चुनाव

मोदी-शाह-ज्ञानेश और एस आई आर

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अभी हाल ही में एस आई आर पर इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट आने के बाद मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार सवालों के घेरे में आ गये। रिपोर्ट के अनुसार चुनाव आयोग के दो सदस्यों

हिंदू फासीवाद, चुनाव आयोग और विधानसभा चुनाव

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हिंदू फासीवादियों के लिए बिहार एस आई आर की पहली प्रयोगशाला थी। पश्चिम बंगाल  निशाने पर लंबे समय से ही था। ये तमाम प्रयास के बावजूद यहां की सत्ता से काफी दूर थे। चुनाव आयोग के जरिए एस आई आर और गृह मंत्रालय के अधीन अर्ध सैनिक बलों के दम पर इस किले को फतह करना हिंदू राष्ट्रवादियों का खास मकसद था। अंततः इस चुनाव में यहां की सत्ता को गिरफ्त में लेने में ये सफल हो चुके हैं। 

एस आई आर - साम्प्रदायिक ध्रुवीकरण के सहारे भाजपा की जीत

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2026 के पश्चिम बंगाल के चुनाव परिणाम  ने देश के अंदर फिर से लोकतंत्र, संवैधानिक संस्थाओं के दुरुपयोग, सामाजिक सौहार्द, क्षेत्रीय दलों के स्थायित्व, विपक्षी दलों के चुनावी

बंगाल जीतने की हिन्दू फासीवादियों की घृणित कवायद

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पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस का सफाया करने का जाल हिंदू फासीवादियों ने चुनाव आयोग के जरिए नग्न और षड्यंत्रकारी तरीके से बुना है। चुनाव आयोग द्वारा संचालित विशेष गहन प

बांग्लादेश : बी एन पी की चुनावी जीत

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बांग्लादेश में बहुप्रतीक्षित चुनाव 12 फरवरी को सम्पन्न हो गये। इस चुनाव में उम्मीद के मुताबिक बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बी एन पी) को भारी जीत हासिल हुई है। खबर लिखे जा

जनता का चुनाव करते हिंदू फासीवादी

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देश में चुनाव के दौरान अक्सर ही गुस्से में आकर कई लोग कहते सुने जाते हैं कि अब उक्त पार्टी को हम वोट नहीं करेंगे। लंबे समय से यही देखा गया है कि किसी एक पार्टी की सरकार क

जापान : बढ़ते संकट के साथ नये चुनाव

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हाल में ही जापान की प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची ने संसद भंग कर 8 फरवरी को नए चुनावों की घोषणा कर दी। ताकाइची की पार्टी लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी को उम्मीद है कि इन चुनावों क

ममदानी, राहुल और चुनावी मुद्दे

न्यूयार्क शहर के मेयर के चुनाव में जोहरान ममदानी की जीत ने वाम उदारवादियों को खुशी से पागल कर दिया है। सरकारी वामपंथी भी पर्याप्त खुश हैं। उनकी खुशी किसी हद तक जायज भी है

बिहार चुनाव : एन डी ए की भारी जीत के मायने

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बिहार चुनाव के नतीजे आ चुके हैं। एन डी ए गठबंधन पिछले चुनाव से भी भारी जीत हासिल कर सत्ता संभालने की तैयारी में है। इण्डिया गठबंधन को भारी नुकसान उठाना पड़ा है। टक्कर का प

आलेख

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अठारहवीं सदी के इंग्लैण्ड में होने वाले चुनावी भ्रष्टाचार पर गूगल से ‘सर्च’ करने पर उसका ए आई स्वतः ही यह जवाब हाजिर कर देता हैः 

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एस.आई.आर. प्रक्रिया के दौरान बड़े पैमाने पर मतदाताओं की कटौती की गई। अब तक 13 करोड़ से ज्यादा मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए। जबकि 5-6 करोड़ लोगों को संदेह की आड़ में नोटिस भेजे गए। 13 करोड़ में से 70 प्रतिशत वो लोग थे जिन्हें स्थानांतरित या अनुपस्थित बता दिया गया। इस तरह बड़े स्तर पर मनमानी छंटनी की जा रही है। इसमें सबसे बड़ी संख्या अल्पसंख्यक, दलित, आदिवासी, महिलाओं और मलिन बस्तियों में रहने वालों की है।

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इस मजदूर आंदोलन की विचारधारा मार्क्सवाद का यह स्पष्ट कहना था कि महान फ्रांसीसी क्रांति के जमाने से ही पूंजीपति वर्ग ने अपने समाज के लिए जो आदर्श घोषित कर रखा है- स्वतंत्रता, समता, बंधुत्व का आदर्श- वह पूंजीवाद की निजी सम्पत्ति के कारण कभी भी हासिल नहीं किया जा सकता। पूंजी के रूप में निजी सम्पत्ति के रहते स्वतंत्रता का मतलब होगा बाजार में खरीद-बेच की स्वतंत्रता, समता का मतलब होगा बाजार में खरीददार व विक्रेता की समता तथा बंधुत्व का मतलब होगा खरीद-बेच की व्यवस्था पर सहमति।

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गाजापट्टी में इजरायल की कत्लेआम करने की मुहिम जारी है। इजरायली यहूदी नस्लवादी न तो किसी समझौते को मान रहे हैं और न ही वे अपनी विनाश लीला को रोक रहे हैं। वे नस्लीय सफाये की मुहिम चला रहे हैं। इसके जवाब में हमास और अन्य प्रतिरोध संगठन इजरायली कब्जाकारी सेना पर प्रहार कर रहे हैं। 

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अपने व्यापक नुकसान को देखते हुए अमरीकी साम्राज्यवादियों ने अप्रैल महीने में युद्ध विराम किया और फिर पाकिस्तान की मध्यस्थता में एक ज्ञापन समझौता किया। इस ज्ञापन समझौते में अधिकांशतः ईरान की मांगें स्वीकार की गयीं। यह वस्तुतः अमरीका की पराजय थी। इस समझौते के थोड़े ही दिनों बाद अमरीका ने इसका उल्लंघन शुरू कर दिया। इजरायल ने एक भी दिन इस समझौते को नहीं माना।