त्यौहार, बाजार व साम्प्रदायिकता
मोदी सरकार के आगमन के बाद देश में साम्प्रदायिक उन्माद में गुणात्मक बढ़ोत्तरी हुई है। यह साम्प्रदायिकता खासकर मुसलमानों को निशाने पर लेकर हुई है। हालांकि दलित, आदिवासी व मह
मोदी सरकार के आगमन के बाद देश में साम्प्रदायिक उन्माद में गुणात्मक बढ़ोत्तरी हुई है। यह साम्प्रदायिकता खासकर मुसलमानों को निशाने पर लेकर हुई है। हालांकि दलित, आदिवासी व मह
पिछले दिनों मुंबई उच्च न्यायालय और दिल्ली उच्च न्यायालय ने दो अलग-अलग मामलों में दोष सिद्ध न होने के कारण आरोपियों को बरी किया। 2006 के मुंबई ट्रेन धमाकों में मुंबई उच्च
बिहार चुनाव में मोदी सरकार अपने फासीवादी एजेंडे को चुनाव आयोग के जरिए आगे बढ़ा रही है। नागरिकता संशोधन कानून के जरिए तीन पड़ोसी देशों के गैर मुसलमानों को भारत की नागरिकता द
दुनिया भर में शासक वर्ग अमानवीय होकर अपने-अपने देश में शरणार्थियों के मुद्दे को उठाए हुए है। शासक वर्ग अपने घृणित राजनीतिक लाभ के लिए शरणार्थियों के नाम पर राजनीति करने स
भारत और ब्रिटेन के बीच हुए ‘मुक्त व्यापार समझौते’ को ऐतिहासिक समझौते की संज्ञा दी जा रही है। निःसंदेह यह समझौता इस मामले में ऐतिहासिक है कि अपने आपको सबसे बड़ा राष्ट्रवादी
बीते दिनों संसद के दोनों सदनों में आपरेशन सिंदूर पर चर्चा हुई। इस चर्चा में विपक्ष द्वारा उठाये गये एक भी सवाल का जवाब देने की मोदी सरकार ने जरूरत नहीं समझी। सवालों के जव
उपराष्ट्रपति धनखड़ के अचानक इस्तीफे पर तरह-तरह की अटकलबाजियां की जा रही हैं। हर कोई इस बात पर एकमत है कि धनखड़ द्वारा स्वास्थ्य कारणों से इस्तीफे की जो बात कही गयी वह सच्चा
बीते दिनों संघ प्रमुख मोहन भागवत ने 75 वर्ष पूरे होने पर रिटायर होने व नये लोगों को आगे आने का मौका देने की बात कर मोदी को याद दिला दिया कि वे बहुत जल्द 17 सितम्बर 25 को
कांवड़ यात्रा शुरू होते ही हिन्दू धर्म के संघी लम्पट ठेकेदारों को भी रोजगार मिल जाता है। रोजगार समाज में मुसलमानों के खिलाफ नफरत फैलाने का, गुंडागर्दी करने का, मारपीट करने
पिछले दिनों से उत्तराखण्ड सरकार ने ‘आपरेशन कालनेमि’ चलाया हुआ है। इस पुलिसिया आपरेशन के तहत पुलिस वाले साधु वेष या भगवा वस्त्र पहने हुए लोगों की जांच पड़ताल कर रहे हैं। घो
अठारहवीं सदी के इंग्लैण्ड में होने वाले चुनावी भ्रष्टाचार पर गूगल से ‘सर्च’ करने पर उसका ए आई स्वतः ही यह जवाब हाजिर कर देता हैः
एस.आई.आर. प्रक्रिया के दौरान बड़े पैमाने पर मतदाताओं की कटौती की गई। अब तक 13 करोड़ से ज्यादा मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए। जबकि 5-6 करोड़ लोगों को संदेह की आड़ में नोटिस भेजे गए। 13 करोड़ में से 70 प्रतिशत वो लोग थे जिन्हें स्थानांतरित या अनुपस्थित बता दिया गया। इस तरह बड़े स्तर पर मनमानी छंटनी की जा रही है। इसमें सबसे बड़ी संख्या अल्पसंख्यक, दलित, आदिवासी, महिलाओं और मलिन बस्तियों में रहने वालों की है।
इस मजदूर आंदोलन की विचारधारा मार्क्सवाद का यह स्पष्ट कहना था कि महान फ्रांसीसी क्रांति के जमाने से ही पूंजीपति वर्ग ने अपने समाज के लिए जो आदर्श घोषित कर रखा है- स्वतंत्रता, समता, बंधुत्व का आदर्श- वह पूंजीवाद की निजी सम्पत्ति के कारण कभी भी हासिल नहीं किया जा सकता। पूंजी के रूप में निजी सम्पत्ति के रहते स्वतंत्रता का मतलब होगा बाजार में खरीद-बेच की स्वतंत्रता, समता का मतलब होगा बाजार में खरीददार व विक्रेता की समता तथा बंधुत्व का मतलब होगा खरीद-बेच की व्यवस्था पर सहमति।
गाजापट्टी में इजरायल की कत्लेआम करने की मुहिम जारी है। इजरायली यहूदी नस्लवादी न तो किसी समझौते को मान रहे हैं और न ही वे अपनी विनाश लीला को रोक रहे हैं। वे नस्लीय सफाये की मुहिम चला रहे हैं। इसके जवाब में हमास और अन्य प्रतिरोध संगठन इजरायली कब्जाकारी सेना पर प्रहार कर रहे हैं।
अपने व्यापक नुकसान को देखते हुए अमरीकी साम्राज्यवादियों ने अप्रैल महीने में युद्ध विराम किया और फिर पाकिस्तान की मध्यस्थता में एक ज्ञापन समझौता किया। इस ज्ञापन समझौते में अधिकांशतः ईरान की मांगें स्वीकार की गयीं। यह वस्तुतः अमरीका की पराजय थी। इस समझौते के थोड़े ही दिनों बाद अमरीका ने इसका उल्लंघन शुरू कर दिया। इजरायल ने एक भी दिन इस समझौते को नहीं माना।