पहली बार त्रासदी दूसरी बार प्रहसन
आज से ठीक पंद्रह साल पहले गर्मियों में तथाकथित अन्ना हजारे आंदोलन शुरू हुआ था जिसने देश के लाखों-लाख युवाओं को उद्वेलित किया था। वो युवा इस उम्मीद से इस आंदोलन से जुड़े थे
आज से ठीक पंद्रह साल पहले गर्मियों में तथाकथित अन्ना हजारे आंदोलन शुरू हुआ था जिसने देश के लाखों-लाख युवाओं को उद्वेलित किया था। वो युवा इस उम्मीद से इस आंदोलन से जुड़े थे
इस वार्ता के चाहे जो भी परिणाम हों, लेकिन एक बात निश्चित है कि अमरीकी साम्राज्यवाद का कमजोर होते जाना तय है और इसके प्रतिद्वंद्वी के बतौर चीनी साम्राज्यवाद का उभरना और रूसी व चीनी साम्राज्यवादियों का गठबंधन मजबूत होते जाना साफ दिखाई पड़ रहा है।
इस वर्ष के लिए ब्रिक्स की कमान भारत के हाथों में है। और इसी वर्ष भारत सरकार अमेरिकापरस्ती के नये-नये रिकार्ड कायम कर रही है। ब्रिक्स रूसी-चीनी साम्राज्यवादियों के नेतृत्व
1960 में तेल उत्पादक देशों ने ओपेक का गठन किया था। ईरान, इराक, कुवैत, साऊदी अरब और वेनेजुएला इसके संस्थापक देश थे। अबुधाबी 1967 में इसका सदस्य बना। 1971 में यूएई के रूप म
9 मई को पं.बंगाल का नया मुख्यमंत्री एक पूर्व कांग्रेसी, एक पूर्व तृणमूली बन चुका है। इस आदमी का नाम शुभेन्दु अधिकारी है। इससे पहले असम का मुख्यमंत्री एक पूर्व कांग्रेसी ह
एक बात निश्चित है कि इस युद्ध के दौरान ईरान पश्चिम एशिया में एक मजबूत बड़ी शक्ति के बतौर उभरा है। इसके हाथ में होरमुज जलडमरूमध्य का नियंत्रण आना एक बड़ा हथियार है। उसने इस हथियार का बखूबी इस्तेमाल किया है। इसने अमरीकी साम्राज्यवादियों की दादागिरी को चुनौती दी है। और इस चुनौती में होरमुज के हथियारीकरण की अहम भूमिका है। यह आणविक बम से भी अधिक कारगर भूमिका निभा रहा है।
पिछले दिनों अमेरिकी सरगना डोनाल्ड ट्रम्प ने माइकल सैवेज की एक टिप्पणी सोशल मीडिया पर साझा की। यह टिप्पणी अमेरिका में पैदायशी नागरिकता के कानून का विरोध करते हुए की गयी थी
उड़ीसा के ओड़ीसा ग्रामीण बैंक की मल्लीपोसी शाखा में जो कुछ हुआ उसने बैंक की असंवेदनशीलता को एक झटके में पूरे देश के सामने ला दिया। जीतू मुंडा नामक एक आदिवासी की बहन की मृत्
बीते दिनों संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के 61वें सत्र में संयुक्त राष्ट्र की विशेष दूत फ्रांसेस्का अल्बानीज ने गाजा नरसंहार में भारत की भूमिका बताने वाली रिपोर्ट पेश
अब भाजपा के काले कारनामों का ताजा शिकार आम आदमी पार्टी (आप) बनी है। आप के राज्यसभा के दस सांसदों में से सात सांसदों ने भाजपा का दामन थाम लिया है। राघव चड्ढा जो कल तक भाजप
अठारहवीं सदी के इंग्लैण्ड में होने वाले चुनावी भ्रष्टाचार पर गूगल से ‘सर्च’ करने पर उसका ए आई स्वतः ही यह जवाब हाजिर कर देता हैः
एस.आई.आर. प्रक्रिया के दौरान बड़े पैमाने पर मतदाताओं की कटौती की गई। अब तक 13 करोड़ से ज्यादा मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए। जबकि 5-6 करोड़ लोगों को संदेह की आड़ में नोटिस भेजे गए। 13 करोड़ में से 70 प्रतिशत वो लोग थे जिन्हें स्थानांतरित या अनुपस्थित बता दिया गया। इस तरह बड़े स्तर पर मनमानी छंटनी की जा रही है। इसमें सबसे बड़ी संख्या अल्पसंख्यक, दलित, आदिवासी, महिलाओं और मलिन बस्तियों में रहने वालों की है।
इस मजदूर आंदोलन की विचारधारा मार्क्सवाद का यह स्पष्ट कहना था कि महान फ्रांसीसी क्रांति के जमाने से ही पूंजीपति वर्ग ने अपने समाज के लिए जो आदर्श घोषित कर रखा है- स्वतंत्रता, समता, बंधुत्व का आदर्श- वह पूंजीवाद की निजी सम्पत्ति के कारण कभी भी हासिल नहीं किया जा सकता। पूंजी के रूप में निजी सम्पत्ति के रहते स्वतंत्रता का मतलब होगा बाजार में खरीद-बेच की स्वतंत्रता, समता का मतलब होगा बाजार में खरीददार व विक्रेता की समता तथा बंधुत्व का मतलब होगा खरीद-बेच की व्यवस्था पर सहमति।
गाजापट्टी में इजरायल की कत्लेआम करने की मुहिम जारी है। इजरायली यहूदी नस्लवादी न तो किसी समझौते को मान रहे हैं और न ही वे अपनी विनाश लीला को रोक रहे हैं। वे नस्लीय सफाये की मुहिम चला रहे हैं। इसके जवाब में हमास और अन्य प्रतिरोध संगठन इजरायली कब्जाकारी सेना पर प्रहार कर रहे हैं।
अपने व्यापक नुकसान को देखते हुए अमरीकी साम्राज्यवादियों ने अप्रैल महीने में युद्ध विराम किया और फिर पाकिस्तान की मध्यस्थता में एक ज्ञापन समझौता किया। इस ज्ञापन समझौते में अधिकांशतः ईरान की मांगें स्वीकार की गयीं। यह वस्तुतः अमरीका की पराजय थी। इस समझौते के थोड़े ही दिनों बाद अमरीका ने इसका उल्लंघन शुरू कर दिया। इजरायल ने एक भी दिन इस समझौते को नहीं माना।