विविध

शिक्षा व रोजगार : दशा और दुर्दशा

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भारत की शिक्षा व्यवस्था में एक अजीबोगरीब विरोधाभास नजर आता है। एक ओर उच्च शिक्षा में आई आई टी, एम्स और आई आई एम जैसे सरकारी संस्थान हैं जो क्रमशः इंजीनियरिंग, चिकित्सा और

किसानों के धरने का सहयोग-समर्थन

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हरिद्वार/ उत्तराखण्ड के किसान संगठनों ने अपनी विभिन्न न्यायपूर्ण मांगों के लिए बीते दिनों 3 दिवसीय जिला मुख्यालयों पर धरने का आह्वान किया। इसी कड़ी में उत

सूरत के संघर्षरत मजदूरों के समर्थन में प्रदर्शन

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हरिद्वार/ 20 अगस्त 2026 को चिन्मय डिग्री कालेज के निकट विभिन्न संगठनों द्वारा गुजरात के सूरत में संघर्षरत मजदूरों पर पुलिस प्रशासन व गुंड़ों द्वारा बर्बर

ग्रामीण मजदूरों का प्रदर्शन

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रसड़ा (बलिया)/ 24 अगस्त को रसड़ा तहसील मुख्यालय पर ग्रामीण मजदूर यूनियन द्वारा ग्रामीण मजदूरों की विभिन्न मांगों को लेकर जुलूस निकाला गया। जुलूस कई रास्तों

सरकारी अस्पताल के खस्ताहाल: धरना-प्रदर्शन

/sarakari-hospital-ke-khastaahaal-dharana-pradarshan

रामनगर/ रामनगर के सरकारी अस्पताल की खस्ता हालत पर संयुक्त संघर्ष समिति के बैनर तले विभिन्न संगठनों द्वारा 24 अगस्त को अस्पताल परिसर में धरना-प्रदर्शन किय

परेशान हाल अंधभक्त और उनके आका

/pareshan-haal-andhbhakt-and-unake-aakaa

अंधभक्त को न तो तर्क से, न विज्ञान से, न भारत की महान ऐतिहासिक दार्शनिक व ज्ञान परम्परा से और न ही भारत के वर्तमान या भविष्य से कोई लेना-देना है। और यह भी सच है कि अंधभक्त जिनका अनुयायी है उनका भी इससे कोई लेना-देना नहीं है। वे पौराणिक कथाओं को इतिहास का दर्जा देना चाहते हैं और अपने कुटिल हितों को आस्था का आवरण पहनाकर परम सत्य का दर्जा दिलाना चाहते हैं।

मकरूह

/makarooh

‘‘गत्ते बिछा लो खाना खा लेते हैं।’’ राम मोहन ने साथ में काम कर रहे लड़कों को संबोधित करते हुए कहा। रात के नौ बज चुके हैं। सभी लड़के लेथ मशीन में अपने-अपने काम पर लगे हुए है

चले थे दुबे बनने बन गये छब्बे

/chale-the-dube-banane-ban-gaye-chhabbe

भारतीय अर्थव्यवस्था के बारे में अनर्गल डींगे हांकने वाली संघी मशीनरी इतने खुशनुमा दावे करती रहती है कि जनता तो क्या पूंजीपति वर्ग भी उन पर भरोसा करने से इंकार करता रहा है

नई राह दिखलाते बच्चे

/nai-raah-dikhalate-bachche

अंधेरे के घटाटोप में 
प्रचार तंत्र की लहालोट में 
लोकतंत्र पर पड़ी चोट में  
दीपक एक जलाते बच्चे 
जग का तिमिर मिटाते बच्चे
नई राह दिखलाते बच्चे 

सामंती सद्गुण और पूंजीवादी बराबरी

/samanti-sadguna-and-punjivadi-baraabari

थ्योरेस्टीन वेब्लेन एक अमरीकी समाजशास्त्री थे। 1899 में उन्होंने अमेरिकी समाज के ऊपर एक किताब प्रकाशित की: द थ्योरी आव लीशर क्लास (फुरसती वर्ग के बारे में सिद्धान्त)। इस

आलेख

/punjivadi-jantantra-and-chunavi-corruption

अठारहवीं सदी के इंग्लैण्ड में होने वाले चुनावी भ्रष्टाचार पर गूगल से ‘सर्च’ करने पर उसका ए आई स्वतः ही यह जवाब हाजिर कर देता हैः 

/election-aayog-hindu-fascist-and-loktantra

एस.आई.आर. प्रक्रिया के दौरान बड़े पैमाने पर मतदाताओं की कटौती की गई। अब तक 13 करोड़ से ज्यादा मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए। जबकि 5-6 करोड़ लोगों को संदेह की आड़ में नोटिस भेजे गए। 13 करोड़ में से 70 प्रतिशत वो लोग थे जिन्हें स्थानांतरित या अनुपस्थित बता दिया गया। इस तरह बड़े स्तर पर मनमानी छंटनी की जा रही है। इसमें सबसे बड़ी संख्या अल्पसंख्यक, दलित, आदिवासी, महिलाओं और मलिन बस्तियों में रहने वालों की है।

/uddharak-ideology-ki-talaas

इस मजदूर आंदोलन की विचारधारा मार्क्सवाद का यह स्पष्ट कहना था कि महान फ्रांसीसी क्रांति के जमाने से ही पूंजीपति वर्ग ने अपने समाज के लिए जो आदर्श घोषित कर रखा है- स्वतंत्रता, समता, बंधुत्व का आदर्श- वह पूंजीवाद की निजी सम्पत्ति के कारण कभी भी हासिल नहीं किया जा सकता। पूंजी के रूप में निजी सम्पत्ति के रहते स्वतंत्रता का मतलब होगा बाजार में खरीद-बेच की स्वतंत्रता, समता का मतलब होगा बाजार में खरीददार व विक्रेता की समता तथा बंधुत्व का मतलब होगा खरीद-बेच की व्यवस्था पर सहमति।

/war-and-diplomacy-uthal-puthal-se-bhari-duniyaa

गाजापट्टी में इजरायल की कत्लेआम करने की मुहिम जारी है। इजरायली यहूदी नस्लवादी न तो किसी समझौते को मान रहे हैं और न ही वे अपनी विनाश लीला को रोक रहे हैं। वे नस्लीय सफाये की मुहिम चला रहे हैं। इसके जवाब में हमास और अन्य प्रतिरोध संगठन इजरायली कब्जाकारी सेना पर प्रहार कर रहे हैं। 

/amerika-ka-iran-par-operation-d-day-hatasha-ka-parinam

अपने व्यापक नुकसान को देखते हुए अमरीकी साम्राज्यवादियों ने अप्रैल महीने में युद्ध विराम किया और फिर पाकिस्तान की मध्यस्थता में एक ज्ञापन समझौता किया। इस ज्ञापन समझौते में अधिकांशतः ईरान की मांगें स्वीकार की गयीं। यह वस्तुतः अमरीका की पराजय थी। इस समझौते के थोड़े ही दिनों बाद अमरीका ने इसका उल्लंघन शुरू कर दिया। इजरायल ने एक भी दिन इस समझौते को नहीं माना।