रिपोर्ट

सूरत के संघर्षरत मजदूरों के समर्थन में प्रदर्शन

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हरिद्वार/ 20 अगस्त 2026 को चिन्मय डिग्री कालेज के निकट विभिन्न संगठनों द्वारा गुजरात के सूरत में संघर्षरत मजदूरों पर पुलिस प्रशासन व गुंड़ों द्वारा बर्बर

किसानों के धरने का सहयोग-समर्थन

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हरिद्वार/ उत्तराखण्ड के किसान संगठनों ने अपनी विभिन्न न्यायपूर्ण मांगों के लिए बीते दिनों 3 दिवसीय जिला मुख्यालयों पर धरने का आह्वान किया। इसी कड़ी में उत

बढ़ती महंगाई के खिलाफ प्रदर्शन

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फरीदाबाद/ 26 अगस्त को फरीदाबाद के बीके चैक में, ‘‘फरीदाबाद जन संघर्ष समिति’’ के बैनर तले बढ़ती महंगाई के खिलाफ एक विरोध प्रदर्शन किया गया। 
    

चाय बागान मजदूरों के अनशन-आंदोलन के 100 दिन

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दार्जिलिंग पहाड़ियों के गाड़ीधुरा और पंखाबाड़ी के बीच स्थित लांगव्यू चाय बागान कभी दार्जिलिंग के सबसे बड़े बागानों में से एक था। इसकी उत्पादकता भी काफी अधिक थी। 1879 में स्था

उधमसिंह के शहादत दिवस एवं मुंशी प्रेमचंद के जन्मदिवस पर विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन

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प्रतिवर्ष 31 जुलाई को हमारे देश के प्रगतिशील-क्रांतिकारी संगठन महान क्रांतिकारी उधमसिंह का शहादत दिवस और महान कथा सम्राट मुंशी प्रेमचंद का जन्मदिवस मनाते हैं। उधमसिंह, जि

अखिल भारतीय विरोध कार्यक्रम के तहत विरोध प्रदर्शन

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रुद्रपुर/ 10 अगस्त को अंग्रेजो भारत छोड़ो आंदोलन की 83वीं बरसी पर मोदी सरकार की जन विरोधी नीतियों के खिलाफ विभिन्न संगठनों एवं यूनियनों ने श्रमिक संयुक्त

आई टी सी ने किया सेंचुरी मिल का अधिग्रहण

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सेन्चुरी मिल जो पिछले 42 वर्ष या चार दशक से कागज उद्योग में अपना महत्वपूर्ण स्थान रखे हुए थी उसका नाम ‘‘सेन्चुरी पल्प एण्ड पेपर मिल’’ से अब आई टी सी लिमिटेड हो चुका है जि

छात्रों पर बर्बर लाठीचार्ज के विरुद्ध जगह-जगह विरोध प्रदर्शन

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राजधानी दिल्ली में 20 जुलाई को छात्रों-नौजवानों के संसद मार्च के दौरान पुलिस और अर्ध सैन्य बलों द्वारा भारी दमन चक्र चलाया गया। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा

शाही एक्सपोर्ट के मजदूरों का संघर्ष

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पिछले दिनों हरियाणा में मजदूर आंदोलन के दबाव में अप्रैल 2026 में हरियाणा सरकार ने न्यूनतम वेतन बढ़ाया। जिसके बाद से ही हरियाणा के तमाम कंपनी मालिक पागलों की तरह मजदूरों को

ऐरा के संघर्षरत मजदूर

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रुद्रपुर/ ऐरा श्रमिक संगठन 2016 अगस्त से अपनी मांगों को लेकर संघर्षरत है और कम्पनी का मसला दिल्ली एनसीएलटी कोर्ट से रुद्रपुर श्रम भवन पर आकर टिका हुआ है।

आलेख

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अठारहवीं सदी के इंग्लैण्ड में होने वाले चुनावी भ्रष्टाचार पर गूगल से ‘सर्च’ करने पर उसका ए आई स्वतः ही यह जवाब हाजिर कर देता हैः 

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एस.आई.आर. प्रक्रिया के दौरान बड़े पैमाने पर मतदाताओं की कटौती की गई। अब तक 13 करोड़ से ज्यादा मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए। जबकि 5-6 करोड़ लोगों को संदेह की आड़ में नोटिस भेजे गए। 13 करोड़ में से 70 प्रतिशत वो लोग थे जिन्हें स्थानांतरित या अनुपस्थित बता दिया गया। इस तरह बड़े स्तर पर मनमानी छंटनी की जा रही है। इसमें सबसे बड़ी संख्या अल्पसंख्यक, दलित, आदिवासी, महिलाओं और मलिन बस्तियों में रहने वालों की है।

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इस मजदूर आंदोलन की विचारधारा मार्क्सवाद का यह स्पष्ट कहना था कि महान फ्रांसीसी क्रांति के जमाने से ही पूंजीपति वर्ग ने अपने समाज के लिए जो आदर्श घोषित कर रखा है- स्वतंत्रता, समता, बंधुत्व का आदर्श- वह पूंजीवाद की निजी सम्पत्ति के कारण कभी भी हासिल नहीं किया जा सकता। पूंजी के रूप में निजी सम्पत्ति के रहते स्वतंत्रता का मतलब होगा बाजार में खरीद-बेच की स्वतंत्रता, समता का मतलब होगा बाजार में खरीददार व विक्रेता की समता तथा बंधुत्व का मतलब होगा खरीद-बेच की व्यवस्था पर सहमति।

/war-and-diplomacy-uthal-puthal-se-bhari-duniyaa

गाजापट्टी में इजरायल की कत्लेआम करने की मुहिम जारी है। इजरायली यहूदी नस्लवादी न तो किसी समझौते को मान रहे हैं और न ही वे अपनी विनाश लीला को रोक रहे हैं। वे नस्लीय सफाये की मुहिम चला रहे हैं। इसके जवाब में हमास और अन्य प्रतिरोध संगठन इजरायली कब्जाकारी सेना पर प्रहार कर रहे हैं। 

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अपने व्यापक नुकसान को देखते हुए अमरीकी साम्राज्यवादियों ने अप्रैल महीने में युद्ध विराम किया और फिर पाकिस्तान की मध्यस्थता में एक ज्ञापन समझौता किया। इस ज्ञापन समझौते में अधिकांशतः ईरान की मांगें स्वीकार की गयीं। यह वस्तुतः अमरीका की पराजय थी। इस समझौते के थोड़े ही दिनों बाद अमरीका ने इसका उल्लंघन शुरू कर दिया। इजरायल ने एक भी दिन इस समझौते को नहीं माना।