स्थानीय

प्रबंधन की तानाशाही के खिलाफ बेलसोनिका मजदूर परिवारों का प्रदर्शन

गुड़गांव/ हरियाणा के मानेसर में ऑटो पार्ट्स बनाने वाली बेलसोनिका कंपनी का प्रबंधन लगातार कंपनी में मजदूर विरोधी नीतियां लागू कर रहा है। बेलसोनिका मजदूर यूनियन पिछले दो वर्षों से लगा

पेरिस कम्यून के अवसर पर विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन

आज से 152 साल पहले 18 मार्च, 1871 के दिन पेरिस के मजदूरों ने पूंजीपतियों के स्वर्ग पर धावा बोलते हुये पेरिस कम्यून की स्थापना की थी। यह दुनिया में मजदूरों का पहला राज था, जो कि 72 दिनों तक कायम रहा

23 मार्च : शहीदी दिवस पर विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन

भगतसिंह, सुखदेव और राजगुरू हमारे देश के वो अमर बलिदानी हैं, जो 23 मार्च, 1931 के दिन हंसते-हंसते फांसी के फंदों पर झूल गये थे। अपने देश और समाजवाद के महान उद्देश्य के लिये कुर्बान होने वाले ये महान

झूठे मुकदमों के विरोध में प्रदर्शन

हल्द्वानी/ हल्द्वानी के बहुचर्चित रेलवे बनाम बनभूलपुरा अवाम मामले में बस्ती बचाओ संघर्ष समिति के कार्यकर्ताओं पर लगाए झूठे मुकदमों के विरोध में 15 मार्च को बुद्ध पार्क, हल्द्वानी म

अंतर्राष्ट्रीय कामगार महिला दिवस के उपलक्ष्य में विभिन्न कार्यक्रम

आठ मार्च : अंतर्राष्ट्रीय कामगार महिला दिवस मजदूर-मेहनतकश महिलाओं के संघर्षों का प्रतीक दिवस है जो कि पूरी दुनिया में मनाया जाता है। 1910 में डेनमार्क की राजधानी कोपेनहेगेन में समा

खिरिया बाग (आजमगढ़) में किसान-मजदूर महापंचायत

आजमगढ़/ पूंजीपति वर्ग की सबसे बड़ी हितैषी भाजपा की केन्द्र सरकार व राज्य सरकारें लगातार किसान विरोधी, मजदूर विरोधी, कानून व योजनायें बनाने और उन्हें लागू करने में लगी हुयी हैं। इसी क

राजा बिस्किट के मजदूरों का कम्पनी गेट पर धरना जारी

हरिद्वार/ उत्तराखंड के हरिद्वार जनपद में सिडकुल में बहुचर्चित राजा बिस्किट कंपनी में 17 साल काम कराने के बाद मालिक और प्रबंधन स्थाई कर्मचारियों को बाहर करना चाह रहे हैं। मजदूरों के

यूनियन का ‘‘जे’’ फार्म के रजिस्ट्रेशन को लेकर संघर्ष जारी

पंतनगर/ बजाज मोटर कर्मकार यूनियन, पन्तनगर उधम सिंह नगर, उत्तराखंड के नियमित चुनाव दिनांक 26 जून 2022 को आहूजा धर्मशाला में हुए जिसमें तमाम पदाधिकारियों का निर्विरोध चुनाव हुआ। जिसम

बस्ती बचाओ संघर्ष समिति के कार्यकर्ताओं पर लगाए झूठे मुकदमे

हल्द्वानी/ हल्द्वानी के बहुचर्चित रेलवे बनाम बनभूलपुरा अवाम मामले में बस्ती बचाओ संघर्ष समिति के कार्यकर्ताओं पर फर्जी मुकदमे दर्ज किए गये हैं। ज्ञात रहे विगत 2 जुलाई 2022 को बस्ती

वेतन भुगतान के लिए ठेका मजदूरों का सफल संघर्ष

पंतनगर/ पंतनगर विश्व विद्यालय के गार्डन सेक्सन में कार्यरत ठेका मजदूरों को पिछले माह जनवरी 2023 का वेतन भुगतान होने में देरी से मजदूर काफी आक्रोशित थे। अंततः उनके सब्र का बांध 22 फ

आलेख

/punjivadi-jantantra-and-chunavi-corruption

अठारहवीं सदी के इंग्लैण्ड में होने वाले चुनावी भ्रष्टाचार पर गूगल से ‘सर्च’ करने पर उसका ए आई स्वतः ही यह जवाब हाजिर कर देता हैः 

/election-aayog-hindu-fascist-and-loktantra

एस.आई.आर. प्रक्रिया के दौरान बड़े पैमाने पर मतदाताओं की कटौती की गई। अब तक 13 करोड़ से ज्यादा मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए। जबकि 5-6 करोड़ लोगों को संदेह की आड़ में नोटिस भेजे गए। 13 करोड़ में से 70 प्रतिशत वो लोग थे जिन्हें स्थानांतरित या अनुपस्थित बता दिया गया। इस तरह बड़े स्तर पर मनमानी छंटनी की जा रही है। इसमें सबसे बड़ी संख्या अल्पसंख्यक, दलित, आदिवासी, महिलाओं और मलिन बस्तियों में रहने वालों की है।

/uddharak-ideology-ki-talaas

इस मजदूर आंदोलन की विचारधारा मार्क्सवाद का यह स्पष्ट कहना था कि महान फ्रांसीसी क्रांति के जमाने से ही पूंजीपति वर्ग ने अपने समाज के लिए जो आदर्श घोषित कर रखा है- स्वतंत्रता, समता, बंधुत्व का आदर्श- वह पूंजीवाद की निजी सम्पत्ति के कारण कभी भी हासिल नहीं किया जा सकता। पूंजी के रूप में निजी सम्पत्ति के रहते स्वतंत्रता का मतलब होगा बाजार में खरीद-बेच की स्वतंत्रता, समता का मतलब होगा बाजार में खरीददार व विक्रेता की समता तथा बंधुत्व का मतलब होगा खरीद-बेच की व्यवस्था पर सहमति।

/war-and-diplomacy-uthal-puthal-se-bhari-duniyaa

गाजापट्टी में इजरायल की कत्लेआम करने की मुहिम जारी है। इजरायली यहूदी नस्लवादी न तो किसी समझौते को मान रहे हैं और न ही वे अपनी विनाश लीला को रोक रहे हैं। वे नस्लीय सफाये की मुहिम चला रहे हैं। इसके जवाब में हमास और अन्य प्रतिरोध संगठन इजरायली कब्जाकारी सेना पर प्रहार कर रहे हैं। 

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अपने व्यापक नुकसान को देखते हुए अमरीकी साम्राज्यवादियों ने अप्रैल महीने में युद्ध विराम किया और फिर पाकिस्तान की मध्यस्थता में एक ज्ञापन समझौता किया। इस ज्ञापन समझौते में अधिकांशतः ईरान की मांगें स्वीकार की गयीं। यह वस्तुतः अमरीका की पराजय थी। इस समझौते के थोड़े ही दिनों बाद अमरीका ने इसका उल्लंघन शुरू कर दिया। इजरायल ने एक भी दिन इस समझौते को नहीं माना।