हमने याद किया है, भगत सिंह को -मृगया शोभनम्

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जीवन के इस पल में...
हमने महसूस किया है, कल को
जब बात उठी है, पुरखों की...
हमने याद किया है, भगत सिंह को।

लाख पैदा हुए, लाख मुर्दा हुए
वही तो अब तक जिंदा है...

जिंदा है, हमारी आहों में
जिंदा है, हमारी चाहों में
वही तो, शहीदे-आजम है
शहीदे-आजम, वही तो है...
जब बात उठी है, पुरखों की
हमने याद किया है, भगत सिंह को।

हर ओर, जब विराने थे
भूले हम, सब फसाने थे
तब रौशन करने, राहों को
चूमा था, फांसी के फंदे को
पूरी दुनिया, ये कह उठी
जवानी हो तो ऐसी हो...
जब बात उठी है पुरखों की
हमने याद किया है भगत सिंह को।

इंकलाब, उसका नारा था
लेनिन, उसको प्यारा था
इंकलाब की तलवार, तेज करने को
विचारों की शान पर, उतारा था
जब सब ओर अंधेरा था
तब वो ही चमकता तारा था
जब बात उठी है पुरखों की
हमने याद किया है भगत सिंह को।

  (साभार : ‘यह समय नहीं चुप रहने का’ कविता संग्रह से)

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