युवा और युवा सपनों की कत्लगाह बनता भारत
आत्महत्या, सड़क हादसे या आगजनी जैसी घटनाओं में मारे जाने वाली युवा आबादी को आसानी से मौत के मुंह में जाने से रोका जा सकता था। परन्तु यदि ऐसा नहीं हो पा रहा है तो इसका कारण सिवा इस बात के क्या है कि हमारी समाज व्यवस्था और उसको चलाने वाला शासक वर्ग ही अंततः इस सबके लिए दोषी है।