ट्रेड यूनियन एक्ट, 1926 के सौ साल
ट्रेड यूनियन एक्ट, 1926 को अस्तित्व में आये 100 साल पूरे हो चुके हैं। मजदूरों को संगठित होने का कानूनी अधिकार देने वाला यह कानून जब अस्तित्व में आया था तब भारत अंग्रेजों
ट्रेड यूनियन एक्ट, 1926 को अस्तित्व में आये 100 साल पूरे हो चुके हैं। मजदूरों को संगठित होने का कानूनी अधिकार देने वाला यह कानून जब अस्तित्व में आया था तब भारत अंग्रेजों
केंद्र सरकार ने लद्दाख को नया झुनझुना थमाने की कोशिश की है। काफी पहले हिंदू फासीवादियों ने जम्मू कश्मीर के विभाजन और 370 के खात्मे से पहले भी इस इलाके की जनता को ढेरों झू
पिछले 12 साल से हिंदू फासीवादी सत्ता पर हैं। इस दौरान लगातार ही भारत को आत्मनिर्भर बनाने के लिए तमाम दावे और बातें इन्होंने की हैं। इन्होंने मेक इन इंडिया का नारा भी भारत
आज देश भर में छात्र बेहतर और सम्मानजनक शिक्षा के अधिकार के लिए आवाज उठा रहे हैं। अलग-अलग राज्यों और शहरों से छात्र अपने स्कूलों की बदहाल तस्वीरें सामने ला रहे हैं। कहीं स
छात्रों के आंदोलन की गूंज अभी थमी भी नहीं थी कि सोशल मीडिया पर एक नया अभियान तेजी से उभर आया ‘रिजर्वेशन हटाओ आंदोलन’। कुछ ही दिनों में यह सोशल मीडिया पेज इंस्टाग्राम, रेड
आजकल ई-20 पेट्रोल का मामला काफी चर्चा में है। मोदी सरकार ने ई-20 एथेनाल मिश्रित पेट्रोल को ‘आत्मनिर्भर भारत’, ‘किसान कल्याण’ और ‘ऊर्जा सुरक्षा’ जैसे दावों के साथ बिना बहस
थ्योरेस्टीन वेब्लेन एक अमरीकी समाजशास्त्री थे। 1899 में उन्होंने अमेरिकी समाज के ऊपर एक किताब प्रकाशित की: द थ्योरी आव लीशर क्लास (फुरसती वर्ग के बारे में सिद्धान्त)। इस
पंूजीवादी दुनिया में फैशन आते-जाते रहते हैं। आजकल भारत में ‘जेन-जी’ फैशन में है। नेताओं से लेकर बुद्धिजीवी तक ‘जेन-जी’ के मुरीद हो गये हैं। वे ‘जेन-जी’ के गुण गा रहे हैं।
‘वंदे मातरम’ एक बार फिर से चर्चा में है। मोदी सरकार और संघ के लिए राष्ट्र गीत और नारा भी उसी तरह सांप्रदायिक ध्रुवीकरण का हथियार है जैसे राम। राम के नाम पर लूट-खसोट मचाने
अठारहवीं सदी के इंग्लैण्ड में होने वाले चुनावी भ्रष्टाचार पर गूगल से ‘सर्च’ करने पर उसका ए आई स्वतः ही यह जवाब हाजिर कर देता हैः
एस.आई.आर. प्रक्रिया के दौरान बड़े पैमाने पर मतदाताओं की कटौती की गई। अब तक 13 करोड़ से ज्यादा मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए। जबकि 5-6 करोड़ लोगों को संदेह की आड़ में नोटिस भेजे गए। 13 करोड़ में से 70 प्रतिशत वो लोग थे जिन्हें स्थानांतरित या अनुपस्थित बता दिया गया। इस तरह बड़े स्तर पर मनमानी छंटनी की जा रही है। इसमें सबसे बड़ी संख्या अल्पसंख्यक, दलित, आदिवासी, महिलाओं और मलिन बस्तियों में रहने वालों की है।
इस मजदूर आंदोलन की विचारधारा मार्क्सवाद का यह स्पष्ट कहना था कि महान फ्रांसीसी क्रांति के जमाने से ही पूंजीपति वर्ग ने अपने समाज के लिए जो आदर्श घोषित कर रखा है- स्वतंत्रता, समता, बंधुत्व का आदर्श- वह पूंजीवाद की निजी सम्पत्ति के कारण कभी भी हासिल नहीं किया जा सकता। पूंजी के रूप में निजी सम्पत्ति के रहते स्वतंत्रता का मतलब होगा बाजार में खरीद-बेच की स्वतंत्रता, समता का मतलब होगा बाजार में खरीददार व विक्रेता की समता तथा बंधुत्व का मतलब होगा खरीद-बेच की व्यवस्था पर सहमति।
गाजापट्टी में इजरायल की कत्लेआम करने की मुहिम जारी है। इजरायली यहूदी नस्लवादी न तो किसी समझौते को मान रहे हैं और न ही वे अपनी विनाश लीला को रोक रहे हैं। वे नस्लीय सफाये की मुहिम चला रहे हैं। इसके जवाब में हमास और अन्य प्रतिरोध संगठन इजरायली कब्जाकारी सेना पर प्रहार कर रहे हैं।
अपने व्यापक नुकसान को देखते हुए अमरीकी साम्राज्यवादियों ने अप्रैल महीने में युद्ध विराम किया और फिर पाकिस्तान की मध्यस्थता में एक ज्ञापन समझौता किया। इस ज्ञापन समझौते में अधिकांशतः ईरान की मांगें स्वीकार की गयीं। यह वस्तुतः अमरीका की पराजय थी। इस समझौते के थोड़े ही दिनों बाद अमरीका ने इसका उल्लंघन शुरू कर दिया। इजरायल ने एक भी दिन इस समझौते को नहीं माना।