पत्र

बस और ट्रेन का सफर

ट्रेन या बस में सफर करते हुए हमें एक उलझन सी रहती है। ट्रेन में सफर के लिए स्टेशन पर इंतजार करते हुए यह पता नहीं होता है कि ट्रेन कब आयेगी। बस में बैठकर इंतजार करते हुए स

सेंचुरी मिल: यूनियन नेताओं को मिला चाटुकारिता का इनाम

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सेन्चुरी मिल, जो आदित्य बिडला रियल एस्टेट (IBREL) लिमिटेड का हिस्सा थी, जिसका आई टी सी लिमिटेड द्वारा अधिग्रहण पूर्ण होने के आखिरी चरण में हैं वहां एक अजीब तरीके का सन्ना

युवा मजदूर

/yuva-majdoor

घर से निकलते ही रुंधे गले से
मां ने पीछे से आवाज दी थी
रुक जा, मत जा मेरे लाल
शहर में कौन रखेगा तेरा खयाल,
क्या खायेगा? क्या पियेगा?
तुझे कुछ भी बनाना नहीं आता

ठंडी भट्टियां, सूनी जेबें और पलायन को मजबूर लाखों मजदूर

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अमेरिका-इजरायल द्वारा ईरान पर युद्ध थोपे जाने के बाद गैस-तेल संकट की वजह से औद्योगिक इलाकों में इन दिनों जो खामोशी पसरी है, वह सामान्य मंदी की नहीं, बल्कि गहरे संकट की नि

राजद्रोह, NSA कानून का दुरुपयोग और तमाशा देखती सुप्रीम कोर्ट

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अक्सर ही सरकारें अपने विरोधियों को ठिकाने लगाने के लिए और सरकार के खिलाफ हो रहे न्यायपूर्ण संघर्षों को दबाने के लिए दमनकारी कानूनों का इस्तेमाल करती हैं। इन काले कानूनों

सिगनेचर ग्लोबल में मजदूरों की मौत

/signature-global-mein-workers-ki-death

चमचमाती दुनिया के पीछे और भी दुनिया है। वह दुनिया मजदूरों-किसानों की बदहाली की है। यह एक उजड़ती हुयी दुनिया है। पूंजीपतियों के मुनाफे के चक्कर में आज मजदूर-किसान बुनियाद म

युद्ध नहीं शांति

/war-nahin-shanti

यदि आप दूर अपने ड्राइंग रूम में बैठकर
युद्ध का मजा ले रहे हैं
आसमान से बस्तियों, स्कूलों और अस्पतालों पर
गिरती मिसाइलों का 
आतिशबाजी की तरह आनंद ले रहे हैं

डरा हुआ शासक वर्ग और उसका तंत्र, लेकिन मजदूर को बिन लड़े उसका अधिकार नहीं देगा

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मैं पिछले 3 दिन में 2 बार गिरफ्तार हुआ। 13 मार्च को हम बवाना औद्योगिक क्षेत्र के बंगाली चौक पर मजदूरों से गैस की समस्या को लेकर बात कर रहे थे और उनको गैस की समस्या के लिए आंदोलन के लिए सूचित कर रहे

मुशरिक

/musharik

‘‘सफर कैसा रहा?’’  ट्रे में पानी का गिलास पेश करते हुए बीवी ने जानना चाहा। ‘‘हम्म सफर में तो खैर रही। धागा बांध दिया है। देखें कब खुदा मुराद बक्शे। शायद मेरी इबादत में को

आलेख

/punjivadi-jantantra-and-chunavi-corruption

अठारहवीं सदी के इंग्लैण्ड में होने वाले चुनावी भ्रष्टाचार पर गूगल से ‘सर्च’ करने पर उसका ए आई स्वतः ही यह जवाब हाजिर कर देता हैः 

/election-aayog-hindu-fascist-and-loktantra

एस.आई.आर. प्रक्रिया के दौरान बड़े पैमाने पर मतदाताओं की कटौती की गई। अब तक 13 करोड़ से ज्यादा मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए। जबकि 5-6 करोड़ लोगों को संदेह की आड़ में नोटिस भेजे गए। 13 करोड़ में से 70 प्रतिशत वो लोग थे जिन्हें स्थानांतरित या अनुपस्थित बता दिया गया। इस तरह बड़े स्तर पर मनमानी छंटनी की जा रही है। इसमें सबसे बड़ी संख्या अल्पसंख्यक, दलित, आदिवासी, महिलाओं और मलिन बस्तियों में रहने वालों की है।

/uddharak-ideology-ki-talaas

इस मजदूर आंदोलन की विचारधारा मार्क्सवाद का यह स्पष्ट कहना था कि महान फ्रांसीसी क्रांति के जमाने से ही पूंजीपति वर्ग ने अपने समाज के लिए जो आदर्श घोषित कर रखा है- स्वतंत्रता, समता, बंधुत्व का आदर्श- वह पूंजीवाद की निजी सम्पत्ति के कारण कभी भी हासिल नहीं किया जा सकता। पूंजी के रूप में निजी सम्पत्ति के रहते स्वतंत्रता का मतलब होगा बाजार में खरीद-बेच की स्वतंत्रता, समता का मतलब होगा बाजार में खरीददार व विक्रेता की समता तथा बंधुत्व का मतलब होगा खरीद-बेच की व्यवस्था पर सहमति।

/war-and-diplomacy-uthal-puthal-se-bhari-duniyaa

गाजापट्टी में इजरायल की कत्लेआम करने की मुहिम जारी है। इजरायली यहूदी नस्लवादी न तो किसी समझौते को मान रहे हैं और न ही वे अपनी विनाश लीला को रोक रहे हैं। वे नस्लीय सफाये की मुहिम चला रहे हैं। इसके जवाब में हमास और अन्य प्रतिरोध संगठन इजरायली कब्जाकारी सेना पर प्रहार कर रहे हैं। 

/amerika-ka-iran-par-operation-d-day-hatasha-ka-parinam

अपने व्यापक नुकसान को देखते हुए अमरीकी साम्राज्यवादियों ने अप्रैल महीने में युद्ध विराम किया और फिर पाकिस्तान की मध्यस्थता में एक ज्ञापन समझौता किया। इस ज्ञापन समझौते में अधिकांशतः ईरान की मांगें स्वीकार की गयीं। यह वस्तुतः अमरीका की पराजय थी। इस समझौते के थोड़े ही दिनों बाद अमरीका ने इसका उल्लंघन शुरू कर दिया। इजरायल ने एक भी दिन इस समझौते को नहीं माना।