कामरेड जी एन साईंबाबा को श्रद्धांजलि

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सपनों की कलम  -मौमिता आलम

मत पूछो कभी कि कैसे होती है 
एक कामरेड की मौत?
एक पेड़ की तरह
पहले उसे उखाड़ा जाता है 
घर से
फिर
कैद करके रखा जाता है अंडा सेल में 
बगैर रौशनी और बारिश 
बादलों और हवा के,
राज्य मिटा देना चाहता है पेड़ को 
सुखा देना चाहता है पौधे को पूरा का पूरा
फिर राज्य
शनैः शनैः, थोड़ा थोड़ा, टुकड़े दर टुकड़े 
चिकित्सकीय रूप में बहुत बारीकी से 
लिखता है उसका मृत्यु प्रमाणपत्र।
बेशक वे कर सकते हैं हत्या 
एक पेड़ की
पर कैसे कर सकते हैं खत्म
पेड़ों की उन हजार जड़ों को
जो अंकुरित हुई हैं उनकी रोशनाई से 
उनकी व्हील चेयर के पहियों से?
कभी मत करो शोक
एक कामरेड की मौत का
अपने चारों ओर देखो
तुम्हें हमेशा नजर आएगा एक पेड़
लहराते हुए अपनी पत्तियां
बिगुल सा फूंकते हुए 
युद्ध जारी है!
और 
साईं बाबा कभी नहीं मरते!

आलेख

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अठारहवीं सदी के इंग्लैण्ड में होने वाले चुनावी भ्रष्टाचार पर गूगल से ‘सर्च’ करने पर उसका ए आई स्वतः ही यह जवाब हाजिर कर देता हैः 

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एस.आई.आर. प्रक्रिया के दौरान बड़े पैमाने पर मतदाताओं की कटौती की गई। अब तक 13 करोड़ से ज्यादा मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए। जबकि 5-6 करोड़ लोगों को संदेह की आड़ में नोटिस भेजे गए। 13 करोड़ में से 70 प्रतिशत वो लोग थे जिन्हें स्थानांतरित या अनुपस्थित बता दिया गया। इस तरह बड़े स्तर पर मनमानी छंटनी की जा रही है। इसमें सबसे बड़ी संख्या अल्पसंख्यक, दलित, आदिवासी, महिलाओं और मलिन बस्तियों में रहने वालों की है।

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इस मजदूर आंदोलन की विचारधारा मार्क्सवाद का यह स्पष्ट कहना था कि महान फ्रांसीसी क्रांति के जमाने से ही पूंजीपति वर्ग ने अपने समाज के लिए जो आदर्श घोषित कर रखा है- स्वतंत्रता, समता, बंधुत्व का आदर्श- वह पूंजीवाद की निजी सम्पत्ति के कारण कभी भी हासिल नहीं किया जा सकता। पूंजी के रूप में निजी सम्पत्ति के रहते स्वतंत्रता का मतलब होगा बाजार में खरीद-बेच की स्वतंत्रता, समता का मतलब होगा बाजार में खरीददार व विक्रेता की समता तथा बंधुत्व का मतलब होगा खरीद-बेच की व्यवस्था पर सहमति।

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गाजापट्टी में इजरायल की कत्लेआम करने की मुहिम जारी है। इजरायली यहूदी नस्लवादी न तो किसी समझौते को मान रहे हैं और न ही वे अपनी विनाश लीला को रोक रहे हैं। वे नस्लीय सफाये की मुहिम चला रहे हैं। इसके जवाब में हमास और अन्य प्रतिरोध संगठन इजरायली कब्जाकारी सेना पर प्रहार कर रहे हैं। 

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अपने व्यापक नुकसान को देखते हुए अमरीकी साम्राज्यवादियों ने अप्रैल महीने में युद्ध विराम किया और फिर पाकिस्तान की मध्यस्थता में एक ज्ञापन समझौता किया। इस ज्ञापन समझौते में अधिकांशतः ईरान की मांगें स्वीकार की गयीं। यह वस्तुतः अमरीका की पराजय थी। इस समझौते के थोड़े ही दिनों बाद अमरीका ने इसका उल्लंघन शुरू कर दिया। इजरायल ने एक भी दिन इस समझौते को नहीं माना।