इस वक्त देश में घमासान मचा हुआ है। महामानव मोदी के लिए न कुछ निगलते बन रहा है न उगलते। उधर सात समुन्दर पार सबसे बड़े पूंजीपतियों में शुमार अमेरिकी एलन मस्क ने तो सीधे अंबानी को ही प्रधानमंत्री के रूप में संबोधित कर दिया है तो इधर सड़कों पर ‘वोट चोर गद्दी छोड़’ के नारे लग रहे हैं। अब ऐसे में एलन मस्क का तो मोदी क्या बिगाड़ लेते मगर देश के भीतर छाये राजनीतिक संकट को वे एक ओर फौज-पुलिस से हल करने की कोशिश कर रहे हैं तो दूसरी तरफ उन्होंने अपने लंपट मंत्रियों को इस काम में लगा दिया है जो मोदी को ‘140 करोड़ नागरिकों’ द्वारा चुना गया नेता साबित करने में लगे हुए हैं।
इसी मुहिम में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन भी लगे हुए हैं। दिल्ली में युवाओं के उभार के बाद अब एक बार फिर से एस आई आर और ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर उबाल है। इसमें जाहिर है इसके पीछे विपक्षी पूंजीवादी पार्टिया भी हैं। दिल्ली में जंतर-मंतर पर फिर से किसी भी आंदोलन की संभावना को कुचलने के लिए हजारों सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए। मगर संघर्ष थमने का नाम नहीं ले रहा। और फिर अंत में जंतर-मंतर को प्रदर्शन करने की जगह के रूप में हमेशा के लिए प्रतिबंधित कर दिया गया।
ऐसे में भाजपा के अध्यक्ष ने भी धमकी भरे अंदाज में आंदोलन से निपटने की बात की है। इनके हिसाब से ‘लोकतंत्र’ में ‘जनता’ ही सब कुछ है और इस जनता ने जनादेश मोदी को ही दिया है। इसलिये जो कोई भी एस आई आर के विरोध में और ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे या बर्खास्त करने की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे हैं, वे सभी ‘जनता के जनादेश’ का विरोध कर रहे हैं। नितिन नवीन ने यह भी कहा कि इनका, संविधान और लोकतंत्र के नाम पर झूठ फैलाकर जनता के फैसले को चुनौती देना सही नहीं है, कि प्रधानमंत्री नए भारत का निर्माण कर रहे हैं। यही सुर योगी, हेमंता से लेकर धामी तक का है।
आखिर हिंदू फासीवादी यह न कहें तो क्या कहें। जब जनता का कोई हिस्सा सड़कों पर हो तो इससे निपटने का एक बेहतर तरीका यह भी है कि उसे जनता के रूप में नकार दो। उसे जनता के दायरे से ही बाहर कर दो और अपनी अलग जनता बना लो ताकि दमन बेहद आसान हो जाये। वो जनता जो हिंदू फासीवादी प्रभाव में है या लंपट हिंदू फासीवादी राजनीति को आगे बढ़ा रही है, उसी को 140 करोड़ जनता के फर्जी दावे के साथ प्रस्तुत करते रहो। जबकि 2024 में ही कुल मतदाता 98 करोड़ के लगभग थे इसमें से लगभग 64 करोड़ ने मतदान किया। इसमें से ‘23 करोड़ मत’ भाजपा को मिले तो 13 करोड़ कांग्रेस को। मोदी-शाह की जोड़ी ने ये मत भी कैसे हासिल किए होंगे यह अब किसी से छुपा नहीं है।
मोदी-शाह ने 2047 तक सत्ता में बने रहने का जो दावा ठोका है आखिर उसके लिए जरूरी है कि वे अपनी जनता चुन लें और जनता के बड़े हिस्से को इस दायरे से बाहर करके विपक्षी घोषित कर दें। एस आई आर के जरिए ‘अपनी जनता’ या अपने नागरिक चुनने का खुला षड्यंत्र इसलिए भी है। इस तरह लम्बे समय तक सत्ता पर बने रहने की व्यवस्था मोदी-शाह की जोड़ी ने कर ली है।
मोदी-शाह को सत्ता पर बने रहने के लिए अपने आकाओं (अडाणी, अम्बानी, टाटा) की सेवा करनी है और खुद की भी, सत्ता में होने की भी अपनी एक बड़ी ताकत होती ही है। तो दूसरी ओर योगी आदित्यनाथ से लेकर हिमंता, धामी के लिए सत्ता पर बने रहने के लिए और सत्ता की मलाई चाटने के लिए जरूरी है कि वे बार-बार बताएं कि मोदी पर 140 करोड़ जनता का भरोसा है। साथ ही बताएं कि मोदी ही भगवान हैं, और मोदी की शान में कसीदे गढ़ें जिसके चलते उन्हें सत्ता सुख हासिल है।
यही दावा अब भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने किया है। मगर 140 करोड़ का आंकड़ा न मोदी की जुबान से कम होता है न इनके लंपट मंत्रियों की जुबान से, जबकि इस बीच इनके चुनाव आयोग ने एस आई आर के जरिए 13 करोड़ मतदाताओं के नाम तो मतदाता सूची से साफ कर ही दिए हैं और 5-6 करोड़ को नोटिस भिजवा दिया है। ये तो दुनिया के कई देशों की आबादी से भी ज्यादा है। इस तरह अधिकांश या मुख्य राज्यों में बड़े स्तर पर इन्होंने ‘अपनी जनता’ का चुनाव कर लिया है। इसी फैसले को जिसमें तमाम गड़बड़ियां और फर्जीवाड़ा है जरूरी है कि उसे जनता का फैसला बताएं। मगर समस्या ये है कि इस चुनी हुए जनता का आकार भी सिमटता जा रहा है जो इनके दायरे से निकल रहे हैं उन्हें भी विपक्षी या दिमागी नक्सल घोषित कर दिया जा रहा है। इस तरह जनता का वह हिस्सा बड़ा होता जा रहा है जिसका मोदी-शाह की सरकार और संघ से टकराव बढ़ता जा रहा है।