न्यूनतम वेतनमान को लेकर हरियाणा सरकार की नौटंकी

Published
Mon, 03/16/2026 - 07:40
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11 साल से अधिक समय से हरियाणा राज्य में न्यूनतम वेतनमान पुनर्निधारित (रिवाइज) नहीं हुआ है। हर 5 साल में न्यूनतम वेतनमान रिवाइज करने का नियम है। महंगाई के सापेक्ष जरूरत की चीजों में खर्च के विवरण की गणना कर न्यूनतम वेतनमान तय किया जाता है। परंतु इस मामले में हरियाणा सरकार पिछले कई सालों से नींद की गोली खाकर सो रखी है और इसी बीच हर चीज में महंगाई रिकार्ड तोड़ बड़ी है।
    
कई मजदूर संगठनों ने और इस क्षेत्र के कई विशेषज्ञों ने जब जरूरत के सामान में बढ़ी हुई महंगाई के हिसाब से गणना की तो पाया गया कि आज के समय में न्यूनतम वेतनमान 30,000 रुपये से ऊपर होना चाहिए। परंतु हरियाणा में यह मात्र 11274.60/- रु. है।
    
हरियाणा सरकार को इस विषय पर ध्यान देने की कोई जरूरत महसूस नहीं होती है इसलिए तो इतने साल होने के बाद भी उसने इस पर कोई चर्चा नहीं की है बल्कि उल्टा काम यहां जरूर किया गया है। हरियाणा सरकार ने, केंद्र सरकार द्वारा 29 श्रम कानूनों को खत्म कर पारित चार मजदूर विरोधी चार श्रम संहिताओं को लागू करने के मामले में काफी तत्परता दिखायी है।
    
परंतु समय का भी अपना एक चक्र होता है। मजदूर संगठनों द्वारा इस विषय पर लंबा अभियान चला कर प्रदर्शन किए गए। अभी हाल ही में पानीपत रिफाइनरी में जो कुछ हुआ उसकी धमक देश के अन्य शहरों में भी सुनाई दी। ऐसे ही मजदूर संघर्षों की धमक ने और लंबे समय से कई मजदूर संगठनों द्वारा इस विषय पर सरकार की आलोचना करने के बाद अब सरकार ने इस पर कुछ सोचना शुरू किया। हालांकि सरकार की लेट-लतीफी और नौटंकी अभी जारी है।
    
सरकार ने एक समिति का गठन किया है जिसमें केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के कुछ लोग, श्रम विभाग के लोग, कुछ सरकार के और कुछ विशेषज्ञ लोग शामिल हैं। यह समिति न्यूनतम वेतनमान की गणना करेगी व न्यूनतम वेतनमान कितना होना चाहिए, इसको लेकर बैठक करेगी व सरकार को प्रस्ताव देगी।
    
इस समिति में मजदूर पक्ष की तरफ से 31,000 रुपये न्यूनतम वेतन का प्रस्ताव रखा गया। हर जरूरत की चीजों के दामों को जोड़कर यह प्रस्ताव रखा गया था। परंतु एक लंबी बातचीत के बाद 23,200/- रु. पर अंततः सहमति बन गई। फिर सरकार के आला मंत्रियों-संतरियों ने अपने आका यानी पूंजीपतियों से इस विषय पर कुछ कहा होगा तो वहां से उनको फटकार लगी। इसलिए बगैर कोई चर्चा किये, बगैर बैठक किए, सरकार ने राज्य के बजट सत्र के दौरान न्यूनतम वेतनमान को 15,220/- रु. करने का प्रस्ताव रख दिया। हालांकि यह लागू कब से होगा, इसका नोटिफिकेशन कब आएगा इस विषय पर सरकार ने कोई घोषणा नहीं की। वैसे तो यह श्रम विभाग का मामला है। श्रम विभाग एक नोटिफिकेशन जारी कर न्यूनतम वेतनमान को रिवाइज कर सकता है परंतु सरकार ने बजट सत्र में प्रस्ताव रखने का तरीका आजमाया। जो और लेट लतीफी का ही संकेत लगता है।
    
फरीदाबाद के राज्य विकास मंत्री विपिन गोयल द्वारा बजट सत्र के तुरंत बाद में एक प्रेस कान्फ्रेंस की गई जिसमें बजट सत्र को मजदूरों का हितैषी बता गुणगान किया गया। यह वही विपिन गोयल हैं जो फरीदाबाद में कालका स्टील कंपनी में अग्निकांड होने पर एक शब्द भी नहीं बोलते हैं। यहां तक कि अभी तक भी उनका कोई बयान इतने बड़े अग्निकांड पर नहीं आया है। वैसे तो अभी तक हरियाणा के किसी भी मंत्री-विधायक का इस अग्निकांड पर किसी मुआवजे से सम्बन्धित बयान नहीं आया है। यहां तक कि फरीदाबाद के डीसी ने भी कोई घोषणा नहीं की है।
    
15,220 रुपए न्यूनतम वेतनमान का प्रस्ताव रखने के बाद सरकार का यह कहना है कि कास्ट टू कंपनी (CTC) में अगर गणना करके देखी जाए तो यह उतना ही बैठेगा जितना समिति द्वारा प्रस्तावित था। क्योंकि इसके ऊपर कंपनी को ग्रेच्युटी, बोनस, छुट्टियों का पैसा, पीएफ सब देना होता है। वैसे तो सरकार द्वारा बजट सत्र में भी जो न्यूनतम वेतनमान प्रस्तावित किया गया है, वह भी कब से मिलेगा, कब मिलेगा, मिलेगा भी या नहीं मिलेगा इसका भी कोई भरोसा नहीं है। परंतु न्यूनतम वेतनमान को लेकर सरकार की नौटंकी देखने लायक है।         
        -फरीदाबाद संवाददाता

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