फासीवाद / साम्प्रदायिकता,

गद्दारी, षड्यंत्र, झूठ और हिंसा के सौ साल

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इसे तारीखों का विचित्र संयोग या फिर भारतीय इतिहास का कटु सत्य भी कह सकते हैं। इस वर्ष, जिस दिन (2 अक्टूबर) गांधी जयन्ती है, ठीक उसी दिन विजयादशमी है। यह तो हो सकता है कि

130वां संविधान संशोधन और हिंदू फासीवाद

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मोदी सरकार ने अचानक 130वां संविधान संशोधन पेश किया। यह संशोधन तब पेश किया गया जबकि मोदी सरकार घरेलू और विदेशी मोर्चे पर अपनी साख गंवा रही थी। अगस्त माह में जब एक तरफ बिहा

‘‘..अहो रूपं, अहो ध्वनिः’’

11 सितम्बर को प्रधानमंत्री मोदी के नाम से देश के प्रमुख अखबारों में एक लेख छपा। लेख संघ प्रमुख मोहन भागवत के 75वें जन्मदिवस के मौके पर था। मोदी जी ने मोहन भागवत की प्रशंस

दानव को संत दिखाने की कोशिश

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राष्ट्रीय स्वंय सेवक संघ के 100 वर्ष पूरे होने के अवसर पर इस दानव को संत का जामा पहनाने की कोशिश की गयी। ‘‘संघ की यात्रा के 100 वर्ष - नए क्षितिज’’ नामक तीन दिवसीय कार्यक

जंगल में मोर नाचा किसने देखा

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राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आर एस एस) को अपने जन्म शताब्दी वर्ष में एक काम यह करना चाहिए कि उन्हें अपना नाम, भारत में बदल देना चाहिए। उन्हें अपने नाम के आगे से ‘राष्ट्रीय’

धर्मस्थला मंदिर और रसूखदार लोग

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कर्नाटक में धर्मस्थला के आस-पास कत्ल करके सैकड़ों लाशें दफनाई गई हैं। इस बात के खुलासे ने लोगों का दिल दहला दिया है। कर्नाटक के दक्षिण कन्नड़ जिले में धर्मस्थला नामक शिव का

संघी शासन में अफवाहें और रात भर जागते लोग

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उ.प्र.-उत्तराखण्ड के कई जिलों में गांवों-शहरों में लोग रात-रात भर जाग रहे हैं। वे इस खौफ में जाग रहे हैं कि कोई ‘द्रोण चोर’ उनके यहां डकैती न डाल दे। लोग हाथों में डण्डे

हिंदू फासीवाद, बुलडोजर और बस्तियां

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आम गरीब नागरिकों के घरों और दुकानों को अलग-अलग तर्कों से बुलडोजर के जरिए रौंदने का अभियान जारी है। उत्तर प्रदेश में योगी राज से होता हुआ यह बुलडोजर अभियान अलग-अलग भाजपाई

आलेख

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अठारहवीं सदी के इंग्लैण्ड में होने वाले चुनावी भ्रष्टाचार पर गूगल से ‘सर्च’ करने पर उसका ए आई स्वतः ही यह जवाब हाजिर कर देता हैः 

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एस.आई.आर. प्रक्रिया के दौरान बड़े पैमाने पर मतदाताओं की कटौती की गई। अब तक 13 करोड़ से ज्यादा मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए। जबकि 5-6 करोड़ लोगों को संदेह की आड़ में नोटिस भेजे गए। 13 करोड़ में से 70 प्रतिशत वो लोग थे जिन्हें स्थानांतरित या अनुपस्थित बता दिया गया। इस तरह बड़े स्तर पर मनमानी छंटनी की जा रही है। इसमें सबसे बड़ी संख्या अल्पसंख्यक, दलित, आदिवासी, महिलाओं और मलिन बस्तियों में रहने वालों की है।

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इस मजदूर आंदोलन की विचारधारा मार्क्सवाद का यह स्पष्ट कहना था कि महान फ्रांसीसी क्रांति के जमाने से ही पूंजीपति वर्ग ने अपने समाज के लिए जो आदर्श घोषित कर रखा है- स्वतंत्रता, समता, बंधुत्व का आदर्श- वह पूंजीवाद की निजी सम्पत्ति के कारण कभी भी हासिल नहीं किया जा सकता। पूंजी के रूप में निजी सम्पत्ति के रहते स्वतंत्रता का मतलब होगा बाजार में खरीद-बेच की स्वतंत्रता, समता का मतलब होगा बाजार में खरीददार व विक्रेता की समता तथा बंधुत्व का मतलब होगा खरीद-बेच की व्यवस्था पर सहमति।

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गाजापट्टी में इजरायल की कत्लेआम करने की मुहिम जारी है। इजरायली यहूदी नस्लवादी न तो किसी समझौते को मान रहे हैं और न ही वे अपनी विनाश लीला को रोक रहे हैं। वे नस्लीय सफाये की मुहिम चला रहे हैं। इसके जवाब में हमास और अन्य प्रतिरोध संगठन इजरायली कब्जाकारी सेना पर प्रहार कर रहे हैं। 

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अपने व्यापक नुकसान को देखते हुए अमरीकी साम्राज्यवादियों ने अप्रैल महीने में युद्ध विराम किया और फिर पाकिस्तान की मध्यस्थता में एक ज्ञापन समझौता किया। इस ज्ञापन समझौते में अधिकांशतः ईरान की मांगें स्वीकार की गयीं। यह वस्तुतः अमरीका की पराजय थी। इस समझौते के थोड़े ही दिनों बाद अमरीका ने इसका उल्लंघन शुरू कर दिया। इजरायल ने एक भी दिन इस समझौते को नहीं माना।