अमेरिका में ट्रंप की तानाशाही के खिलाफ बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन
14 जून, 2025 को लाखों लोगों ने अमेरिका में 2,000 से अधिक स्थानों और 50 राज्यों में से प्रत्येक में ट्रम्प प्रशासन की दक्षिणपंथी नीतियों और तानाशाही तरीकों के खिलाफ विरोध
14 जून, 2025 को लाखों लोगों ने अमेरिका में 2,000 से अधिक स्थानों और 50 राज्यों में से प्रत्येक में ट्रम्प प्रशासन की दक्षिणपंथी नीतियों और तानाशाही तरीकों के खिलाफ विरोध
बीते दिनों हेग में नाटो शिखर सम्मेलन आयोजित हुआ। इस सम्मेलन में 32 देशों के इस सामरिक गठबंधन ने अपने सकल घरेलू उत्पाद का 5 प्रतिशत सैन्य खर्च करने का संकल्प लिया। नाटो का
इजरायल द्वारा फिलिस्तीनी जनता का क्रूर नरसंहार हर बीतते दिन के साथ ज्यादा भयावह होता जा रहा है। पहले इजरायल ने गाजा की धरती को बमों से पाट कर सारे ढांचे को नेस्तनाबूद कर
ट्रम्प के सामने चीनी साम्राज्यवादियों से मिलने वाली चुनौती से निपटना प्रमुख समस्या है। चीनी साम्राज्यवादियों और रूसी साम्राज्यवादियों का गठजोड़ अमरीकी साम्राज्यवाद के विश्व व्यापी प्रभुत्व को कमजोर करता है और चुनौती दे रहा है। इसलिए, हेनरी किसिंजर के प्रयोग का इस्तेमाल करने का प्रयास करते हुए ट्रम्प, रूस और चीन के बीच बने गठजोड़ को तोड़ना चाहते हैं। हेनरी किसिंजर ने 1971-72 में चीन के साथ सम्बन्धों को बहाल करके और चीन को सोवियत संघ के विरुद्ध खड़ा करने में भूमिका निभायी थी।
फिलिस्तीनी अवाम आज सबसे भयानक पीड़ाओं का सामना कर रही है। इजरायल द्वारा तबाह कर दिये मुल्क में वह राहत कार्यक्रम पहुंचाने पर लगी रोक से भुखमरी का शिकार है। महिलायें अपने म
अमरीकी सरगना ट्रम्प लगातार ईरान को धमकी दे रहे हैं। ट्रम्प इस बात पर जोर दे रहे हैं कि ईरान को किसी भी कीमत पर परमाणु बम नहीं बनाने देंगे। ईरान की हुकूमत का कहना है कि वह
अमरीकी साम्राज्यवादियों के लिए यूक्रेन की स्वतंत्रता और क्षेत्रीय अखण्डता कभी भी चिंता का विषय नहीं रही है। वे यूक्रेन का इस्तेमाल रूसी साम्राज्यवादियों को कमजोर करने और उसके टुकड़े करने के लिए कर रहे थे। ट्रम्प अपने पहले राष्ट्रपतित्व काल में इसी में लगे थे। लेकिन अपने दूसरे राष्ट्रपतित्व काल में उसे यह समझ में आ गया कि जमीनी स्तर पर रूस को पराजित नहीं किया जा सकता। इसलिए उसने रूसी साम्राज्यवादियों के साथ सांठगांठ करने की अपनी वैश्विक योजना के हिस्से के रूप में यूक्रेन से अपने कदम पीछे करने शुरू कर दिये हैं।
बीते दिनों अमेरिका की ट्रम्प सरकार ने विदेशी निर्मित कारों पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगाने की घोषणा कर दी। ट्रम्प की इस घोषणा से वैश्विक आटो उद्योग में उथल-पुथल मच गयी है। लगभग
पूर्वी यूरोप का एक देश रोमानिया है। वहां के राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार जार्जेस्क्यू को चुनाव लड़ने से रोक दिया गया है। वे धुर दक्षिणपंथी हैं। इसके पहले वे चुनाव में जीत की
अठारहवीं सदी के इंग्लैण्ड में होने वाले चुनावी भ्रष्टाचार पर गूगल से ‘सर्च’ करने पर उसका ए आई स्वतः ही यह जवाब हाजिर कर देता हैः
एस.आई.आर. प्रक्रिया के दौरान बड़े पैमाने पर मतदाताओं की कटौती की गई। अब तक 13 करोड़ से ज्यादा मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए। जबकि 5-6 करोड़ लोगों को संदेह की आड़ में नोटिस भेजे गए। 13 करोड़ में से 70 प्रतिशत वो लोग थे जिन्हें स्थानांतरित या अनुपस्थित बता दिया गया। इस तरह बड़े स्तर पर मनमानी छंटनी की जा रही है। इसमें सबसे बड़ी संख्या अल्पसंख्यक, दलित, आदिवासी, महिलाओं और मलिन बस्तियों में रहने वालों की है।
इस मजदूर आंदोलन की विचारधारा मार्क्सवाद का यह स्पष्ट कहना था कि महान फ्रांसीसी क्रांति के जमाने से ही पूंजीपति वर्ग ने अपने समाज के लिए जो आदर्श घोषित कर रखा है- स्वतंत्रता, समता, बंधुत्व का आदर्श- वह पूंजीवाद की निजी सम्पत्ति के कारण कभी भी हासिल नहीं किया जा सकता। पूंजी के रूप में निजी सम्पत्ति के रहते स्वतंत्रता का मतलब होगा बाजार में खरीद-बेच की स्वतंत्रता, समता का मतलब होगा बाजार में खरीददार व विक्रेता की समता तथा बंधुत्व का मतलब होगा खरीद-बेच की व्यवस्था पर सहमति।
गाजापट्टी में इजरायल की कत्लेआम करने की मुहिम जारी है। इजरायली यहूदी नस्लवादी न तो किसी समझौते को मान रहे हैं और न ही वे अपनी विनाश लीला को रोक रहे हैं। वे नस्लीय सफाये की मुहिम चला रहे हैं। इसके जवाब में हमास और अन्य प्रतिरोध संगठन इजरायली कब्जाकारी सेना पर प्रहार कर रहे हैं।
अपने व्यापक नुकसान को देखते हुए अमरीकी साम्राज्यवादियों ने अप्रैल महीने में युद्ध विराम किया और फिर पाकिस्तान की मध्यस्थता में एक ज्ञापन समझौता किया। इस ज्ञापन समझौते में अधिकांशतः ईरान की मांगें स्वीकार की गयीं। यह वस्तुतः अमरीका की पराजय थी। इस समझौते के थोड़े ही दिनों बाद अमरीका ने इसका उल्लंघन शुरू कर दिया। इजरायल ने एक भी दिन इस समझौते को नहीं माना।