रिपोर्ट

आदिवासी बच्चों की मौत के खिलाफ मध्य प्रदेश सरकार का पुतला दहन

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फरीदाबाद/ पिछले दिनों मध्य प्रदेश के बालाघाट में 32 से ज्यादा मासूम बच्चों की दूषित पानी पीने से मौत हुई। इसके विरोध में इंकलाबी मजदूर केंद्र द्वारा फरीद

बढ़ती महंगाई के विरोध में प्रदर्शन

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देश भर में चीनी 39 रुपए प्रति किलो से बढ़कर लगभग 70 रुपए प्रति किलो तक पहुंच गई है। इसी के साथ सरसों का तेल, रिफाइंड, दाल, आटा, चावल, मसाले, प्याज, टमाटर, सब्जी, गैस, टेम्

शहीदे आजम भगतसिंह के जन्मदिवस पर विभिन्न कार्यक्रम

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शहीदे आजम भगतसिंह भारत के क्रांतिकारी आंदोलन की अमर शख्सियत हैं। आज जब देश में फासीवादी ताकतें सत्तासीन होकर जनता का क्रूर दमन कर रही हैं, तब भगतसिंह व उनके साथियों के वि

छात्रों-मजदूरों ने उठाई न्याय के लिए आवाज

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दिल्ली/ 7 सितंबर को जब दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस के पास सत्य निकेतन में एक इमारत के गिरने से मारे गए छात्रों को न्याय दिलाने और दिल्ली सरकार व द

प्रगतिशील महिला एकता केंद्र का सम्मेलन सम्पन्न

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रामनगर/ 5-6 सितंबर 2026 को प्रगतिशील महिला एकता केंद्र ने रामनगर, उत्तराखंड में अपना दो दिवसीय चैथा सम्मेलन सफलतापूर्वक सम्पन्न किया। सम्मेलन में उत्तराख

मासा के 10 वर्ष पूरे होने पर सेमिनार

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मजदूर अधिकार संघर्ष अभियान (MASA) ने नई दिल्ली के सुरजीत भवन सभागार में ‘‘मासा की 10 वर्षों की यात्रा और भारत में हाल का मजदूर आंदोलन’’ विषय पर एक दिवसीय सेमिनार 30 अगस्त

सत्यनिकेतन की घटना पर जगह-जगह विरोध-प्रदर्शन

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राजधानी दिल्ली में 6 सितम्बर को सत्यनिकेतन पीजी की ईमारत ढहने से दिल्ली विश्वविद्यालय के 6 छात्रों एवं 1 अन्य नागरिक की मौत हो गई। अगले दिन 7 सितम्बर को साउथ कैंपस परिसर

उत्तराखंड के यूजी-पीजी डाक्टरों का कार्य बहिष्कार

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हल्द्वानी/ राजकीय मेडिकल कालेज हल्द्वानी के एमबीबीएस इंटर्न और पीजी डाक्टरों का कार्य बहिष्कार 7 सितम्बर से चल रहा है। इंटर्न की मांग स्टाइपेंड 17,000 रु

सरकारी अस्पताल के खस्ताहाल: धरना-प्रदर्शन

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रामनगर/ रामनगर के सरकारी अस्पताल की खस्ता हालत पर संयुक्त संघर्ष समिति के बैनर तले विभिन्न संगठनों द्वारा 24 अगस्त को अस्पताल परिसर में धरना-प्रदर्शन किय

ग्रामीण मजदूरों का प्रदर्शन

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रसड़ा (बलिया)/ 24 अगस्त को रसड़ा तहसील मुख्यालय पर ग्रामीण मजदूर यूनियन द्वारा ग्रामीण मजदूरों की विभिन्न मांगों को लेकर जुलूस निकाला गया। जुलूस कई रास्तों

आलेख

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अठारहवीं सदी के इंग्लैण्ड में होने वाले चुनावी भ्रष्टाचार पर गूगल से ‘सर्च’ करने पर उसका ए आई स्वतः ही यह जवाब हाजिर कर देता हैः 

/election-aayog-hindu-fascist-and-loktantra

एस.आई.आर. प्रक्रिया के दौरान बड़े पैमाने पर मतदाताओं की कटौती की गई। अब तक 13 करोड़ से ज्यादा मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए। जबकि 5-6 करोड़ लोगों को संदेह की आड़ में नोटिस भेजे गए। 13 करोड़ में से 70 प्रतिशत वो लोग थे जिन्हें स्थानांतरित या अनुपस्थित बता दिया गया। इस तरह बड़े स्तर पर मनमानी छंटनी की जा रही है। इसमें सबसे बड़ी संख्या अल्पसंख्यक, दलित, आदिवासी, महिलाओं और मलिन बस्तियों में रहने वालों की है।

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इस मजदूर आंदोलन की विचारधारा मार्क्सवाद का यह स्पष्ट कहना था कि महान फ्रांसीसी क्रांति के जमाने से ही पूंजीपति वर्ग ने अपने समाज के लिए जो आदर्श घोषित कर रखा है- स्वतंत्रता, समता, बंधुत्व का आदर्श- वह पूंजीवाद की निजी सम्पत्ति के कारण कभी भी हासिल नहीं किया जा सकता। पूंजी के रूप में निजी सम्पत्ति के रहते स्वतंत्रता का मतलब होगा बाजार में खरीद-बेच की स्वतंत्रता, समता का मतलब होगा बाजार में खरीददार व विक्रेता की समता तथा बंधुत्व का मतलब होगा खरीद-बेच की व्यवस्था पर सहमति।

/war-and-diplomacy-uthal-puthal-se-bhari-duniyaa

गाजापट्टी में इजरायल की कत्लेआम करने की मुहिम जारी है। इजरायली यहूदी नस्लवादी न तो किसी समझौते को मान रहे हैं और न ही वे अपनी विनाश लीला को रोक रहे हैं। वे नस्लीय सफाये की मुहिम चला रहे हैं। इसके जवाब में हमास और अन्य प्रतिरोध संगठन इजरायली कब्जाकारी सेना पर प्रहार कर रहे हैं। 

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अपने व्यापक नुकसान को देखते हुए अमरीकी साम्राज्यवादियों ने अप्रैल महीने में युद्ध विराम किया और फिर पाकिस्तान की मध्यस्थता में एक ज्ञापन समझौता किया। इस ज्ञापन समझौते में अधिकांशतः ईरान की मांगें स्वीकार की गयीं। यह वस्तुतः अमरीका की पराजय थी। इस समझौते के थोड़े ही दिनों बाद अमरीका ने इसका उल्लंघन शुरू कर दिया। इजरायल ने एक भी दिन इस समझौते को नहीं माना।