फासीवाद

हवाई आदमी की हवा-हवाई छवि

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आशीष नंदी देश के जाने-माने समाजशास्त्री रहे हैं। वे कोई माक्र्सवादी या वामपंथी समाजशास्त्री  नहीं हैं। वे उस तरह के समाजशास्त्री हैं जिनके बारे में कहा जाता है कि उन्होंन

दिमागी नक्सल और सिविल डिफेन्स

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इस बार भी 15 अगस्त के दिन भारत देश की आम जनता को उसके राजा ने बताया कि किस तरह उसके 12 सालों के राज में भारत ने तरक्की की ऊंचाईयों को छुआ है। हर क्षेत्र में भारत विकास कर

जनगणना के नाम पर जासूसी

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द हिन्दू अखबार में छपी एक खबर के अनुसार जनगणना-2027 में सरकार जनता से कई ऐसे सवाल पूछ रही है जिसका सम्बन्ध जनगणना से कम लोगों की व्यक्तिगत जानकारियां जुटाने से अधिक है। द

एथेनाल ब्लेंड पेट्रोल: दावे और हकीकत

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आजकल ई-20 पेट्रोल का मामला काफी चर्चा में है। मोदी सरकार ने ई-20 एथेनाल मिश्रित पेट्रोल को ‘आत्मनिर्भर भारत’, ‘किसान कल्याण’ और ‘ऊर्जा सुरक्षा’ जैसे दावों के साथ बिना बहस

ट्रिब्यूनल सुधार विधेयक 2026: सत्ता का केंद्रीकरण

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संसद ने ट्रिब्यूनल सुधार विधेयक, 2026 को पारित कर दिया। विधेयक लोकसभा में बिना किसी चर्चा के महज 12 मिनट में और राज्यसभा में विपक्ष के वाकआउट के बीच लगभग एक घंटे की सीमित

क्या हवा बदलने वाली है

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अभी ज्यादा कुछ दिन नहीं हुए थे कि भाजपा ने पांच में से तीन राज्यों खासकर प.बंगाल  में बम्पर जीत हासिल की थी। अब इस बात को छोड़ दिया जाए कि भाजपा ने जीत कैसे हासिल की। भाजप

जंतर-मंतर पूरे देश में फैल रहा है!

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जंतर-मंतर पर छात्र-युवा आंदोलन के आगे घुटने टेकते हुए मोदी सरकार ने सोचा था कि एक बार घुटने टेक कर वह छात्रों-युवाओं के उभार की लहर को थाम लेगी और अपनी सरकार को और नुकसान

आलेख

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अठारहवीं सदी के इंग्लैण्ड में होने वाले चुनावी भ्रष्टाचार पर गूगल से ‘सर्च’ करने पर उसका ए आई स्वतः ही यह जवाब हाजिर कर देता हैः 

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एस.आई.आर. प्रक्रिया के दौरान बड़े पैमाने पर मतदाताओं की कटौती की गई। अब तक 13 करोड़ से ज्यादा मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए। जबकि 5-6 करोड़ लोगों को संदेह की आड़ में नोटिस भेजे गए। 13 करोड़ में से 70 प्रतिशत वो लोग थे जिन्हें स्थानांतरित या अनुपस्थित बता दिया गया। इस तरह बड़े स्तर पर मनमानी छंटनी की जा रही है। इसमें सबसे बड़ी संख्या अल्पसंख्यक, दलित, आदिवासी, महिलाओं और मलिन बस्तियों में रहने वालों की है।

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इस मजदूर आंदोलन की विचारधारा मार्क्सवाद का यह स्पष्ट कहना था कि महान फ्रांसीसी क्रांति के जमाने से ही पूंजीपति वर्ग ने अपने समाज के लिए जो आदर्श घोषित कर रखा है- स्वतंत्रता, समता, बंधुत्व का आदर्श- वह पूंजीवाद की निजी सम्पत्ति के कारण कभी भी हासिल नहीं किया जा सकता। पूंजी के रूप में निजी सम्पत्ति के रहते स्वतंत्रता का मतलब होगा बाजार में खरीद-बेच की स्वतंत्रता, समता का मतलब होगा बाजार में खरीददार व विक्रेता की समता तथा बंधुत्व का मतलब होगा खरीद-बेच की व्यवस्था पर सहमति।

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गाजापट्टी में इजरायल की कत्लेआम करने की मुहिम जारी है। इजरायली यहूदी नस्लवादी न तो किसी समझौते को मान रहे हैं और न ही वे अपनी विनाश लीला को रोक रहे हैं। वे नस्लीय सफाये की मुहिम चला रहे हैं। इसके जवाब में हमास और अन्य प्रतिरोध संगठन इजरायली कब्जाकारी सेना पर प्रहार कर रहे हैं। 

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अपने व्यापक नुकसान को देखते हुए अमरीकी साम्राज्यवादियों ने अप्रैल महीने में युद्ध विराम किया और फिर पाकिस्तान की मध्यस्थता में एक ज्ञापन समझौता किया। इस ज्ञापन समझौते में अधिकांशतः ईरान की मांगें स्वीकार की गयीं। यह वस्तुतः अमरीका की पराजय थी। इस समझौते के थोड़े ही दिनों बाद अमरीका ने इसका उल्लंघन शुरू कर दिया। इजरायल ने एक भी दिन इस समझौते को नहीं माना।