बिहार में गिग वर्कर्स के लिए बिल पास हुआ

बिहार में 23 जुलाई को विधानसभा में गिग वर्कर्स के लिए एक बिल पास हुआ है। इस बिल का नाम है - बिहार प्लेटफार्म बेस्ड गिग वर्कर्स (रजिस्ट्रेशन, सोशल सिक्योरिटी एंड वेलफेयर) बिल 2025। इस बिल के पास हो जाने के बाद गिग वर्कर्स औपचारिक रूप से कुछ कानूनी प्रावधानों के भीतर आ जाएंगे।

गिग वर्कर्स एसोसिएशन और अमेज़न इंडिया वर्कर्स यूनियन लम्बे समय से गिग वर्कर्स के लिए कानूनी सुरक्षा मुहैया करने की लड़ाई लड़ रहे थे। उनका संघर्ष दिसंबर 2023 में तेज़ हुआ जब उन्होंने श्रम संसाधन मंत्री को एक मॉडल ड्राफ्ट बिल दिया था जिसमें प्लेटफार्म वर्कर्स के लिए कानूनी मान्यता, भलाई और सामाजिक सुरक्षा की मांग थी। इसके बाद उन्होंने 18 जनवरी 2024 को राज्य स्तर पर एक हड़ताल का आह्वान किया। इसके बाद 28 जनवरी 2025 को एक बार फिर स्विग्गी, जोमेटो और अमेज़न के वर्कर्स ने पटना के स्तर पर धरना दिया। और तब अंततः जाकर यह बिल पास हुआ।

इस बिल के प्रावधान इस प्रकार हैं -

1. प्लेटफार्म और ऐप आधारित नियोजक को 60 दिन के भीतर वर्कर्स का अनिवार्य रजिस्ट्रेशन करवाना होगा।

2. गिग वर्कर्स को एक यूनिक पहचान पत्र मिलेगा ताकि उसे राज्य से मिलने वाली सुविधाएं मिल सकें।

3. महिला गिग वर्कर्स को 90 दिनों का मातृत्व अवकाश मिलेगा।

4. क्षतिपूर्ति और अन्य लाभ इस प्रकार मिलेंगे

क. गिग वर्कर की दुर्घटना में मृत्यु होने पर 4 लाख और प्राकृतिक मौत होने पर 2 लाख का मुआवजा मिलेगा।

ख. एक सप्ताह से ज्यादा समय तक अस्पताल में रहने पर 16,000 रुपये मिलेंगे।

ग. थोड़े समय तक अस्पताल में रहने पर 5400 रुपये मिलेंगे।

घ. अपंगता की स्थिति में गिग वर्कर को 74,000 रुपये से 2.5 लाख रुपये तक मिलेंगे। यह अपंगता पर निर्भर करेगा।

इसके अलावा ई एस आई और पी एफ, न्यूनतम वेतन की गारंटी, प्रोत्साहन राशि में पारदर्शिता, एक बोर्ड जिसमें वर्कर्स का प्रतिनिधित्व हो और अचानक गिग वर्कर की आई डी बंद कर देना या उस पर जुर्माना लगा देने से राहत का प्रावधान भी इस कानून में होगा।

इस बिल के पास होने के बाद गिग वर्कर्स के बीच सामूहिक लड़ाई का बोध पैदा होगा। सामूहिक संघर्ष से कुछ हासिल करने का अहसास उनके अंदर गहराएगा।

हालांकि कुछ ऐसे ही प्रावधान 4 लेबर कोड में असंगठित क्षेत्र के कामगारों के लिए भी करने की बात केन्द्र सरकार करती रही है। इनके लिए बने पोर्टल पर अब गिग मजदूरों के भी रजिस्ट्रेशन की केन्द्र सरकार बात कर रही है। यहां यह गौरतलब है कि सरकारें औद्योगिक संगठित मजदूरों के अधिकारों पर कैंची चला असंगठित मजदूरों के कल्याण के शिगूफे छोड़ती रही है। मजदूरों को समझना होगा कि जब संगठित मजदूरों के अधिकारों में कटौती होगी तो असंगठित मजदूरों की दुर्दशा और बढ़ेगी चाहे कानून में उनके लिए कितनी ही सुन्दर बातें दर्ज हों।

मौजूदा कानून को भी व्यवहार में उतारना गिग मजदूरों के लिए टेड़ी खीर होगा। सरकार इन प्लेटफार्मों से प्रति मजदूर कुछ वसूली कर एक कोष बनायेगी जिससे इलाज व मृत्यु के भुगतान होंगे। साथ ही कानून 7 दिन के पूर्व नोटिस पर गिग मजदूर को निकाले जाने, प्लेटफार्म द्वारा कानून के प्रावधान न मानने पर उसे दोषी ठहराने की जटिल प्रक्रिया वाला है। यानी इस कानून में प्लेटफार्म आसानी से कानून तोड़ कर बचते रहेंगे। सामूहिक संघर्ष के दम पर ही मजदूर कुछ हासिल कर पायेंगे। सरकार कानून की सुन्दर बातों के पीछे छिपी इसे लागू कराने की जटिलता छिपा अपनी वाहवाही कर रही है। हालांकि किसी कानूनी सुरक्षा के अभाव की तुलना में इस बिल के तहत मिली सुरक्षा भी बेहतर है।

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