उत्तराखंड में क्लस्टर योजना के विरोध में प्रदर्शन-ज्ञापन
हल्द्वानी/ उत्तराखंड में कक्षा 1 से 12 तक सरकारी विद्यालयों को क्लस्टर/मर्जर करने से विद्यालयों के बन्द होने के विरोध में परिवर्तनकामी छात्र संगठन (पछास)
हल्द्वानी/ उत्तराखंड में कक्षा 1 से 12 तक सरकारी विद्यालयों को क्लस्टर/मर्जर करने से विद्यालयों के बन्द होने के विरोध में परिवर्तनकामी छात्र संगठन (पछास)
मेरठ/ मजदूर संघर्ष संगठन का स्थापना सम्मेलन मेरठ के मलियाना में सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ। सम्मेलन की शुरुआत क्रांतिकारी गीत के साथ हुई। इसके बाद सर्वसम्मत
वर्ष 2025 के जुलाई माह में 11 जुलाई से 23 जुलाई तक चली कांवड़ यात्रा में चार करोड़ 50 लाख कांवड़ियों की भागीदारी का हरिद्वार प्रशासन ने अनुमान लगाया है। 400 करोड़ की भगवा टी-
बरेली/ उत्तर प्रदेश सरकार कक्षा 1 से कक्षा 8 तक के करीब 27,000 सरकारी प्राइमरी और जूनियर स्कूलों को मर्ज (विलय) करने की तैयारी कर रही है। पहले चरण में 50
केंद्रीय ट्रेड यूनियन फेडरेशनों द्वारा मोदी सरकार की मजदूर-मेहनतकश जन विरोधी नीतियों के विरोध में 9 जुलाई को देशव्यापी आम हड़ताल का आह्वान किया गया था। संघर्षशील मजदूर संग
फरीदाबाद/ 17 जून 2025 को लखानी चौक पर इंकलाबी मजदूर केंद्र द्वारा अमेरिका व इजरायल के युद्ध परस्त गठजोड़ द्वारा ईरान पर हमले के खिलाफ उनका पुतला दहन किया
पंतनगर/ दिनांक 18 जून 2025 को ठेका मजदूर कल्याण समिति पंतनगर द्वारा कुलपति पंतनगर वि.वि.
हल्द्वानी/ बनभूलपुरा बस्ती को रेलवे द्वारा अतिक्रमण बताए जाने के विरोध में कई स्तर पर संघर्ष चलता रहा है। इसमें ही बस्ती बचाओ संघर्ष समिति के जरिये इसे स
अठारहवीं सदी के इंग्लैण्ड में होने वाले चुनावी भ्रष्टाचार पर गूगल से ‘सर्च’ करने पर उसका ए आई स्वतः ही यह जवाब हाजिर कर देता हैः
एस.आई.आर. प्रक्रिया के दौरान बड़े पैमाने पर मतदाताओं की कटौती की गई। अब तक 13 करोड़ से ज्यादा मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए। जबकि 5-6 करोड़ लोगों को संदेह की आड़ में नोटिस भेजे गए। 13 करोड़ में से 70 प्रतिशत वो लोग थे जिन्हें स्थानांतरित या अनुपस्थित बता दिया गया। इस तरह बड़े स्तर पर मनमानी छंटनी की जा रही है। इसमें सबसे बड़ी संख्या अल्पसंख्यक, दलित, आदिवासी, महिलाओं और मलिन बस्तियों में रहने वालों की है।
इस मजदूर आंदोलन की विचारधारा मार्क्सवाद का यह स्पष्ट कहना था कि महान फ्रांसीसी क्रांति के जमाने से ही पूंजीपति वर्ग ने अपने समाज के लिए जो आदर्श घोषित कर रखा है- स्वतंत्रता, समता, बंधुत्व का आदर्श- वह पूंजीवाद की निजी सम्पत्ति के कारण कभी भी हासिल नहीं किया जा सकता। पूंजी के रूप में निजी सम्पत्ति के रहते स्वतंत्रता का मतलब होगा बाजार में खरीद-बेच की स्वतंत्रता, समता का मतलब होगा बाजार में खरीददार व विक्रेता की समता तथा बंधुत्व का मतलब होगा खरीद-बेच की व्यवस्था पर सहमति।
गाजापट्टी में इजरायल की कत्लेआम करने की मुहिम जारी है। इजरायली यहूदी नस्लवादी न तो किसी समझौते को मान रहे हैं और न ही वे अपनी विनाश लीला को रोक रहे हैं। वे नस्लीय सफाये की मुहिम चला रहे हैं। इसके जवाब में हमास और अन्य प्रतिरोध संगठन इजरायली कब्जाकारी सेना पर प्रहार कर रहे हैं।
अपने व्यापक नुकसान को देखते हुए अमरीकी साम्राज्यवादियों ने अप्रैल महीने में युद्ध विराम किया और फिर पाकिस्तान की मध्यस्थता में एक ज्ञापन समझौता किया। इस ज्ञापन समझौते में अधिकांशतः ईरान की मांगें स्वीकार की गयीं। यह वस्तुतः अमरीका की पराजय थी। इस समझौते के थोड़े ही दिनों बाद अमरीका ने इसका उल्लंघन शुरू कर दिया। इजरायल ने एक भी दिन इस समझौते को नहीं माना।