काश ऐसा हो सहमी आंखों में -गौहर रज़ा

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काश ये बेटियां बिगड़ जाएं
इतना बिगड़ें के ये बिफर जाएं
उन पे बिफरें जो तीर-ओ-तेशा लिए
राह में बुन रहे हैं दार ओ रसन
और हर आजमाइश द- ए -दार -ओ द- रसन
इनको रस्ते की धूल लगने लगे 

काश ऐसा हो अपने चेहरे से 
अंचलों को झटक के सबसे कहें 
ज़ुल्म की हद जो तुमने खेंची थी 
उसको पीछे कभी का छोड़ चुके 

काश चेहरे से खौफ का ये हिजाब
यक-ब-यक इस तरह पिघल जाएं
तमतमा उठे ये रुख ए रोशन
दिल का हर तार टूटने सा लगे

काश ऐसा हो सहमी आंखों में
कहर की बिजलियां कड़क उठें
और मांगे ये सारी दुनिया से
एक-एक करके हर गुनाह का हिसाब
वोह गुनाह जो कभी किये ही नहीं
और उनका भी जो जरूरी हैं

काश ऐसा हो मेरे दिल की कसक
इनके नाजुक लबों से फूट पड़े

आलेख

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अठारहवीं सदी के इंग्लैण्ड में होने वाले चुनावी भ्रष्टाचार पर गूगल से ‘सर्च’ करने पर उसका ए आई स्वतः ही यह जवाब हाजिर कर देता हैः 

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एस.आई.आर. प्रक्रिया के दौरान बड़े पैमाने पर मतदाताओं की कटौती की गई। अब तक 13 करोड़ से ज्यादा मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए। जबकि 5-6 करोड़ लोगों को संदेह की आड़ में नोटिस भेजे गए। 13 करोड़ में से 70 प्रतिशत वो लोग थे जिन्हें स्थानांतरित या अनुपस्थित बता दिया गया। इस तरह बड़े स्तर पर मनमानी छंटनी की जा रही है। इसमें सबसे बड़ी संख्या अल्पसंख्यक, दलित, आदिवासी, महिलाओं और मलिन बस्तियों में रहने वालों की है।

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