मोनिका-मोनिस की शादी पर हिंदू फासीवादियों का ग्रहण लगा

पिछले दिनों सोशल मीडिया पर मोनिका और मोनिस की शादी का कार्ड वायरल हो रहा था। वजह थी लड़की का हिंदू और लड़के का मुस्लिम होना। और इससे भी बड़ी बात थी कि ये शादी दोनों परिवारों की मर्ज़ी से हो रही थी। मोनिका का परिवार पौड़ी (उत्तराखंड) में रहता है और मोनिस का परिवार अमेठी (उत्तर प्रदेश) में। मोनिका के पिता यशपाल बेनाम भाजपा के नेता हैं और पौड़ी नगरपालिका के चेयरमैन हैं। वे पहले विधायक भी रह चुके हैं। 
    

जब मोनिका और मोनिस की शादी के कार्ड बांटे जा रहे थे तो लोगों ने इस शादी की सराहना की। ये समाज के आम चलन के हिसाब से बेमेल शादी थी लेकिन चूंकि यह समाज में एक नया संदेश दे रही थी इसलिए समाज के प्रगतिशील लोगों को अच्छा लगा। मोनिका के पिता ने भी कहा कि यह शादी परिवार की मर्ज़ी से हो रही है और हम सब इससे खुश हैं।
    

लेकिन समाज में जहरीला प्रचार फैलाने वाले संगठनों को यह सब पसंद नहीं आया। और तब तो और नहीं जब उनके नेता हाल ही में ‘द केरला स्टोरी’ फिल्म के माध्यम से लव जेहाद को समाज में स्थापित कर हिन्दू और मुस्लिमों के बीच नफरत का बीज बोने में जुटे हों। इन संगठनों ने इस शादी को भी लव जेहाद करार दे दिया और पौड़ी और कोटद्वार में इस शादी के खिलाफ प्रदर्शन होने लगे। परिवार को धमकियां दी जाने लगीं। और अंततः मज़बूर होकर दोनों परिवारों को शादी समारोह को रोकना पड़ा। और इस तरह मोनिका और मोनिस के शादी समारोह को हिन्दू फासीवादियों का ग्रहण लग गया।

ऐसा नहीं कि आम समाज में या खुद भाजपा के अंदर ऐसे लोगों के उदाहरण मौजूद नहीं हैं जिन्होंने अंतरधार्मिक शादियां न की हों। और ऐसे लोगों का उदाहरण देकर ही धर्मनिरपेक्ष लोग हिंदू फासीवादियों को आइना दिखाते रहे हैं। यह स्थिति हिंदू फासीवादियों को असहज़ करती रही है। अब वे इस स्थिति को बदलना चाहते हैं। और अब जब वे सत्ता के शीर्ष पर विराजमान हैं तो यह उनके इस काम को और आसान बना देता है। तमाम संस्थाओं में आज हिंदू फासीवादियों ने अपने लोगों को भर दिया है जो ऐसे मौके पर उनके लिए काम करते हैं। सोशल मीडिया के जमाने में हिंदू फासीवादियों का आई टी सेल इस काम को तेज गति दे रहा है।
    

प्रसिद्ध मरहूम शायर राहत इंदौरी का एक शेर ऐसे हालातों पर तंज कसता है
     ‘‘लगेगी आग तो आएंगे कई घर जद में 
       यहां केवल हमारा मकान थोड़े ही है’’ 
    

और यही चीज भाजपा नेता यशपाल बेनाम के साथ हुई है। यशपाल जिस पार्टी (भाजपा) से जुड़े रहे वह पार्टी लगातार समाज में सांप्रदायिक ध्रुवीकरण कर हिंदू और मुस्लिमों के बीच नफरत की खाई को चौड़ा करती रही है। उसके नेता लगातार महिलाओं की आज़ादी को बाधित कर उन्हें अपने मन पसंद साथी से शादी करने से रोकते रहे हैं। तो अब यह कैसे संभव होता कि इस जहरीले वातावरण में खुद उनकी बेटी अपने मनपसंद मुस्लिम लड़के से खुलेआम शादी कर पाती।     
    

आज हिंदू फासीवादियों ने जो ग्रहण मोनिका-मोनिस शादी पर लगाया है वह समाज की प्रगतिशील ताकतों के लिए चुनौती है, कि उन्हें इन हिंदू फासीवादियों को नेस्तनाबूत करने के लिए ज्यादा मेहनत से काम करना होगा।
 

आलेख

/west-asia-mein-badalata-shakti-santulan-samajhautaa-gyapan-ke-baad-ki-sthiti

अमरीकी साम्राज्यवादी और इजरायली शासक सोचते थे कि ईरान के शीर्ष नेतृत्व का सफाया करने के बाद ईरानी जनता अपनी सत्ता के विरुद्ध उठ खड़ी होगी और इसका फायदा उठाते हुए अमरीकी साम्राज्यवादी अपनी किसी कठपुतली को सत्ता में स्थापित कर देंगे। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। ईरानी अवाम अपनी सत्ता के समर्थन में मजबूती से खड़ी हो गई। यहां से अमरीकी साम्राज्यवादियों को समझ में आ गया कि वे ईरान पर कब्जा नहीं कर सकते।

/war-anay-sadhanon-se-politics-ka-hi-jaari-roop-hai

अमेरिकी साम्राज्यवादी पश्चिम एशिया में और सारी दुनिया में अपनी साम्राज्यवादी जकड़न को खत्म नहीं होने देना चाहेंगे। वे इसके खिलाफ हर संभव प्रयास करेंगे। एक हमले में मुंह की खाने के बाद वे सबक लेकर आगे हमला करने से तौबा नहीं करेंगे। यह उनकी साम्राज्यवादी फितरत के खिलाफ होगा। यानी वे ईरान पर काबू पाने के लिए दूसरे तरीकों की खोज में लग जायेंगे।

/emerjency-tab-aur-ab

पिछले दस-बारह सालों में हिन्दू फासीवादियों ने इस अनौपचारिक आपातकाल की शैली को काफी विकसित किया है। कहां किस छेद का इस्तेमाल करना है, इसमें उन्होंने महारत हासिल की है। इनके इस कृत्य में न्यायपालिका की सहभागिता से यह काम और आसान हो गया है। मतदाता सूची का विशेष गहन पुनर्रीक्षण इस सबका विशिष्ट उदाहरण है।

/piketi-ka-global-justice-project-samraajyavad-ki-pairokari

जैसा कि इंटरव्यू के शीर्षक से स्पष्ट है कि पिकेटी एक ऐसी दुनिया का ख्वाब परोसते हैं जिसमें बगैर पर्यावरण को नुकसान पहुंचाये ज्यादातर लोग खुशहाल बन सकते हैं। इस सुन्दर दुनिया को हासिल करने के लिए वे किसी वर्ग संघर्ष बढ़ाने या क्रांति की वकालत नहीं करते। बल्कि वे कुछ नुस्खे सुझाते हैं जिस पर चल कर मौजूदा पूंजीवादी-साम्राज्यवादी दुनिया को ही खुशनुमा बनाया जा सकता है। 

/amerika-dwaara-iran-par-naya-hamala-isake-doorgami-result

अमरीकी साम्राज्यवादी वर्चस्व को बढ़ाने में पश्चिम एशिया में दृढ़ स्तम्भ इजरायल रहा है। 1979 से पहले ईरान का शासक शाह रजा पहलवी  भी इस क्षेत्र में अमरीका का लठैत रहा है। 1979 में रजा पहलवी का तख्ता उलटने के बाद जो इस्लामी सत्ता आयी, वह लगातार अमरीकी साम्राज्यवाद की वर्चस्ववादी नीतियों का विरोध करती रही थी। यह सत्ता इजरायल द्वारा फिलिस्तीनियों को उजाड़े जाने और उनकी जमीनों पर यहूदी बस्तियां बसाने का विरोध करती रही है।