लेख

‘‘माननीय’’ पूर्व सांसद को उम्र कैद

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यौन उत्पीड़न के बहुचर्चित मामले में प्रज्वल रेवन्ना को 1 अगस्त को विशेष अदालत ने उम्र कैद की सजा सुनाई है। कुछ समय पहले तक ‘‘माननीय’’ रहे अब कैदी संख्या में बदल गये हैं। ज

संघी शासन में अफवाहें और रात भर जागते लोग

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उ.प्र.-उत्तराखण्ड के कई जिलों में गांवों-शहरों में लोग रात-रात भर जाग रहे हैं। वे इस खौफ में जाग रहे हैं कि कोई ‘द्रोण चोर’ उनके यहां डकैती न डाल दे। लोग हाथों में डण्डे

त्यौहार, बाजार व साम्प्रदायिकता

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मोदी सरकार के आगमन के बाद देश में साम्प्रदायिक उन्माद में गुणात्मक बढ़ोत्तरी हुई है। यह साम्प्रदायिकता खासकर मुसलमानों को निशाने पर लेकर हुई है। हालांकि दलित, आदिवासी व मह

उ.प्र. में 5 हजार स्कूलों का विलय

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हाल ही में उत्तर प्रदेश सरकार ने कक्षा 1 से कक्षा 8 तक के करीब 5 हजार से ज्यादा सरकारी स्कूलों को मर्ज (विलय) करने की तैयारी कर दी है। कहीं-कहीं यह संख्या 27 हजार के आस-प

वनाधिकार कानून के बावजूद जारी है जनता के वनाधिकार हनन

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पिछले दिनों उत्तराखंड सरकार ने प्रदेश भर से अतिक्रमण हटाने के नाम पर जंगलों, गांव, खत्तों, बस्तियों के लोगों को आतंकित किया। जिसके खिलाफ लोगों के आंदोलनों-प्रदर्शनों के ब

पूंजीपतियों/सट्टेबाजों के मुनाफे की भेंट चढ़े 11 खेलप्रेमी

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इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) में आरसीबी फाइनल मैच जीती। बेंगलुरु के एक स्टेडियम में जीत के जश्न का आयोजन किया गया। आयोजन की शुरूआत से पहले ही दोपहर के समय लाखों की भीड़ स्टेड

गिग कामगारों की दुर्दशा

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भारत में डिजिटल अर्थव्यवस्था के विस्तार के साथ-साथ गिग मजदूरों की संख्या में बढ़ोत्तरी हो रही है। ये मजदूर घरों पर खाना पहुंचाते हैं; किराने का सामान पहुंचाते हैं; ई-कामर्

मुसलमानों के साथ अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला

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पहलगाम हमले के बाद देश भर में मुसलमानों के खिलाफ एक संगठित अभियान संघी मण्डली द्वारा शुरू कर दिया गया। भाजपा नेता, बजरंग दल कार्यकर्ता इस अभियान के प्रमुख नेतृत्वकारी रहे। हरियाणा, महाराष्ट्र में म

हिन्दू फासीवादी ये ना करें तो और क्या करें

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कुछ लोग कहते हैं और कई सोचते हैं कि हिन्दू फासीवादियों को मंदिर-मस्जिद की नफरती राजनीति नहीं करनी चाहिए। जहां कहीं भी मस्जिद हैं, मदरसे हैं उनके नीचे हिन्दू मंदिर होने का

नयी कृषि विपणन नीति : सरकार का किसानों पर पलटवार

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एक वर्ष से अधिक समय तक चले जुझारू किसान आंदोलन के बाद जब मोदी सरकार तीन काले कृषि कानूनों को वापस लेने को मजबूर हुयी थी तब से ही ये आशंकायें लगायी जा रही थीं कि सरकार बड़ी

आलेख

/punjivadi-jantantra-and-chunavi-corruption

अठारहवीं सदी के इंग्लैण्ड में होने वाले चुनावी भ्रष्टाचार पर गूगल से ‘सर्च’ करने पर उसका ए आई स्वतः ही यह जवाब हाजिर कर देता हैः 

/election-aayog-hindu-fascist-and-loktantra

एस.आई.आर. प्रक्रिया के दौरान बड़े पैमाने पर मतदाताओं की कटौती की गई। अब तक 13 करोड़ से ज्यादा मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए। जबकि 5-6 करोड़ लोगों को संदेह की आड़ में नोटिस भेजे गए। 13 करोड़ में से 70 प्रतिशत वो लोग थे जिन्हें स्थानांतरित या अनुपस्थित बता दिया गया। इस तरह बड़े स्तर पर मनमानी छंटनी की जा रही है। इसमें सबसे बड़ी संख्या अल्पसंख्यक, दलित, आदिवासी, महिलाओं और मलिन बस्तियों में रहने वालों की है।

/uddharak-ideology-ki-talaas

इस मजदूर आंदोलन की विचारधारा मार्क्सवाद का यह स्पष्ट कहना था कि महान फ्रांसीसी क्रांति के जमाने से ही पूंजीपति वर्ग ने अपने समाज के लिए जो आदर्श घोषित कर रखा है- स्वतंत्रता, समता, बंधुत्व का आदर्श- वह पूंजीवाद की निजी सम्पत्ति के कारण कभी भी हासिल नहीं किया जा सकता। पूंजी के रूप में निजी सम्पत्ति के रहते स्वतंत्रता का मतलब होगा बाजार में खरीद-बेच की स्वतंत्रता, समता का मतलब होगा बाजार में खरीददार व विक्रेता की समता तथा बंधुत्व का मतलब होगा खरीद-बेच की व्यवस्था पर सहमति।

/war-and-diplomacy-uthal-puthal-se-bhari-duniyaa

गाजापट्टी में इजरायल की कत्लेआम करने की मुहिम जारी है। इजरायली यहूदी नस्लवादी न तो किसी समझौते को मान रहे हैं और न ही वे अपनी विनाश लीला को रोक रहे हैं। वे नस्लीय सफाये की मुहिम चला रहे हैं। इसके जवाब में हमास और अन्य प्रतिरोध संगठन इजरायली कब्जाकारी सेना पर प्रहार कर रहे हैं। 

/amerika-ka-iran-par-operation-d-day-hatasha-ka-parinam

अपने व्यापक नुकसान को देखते हुए अमरीकी साम्राज्यवादियों ने अप्रैल महीने में युद्ध विराम किया और फिर पाकिस्तान की मध्यस्थता में एक ज्ञापन समझौता किया। इस ज्ञापन समझौते में अधिकांशतः ईरान की मांगें स्वीकार की गयीं। यह वस्तुतः अमरीका की पराजय थी। इस समझौते के थोड़े ही दिनों बाद अमरीका ने इसका उल्लंघन शुरू कर दिया। इजरायल ने एक भी दिन इस समझौते को नहीं माना।