मुक्ति-योद्धाओं के लिए -महमूद दरवेश (फिलिस्तीनी कवि)

जब तक
मेरी एक बालिश्त जमीन भी शेष है
एक जैतून का पेड़ है मेरे पास
एक नीम्बू का पेड़
एक कुआं
और एक कैक्टस का पौधा

जब तक
मेरे पास एक भी स्मृति शेष है
पुस्तकालय है छोटा-सा
दादा की तस्वीर है
और एक दीवार

जब तक
उच्चरित होंगे अरबी शब्द
गाए जाते रहेंगे लोकगीत
पढ़ी जाती रहेंगी ..
कविता की पंक्तियां
अनतार-अल-अब्से की कथाएं
फ़ारस और रोम के विरुद्ध लड़े गए
युद्धों की वीर गाथाएं

जब तक
मेरे अधिकार में हैं मेरी आंखें
मेरे होंठ और मेरे हाथ
मैं खुद हूं जब तक
मैं अपने शत्रु के समक्ष घोषित करूं..

मुक्ति के लिए प्रबल संघर्ष
स्वतन्त्र लोगों के नाम पर हर कहीं
मजदूरों, छात्रों और कवियों के नाम पर

मैं घोषित करूंगा ..
खाने दो कलंकित रोटी
कायरों को
सूरज के दुश्मनों को
मैं जब तक जीवित रहूंगा
मेरे शब्द शेष रहेंगे ..
‘रोटी और हथियार
मुक्ति-योद्धाओं के लिए’
 

अंग्रेज़ी से अनुवाद : अनिल जनविजय
 

आलेख

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