजकल भारत में ‘जेन-जी’ फैशन में है। नेताओं से लेकर बुद्धिजीवी तक ‘जेन-जी’ के मुरीद हो गये हैं। वे ‘जेन-जी’ के गुण गा रहे हैं।

आलेख

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अठारहवीं सदी के इंग्लैण्ड में होने वाले चुनावी भ्रष्टाचार पर गूगल से ‘सर्च’ करने पर उसका ए आई स्वतः ही यह जवाब हाजिर कर देता हैः 

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एस.आई.आर. प्रक्रिया के दौरान बड़े पैमाने पर मतदाताओं की कटौती की गई। अब तक 13 करोड़ से ज्यादा मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए। जबकि 5-6 करोड़ लोगों को संदेह की आड़ में नोटिस भेजे गए। 13 करोड़ में से 70 प्रतिशत वो लोग थे जिन्हें स्थानांतरित या अनुपस्थित बता दिया गया। इस तरह बड़े स्तर पर मनमानी छंटनी की जा रही है। इसमें सबसे बड़ी संख्या अल्पसंख्यक, दलित, आदिवासी, महिलाओं और मलिन बस्तियों में रहने वालों की है।

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इस मजदूर आंदोलन की विचारधारा मार्क्सवाद का यह स्पष्ट कहना था कि महान फ्रांसीसी क्रांति के जमाने से ही पूंजीपति वर्ग ने अपने समाज के लिए जो आदर्श घोषित कर रखा है- स्वतंत्रता, समता, बंधुत्व का आदर्श- वह पूंजीवाद की निजी सम्पत्ति के कारण कभी भी हासिल नहीं किया जा सकता। पूंजी के रूप में निजी सम्पत्ति के रहते स्वतंत्रता का मतलब होगा बाजार में खरीद-बेच की स्वतंत्रता, समता का मतलब होगा बाजार में खरीददार व विक्रेता की समता तथा बंधुत्व का मतलब होगा खरीद-बेच की व्यवस्था पर सहमति।

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गाजापट्टी में इजरायल की कत्लेआम करने की मुहिम जारी है। इजरायली यहूदी नस्लवादी न तो किसी समझौते को मान रहे हैं और न ही वे अपनी विनाश लीला को रोक रहे हैं। वे नस्लीय सफाये की मुहिम चला रहे हैं। इसके जवाब में हमास और अन्य प्रतिरोध संगठन इजरायली कब्जाकारी सेना पर प्रहार कर रहे हैं। 

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अपने व्यापक नुकसान को देखते हुए अमरीकी साम्राज्यवादियों ने अप्रैल महीने में युद्ध विराम किया और फिर पाकिस्तान की मध्यस्थता में एक ज्ञापन समझौता किया। इस ज्ञापन समझौते में अधिकांशतः ईरान की मांगें स्वीकार की गयीं। यह वस्तुतः अमरीका की पराजय थी। इस समझौते के थोड़े ही दिनों बाद अमरीका ने इसका उल्लंघन शुरू कर दिया। इजरायल ने एक भी दिन इस समझौते को नहीं माना।