विविध

आगे बढ़ता मजदूर आंदोलन और हाथ मलता सुधारवादी नेतृत्व

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देश के बड़े हिस्से में मजदूर संघर्षों की लहर जारी है। उदारीकरण-निजीकरण-वैश्वीकरण के दौर में ज्यादा तेजी बढ़ती हुई पूंजीपति वर्ग और मजदूर वर्ग की खाई की पृष्ठभूमि में मजदूरी

मई दिवस: मजदूर आंदोलन के दमन का देशव्यापी प्रतिरोध

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इस बार मजदूर आंदोलन की नई लहर और पुलिसिया दमन के साये के बीच जोश और गुस्से-आक्रोश के साथ मई दिवस मनाया गया। इस अवसर पर मजदूर अधिकार संघर्ष अभियान (मासा) द्वारा न्यूनतम वे

जारी है मजदूर आंदोलन का दमन

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उत्तर प्रदेश की योगी सरकार नोएडा में हुए मजदूर आंदोलनों से इतना घबरा गयी है कि वह अब मई दिवस की महान परंपरा को भी नहीं मनाने दे रही है। मई दिवस के शहीदों को याद करने से भ

न्यूनतम वेतन लागू करने व दमन के विरोध में प्रदर्शन

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फरीदाबाद/ दिनांक 14 मई 2026 को फरीदाबाद जन संघर्ष समिति के बैनर तले इंकलाबी मजदूर केंद्र एवं अन्य घटक संगठनों ने एक प्रदर्शन आयोजित किया। यह प्रदर्शन हरि

हिंदू फासीवाद, चुनाव आयोग और विधानसभा चुनाव

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हिंदू फासीवादियों के लिए बिहार एस आई आर की पहली प्रयोगशाला थी। पश्चिम बंगाल  निशाने पर लंबे समय से ही था। ये तमाम प्रयास के बावजूद यहां की सत्ता से काफी दूर थे। चुनाव आयोग के जरिए एस आई आर और गृह मंत्रालय के अधीन अर्ध सैनिक बलों के दम पर इस किले को फतह करना हिंदू राष्ट्रवादियों का खास मकसद था। अंततः इस चुनाव में यहां की सत्ता को गिरफ्त में लेने में ये सफल हो चुके हैं। 

मार्च-अप्रैल-मई : मजदूर उभार के 3 माह

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भारत का मजदूर वर्ग उदारीकरण- निजीकरण की नीतियों के भारत में लागू होने के बाद की सबसे तीव्र लहरों में से एक (और संभवतः सबसे व्यापक) से गुजर रहा है। यद्यपि यह लहर अप्रैल मा

बस और ट्रेन का सफर

ट्रेन या बस में सफर करते हुए हमें एक उलझन सी रहती है। ट्रेन में सफर के लिए स्टेशन पर इंतजार करते हुए यह पता नहीं होता है कि ट्रेन कब आयेगी। बस में बैठकर इंतजार करते हुए स

सेंचुरी मिल: यूनियन नेताओं को मिला चाटुकारिता का इनाम

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सेन्चुरी मिल, जो आदित्य बिडला रियल एस्टेट (IBREL) लिमिटेड का हिस्सा थी, जिसका आई टी सी लिमिटेड द्वारा अधिग्रहण पूर्ण होने के आखिरी चरण में हैं वहां एक अजीब तरीके का सन्ना

युवा मजदूर

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घर से निकलते ही रुंधे गले से
मां ने पीछे से आवाज दी थी
रुक जा, मत जा मेरे लाल
शहर में कौन रखेगा तेरा खयाल,
क्या खायेगा? क्या पियेगा?
तुझे कुछ भी बनाना नहीं आता

आपका नजरिया- जेल में बंद साथियों के नाम संदेश

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गुड़गांव जेल में गये साथियों को लाल सलाम करता हूं जो भी पुलिस द्वारा फर्जी तरीके से गिरफ्तार किये गये हैं। शासकों ने डरकर अपनी व्यवस्था को बचाने के लिए उन्हें गिरफ्तार किय

आलेख

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अमरीकी साम्राज्यवादी और इजरायली शासक सोचते थे कि ईरान के शीर्ष नेतृत्व का सफाया करने के बाद ईरानी जनता अपनी सत्ता के विरुद्ध उठ खड़ी होगी और इसका फायदा उठाते हुए अमरीकी साम्राज्यवादी अपनी किसी कठपुतली को सत्ता में स्थापित कर देंगे। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। ईरानी अवाम अपनी सत्ता के समर्थन में मजबूती से खड़ी हो गई। यहां से अमरीकी साम्राज्यवादियों को समझ में आ गया कि वे ईरान पर कब्जा नहीं कर सकते।

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अमेरिकी साम्राज्यवादी पश्चिम एशिया में और सारी दुनिया में अपनी साम्राज्यवादी जकड़न को खत्म नहीं होने देना चाहेंगे। वे इसके खिलाफ हर संभव प्रयास करेंगे। एक हमले में मुंह की खाने के बाद वे सबक लेकर आगे हमला करने से तौबा नहीं करेंगे। यह उनकी साम्राज्यवादी फितरत के खिलाफ होगा। यानी वे ईरान पर काबू पाने के लिए दूसरे तरीकों की खोज में लग जायेंगे।

/emerjency-tab-aur-ab

पिछले दस-बारह सालों में हिन्दू फासीवादियों ने इस अनौपचारिक आपातकाल की शैली को काफी विकसित किया है। कहां किस छेद का इस्तेमाल करना है, इसमें उन्होंने महारत हासिल की है। इनके इस कृत्य में न्यायपालिका की सहभागिता से यह काम और आसान हो गया है। मतदाता सूची का विशेष गहन पुनर्रीक्षण इस सबका विशिष्ट उदाहरण है।

/piketi-ka-global-justice-project-samraajyavad-ki-pairokari

जैसा कि इंटरव्यू के शीर्षक से स्पष्ट है कि पिकेटी एक ऐसी दुनिया का ख्वाब परोसते हैं जिसमें बगैर पर्यावरण को नुकसान पहुंचाये ज्यादातर लोग खुशहाल बन सकते हैं। इस सुन्दर दुनिया को हासिल करने के लिए वे किसी वर्ग संघर्ष बढ़ाने या क्रांति की वकालत नहीं करते। बल्कि वे कुछ नुस्खे सुझाते हैं जिस पर चल कर मौजूदा पूंजीवादी-साम्राज्यवादी दुनिया को ही खुशनुमा बनाया जा सकता है। 

/amerika-dwaara-iran-par-naya-hamala-isake-doorgami-result

अमरीकी साम्राज्यवादी वर्चस्व को बढ़ाने में पश्चिम एशिया में दृढ़ स्तम्भ इजरायल रहा है। 1979 से पहले ईरान का शासक शाह रजा पहलवी  भी इस क्षेत्र में अमरीका का लठैत रहा है। 1979 में रजा पहलवी का तख्ता उलटने के बाद जो इस्लामी सत्ता आयी, वह लगातार अमरीकी साम्राज्यवाद की वर्चस्ववादी नीतियों का विरोध करती रही थी। यह सत्ता इजरायल द्वारा फिलिस्तीनियों को उजाड़े जाने और उनकी जमीनों पर यहूदी बस्तियां बसाने का विरोध करती रही है।