साम्राज्यवाद

हूती-सऊदी संघर्ष

/huti-saudi-struggle

अमेरिका-इजरायल द्वारा ईरान पर हमले से शुरू होकर पश्चिम एशिया में टकराव कई कोणों से बढ़ने लगा है। इजरायल व लेबनान के हिजबुल्ला के बीच संघर्ष जहां अमेरिका-ईरान युद्ध की शुरू

ट्रम्प-शी जिनपिंग शिखर सम्मेलन: सहमति कम टकराव ज्यादा

/trump-shi-jinping-shikhar-sammelan-sahamati-kam-takaraav-jyaadaa

बीते दिनों दुनिया की दो प्रमुख साम्राज्यवादी ताकतों अमेरिका व चीन के प्रमुखों का तीन दिवसीय शिखर सम्मेलन अमेरिका में सम्पन्न हुआ। इस शिखर सम्मेलन के लिए कहा गया कि इसमें

ब्रिक्स सम्मेलन : सफलता कम ढिंढोरा ज्यादा

/brics--2006-summit-safalata-kam-dhindhoraa-jyaadaa

12-13 सितम्बर को दिल्ली में 11 देशों के समूह ब्रिक्स का शीर्ष सम्मेलन सम्पन्न हुआ। सम्मेलन के बाद भारतीय मीडिया ने इसकी सफलता को प्रचारित करते हुए इसे भारत के वैश्विक कद

दुनिया में बढ़ता सैन्यीकरण, हथियार कंपनियों का बढ़ता मुनाफा और साम्राज्यवादी होड़

/duniya-mein-badhata-militarisation-hathiyar-companies-ka-badhta-profit-and

दुनिया आज जिस दौर से गुजर रही है, उसे केवल अलग-अलग युद्धों और क्षेत्रीय संघर्षों के रूप में समझना पर्याप्त नहीं है। रूस-यूक्रेन युद्ध, पश्चिम एशिया का संकट, अमेरिका-चीन क

अमरीका का ईरान पर ‘आपरेशन डी-डे’: हताशा का परिणाम

/amerika-ka-iran-par-operation-d-day-hatasha-ka-parinam

अपने व्यापक नुकसान को देखते हुए अमरीकी साम्राज्यवादियों ने अप्रैल महीने में युद्ध विराम किया और फिर पाकिस्तान की मध्यस्थता में एक ज्ञापन समझौता किया। इस ज्ञापन समझौते में अधिकांशतः ईरान की मांगें स्वीकार की गयीं। यह वस्तुतः अमरीका की पराजय थी। इस समझौते के थोड़े ही दिनों बाद अमरीका ने इसका उल्लंघन शुरू कर दिया। इजरायल ने एक भी दिन इस समझौते को नहीं माना।

नेपाल बाढ़: व्यवस्था जन्य आपदा

/nepal-baadh-vyavastha-jany-apadaa

नेपाल बाढ़ की भयावह तस्वीरें टीवी चैनलों व सोशल मीडिया पर छाई हुई हैं। सैकड़ों लोगों के मारे जाने, हजारों लापता होने व सम्पत्ति के भारी नुकसान का अनुमान है। लापता लोगों में

पश्चिम एशिया के संकट का वैश्विक प्रभाव

/west-asia-ke-sankat-ka-vaishawik-prabhaav

अमेरिकी साम्राज्यवादी अब ऐसी स्थिति में नहीं रह गये हैं कि वे नाटो देशों को सीधे आदेश जारी करें। इसे ब्रिक्स, शंघाई सहकार संगठन जैसे क्षेत्रीय गठबंधनों का सामना करना पड़ रहा है। ये सारे गठबंधन अमेरिकी वर्चस्व वाली दुनिया को एक हद तक चुनौती दे रहे हैं। 

कम्युनिज्म का भूत

/communism-ka-bhoot

करीब पौने दो सौ वर्ष पहले कम्युनिस्ट पार्टी के घोषणापत्र में माक्र्स-एंगेल्स ने लिखा था कि सारी दुनिया के शासकों को कम्युनिज्म का भूत सता रहा है। आज इतने वर्षों बाद भी मा

एआई डेटा केंद्रों के पर्यावरणीय प्रभाव

अरबपति प्रौद्योगिकी उद्योगपतियों को रोजगार क्षीण करने वाली कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) से जुड़े अनियंत्रित डेटा केंद्रों के विरोध का सामना करना पड़ रहा है। अमेरिका भर में श्र

आलेख

/punjivadi-jantantra-and-chunavi-corruption

अठारहवीं सदी के इंग्लैण्ड में होने वाले चुनावी भ्रष्टाचार पर गूगल से ‘सर्च’ करने पर उसका ए आई स्वतः ही यह जवाब हाजिर कर देता हैः 

/election-aayog-hindu-fascist-and-loktantra

एस.आई.आर. प्रक्रिया के दौरान बड़े पैमाने पर मतदाताओं की कटौती की गई। अब तक 13 करोड़ से ज्यादा मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए। जबकि 5-6 करोड़ लोगों को संदेह की आड़ में नोटिस भेजे गए। 13 करोड़ में से 70 प्रतिशत वो लोग थे जिन्हें स्थानांतरित या अनुपस्थित बता दिया गया। इस तरह बड़े स्तर पर मनमानी छंटनी की जा रही है। इसमें सबसे बड़ी संख्या अल्पसंख्यक, दलित, आदिवासी, महिलाओं और मलिन बस्तियों में रहने वालों की है।

/uddharak-ideology-ki-talaas

इस मजदूर आंदोलन की विचारधारा मार्क्सवाद का यह स्पष्ट कहना था कि महान फ्रांसीसी क्रांति के जमाने से ही पूंजीपति वर्ग ने अपने समाज के लिए जो आदर्श घोषित कर रखा है- स्वतंत्रता, समता, बंधुत्व का आदर्श- वह पूंजीवाद की निजी सम्पत्ति के कारण कभी भी हासिल नहीं किया जा सकता। पूंजी के रूप में निजी सम्पत्ति के रहते स्वतंत्रता का मतलब होगा बाजार में खरीद-बेच की स्वतंत्रता, समता का मतलब होगा बाजार में खरीददार व विक्रेता की समता तथा बंधुत्व का मतलब होगा खरीद-बेच की व्यवस्था पर सहमति।

/war-and-diplomacy-uthal-puthal-se-bhari-duniyaa

गाजापट्टी में इजरायल की कत्लेआम करने की मुहिम जारी है। इजरायली यहूदी नस्लवादी न तो किसी समझौते को मान रहे हैं और न ही वे अपनी विनाश लीला को रोक रहे हैं। वे नस्लीय सफाये की मुहिम चला रहे हैं। इसके जवाब में हमास और अन्य प्रतिरोध संगठन इजरायली कब्जाकारी सेना पर प्रहार कर रहे हैं। 

/amerika-ka-iran-par-operation-d-day-hatasha-ka-parinam

अपने व्यापक नुकसान को देखते हुए अमरीकी साम्राज्यवादियों ने अप्रैल महीने में युद्ध विराम किया और फिर पाकिस्तान की मध्यस्थता में एक ज्ञापन समझौता किया। इस ज्ञापन समझौते में अधिकांशतः ईरान की मांगें स्वीकार की गयीं। यह वस्तुतः अमरीका की पराजय थी। इस समझौते के थोड़े ही दिनों बाद अमरीका ने इसका उल्लंघन शुरू कर दिया। इजरायल ने एक भी दिन इस समझौते को नहीं माना।