आपका नजरिया- जेल में बंद साथियों के नाम संदेश
गुड़गांव जेल में गये साथियों को लाल सलाम करता हूं जो भी पुलिस द्वारा फर्जी तरीके से गिरफ्तार किये गये हैं। शासकों ने डरकर अपनी व्यवस्था को बचाने के लिए उन्हें गिरफ्तार किय
गुड़गांव जेल में गये साथियों को लाल सलाम करता हूं जो भी पुलिस द्वारा फर्जी तरीके से गिरफ्तार किये गये हैं। शासकों ने डरकर अपनी व्यवस्था को बचाने के लिए उन्हें गिरफ्तार किय
आज जब आप इस लेख को पढ़ रहे हैं, तब तक अमेरिका-इजरायल द्वारा ईरान पर किये गये हमले को 15 दिन से अधिक हो चुके हैं। यह हमला अमेरिका ने अमेरिका व ईरान के बीच चल रही समझौता वार
हरियाणा का जिला गुड़गांव जो कि मिलेनियम सिटी के नाम से भी जाना जाता है। यह जिला कई वजहों से चर्चा में रहा है। पहला तो यह कि यह हरियाणा की अर्थव्यवस्था के लिए मुख्य जिला बन
पिछले दिनों मेरी महिला साथी की तबियत खराब होने के कारण उसके साथ दिल्ली के सरकारी अस्पताल डा.बी.आर.अंबेडकर अस्पताल जाना हुआ। यह अस्पताल दिल्ली के बड़े अस्पतालों में गिना जा
इस समय संघ-भाजपा पूरी शिद्दत के साथ देश में साम्प्रदायिक ध्रुवीकरण की प्रक्रिया को अंजाम दे रहे हैं। एक के बाद एक साम्प्रदायिक घटनाएं करवाकर संघ-भाजपा अपनी फासीवादी मुहिम
आप लोहे की कार का आनंद लेते हैं
मेरे पास लोहे की बंदूक है।
मैंने लोहा खाया है
तुम लोहे की बात करते हो।
छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले में छिंदवाड़ा गांव की कुल आबादी 6,450 है। इन 6,450 लोगों में छह हजार लोग आदिवासी समुदाय के हैं। साढ़े चार सौ लोग माहरा समुदाय के हैं। गांव में लगभग स
नागरिक टीम लगभग 6 महीने से पत्र को बेहतर करने के नए प्रयास कर रही है। पत्र को बेहतर करने के लिए उसकी छपाई की गुणवत्ता, फोंट आदि में प्रयोग किये जा रहे हैं। मुझे जो ज्यादा
आज हम जिस समाज में रह रहे हैं वह सड़ गल रहा है। समाज में नैतिकता, सामूहिकता का पतन हो रहा है। उससे मजदूरों-मेहनतकशों के परिवार भी अछूते नहीं हैं। तथाकथित आधुनिक जीवन शैली
अमरीकी साम्राज्यवादी और इजरायली शासक सोचते थे कि ईरान के शीर्ष नेतृत्व का सफाया करने के बाद ईरानी जनता अपनी सत्ता के विरुद्ध उठ खड़ी होगी और इसका फायदा उठाते हुए अमरीकी साम्राज्यवादी अपनी किसी कठपुतली को सत्ता में स्थापित कर देंगे। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। ईरानी अवाम अपनी सत्ता के समर्थन में मजबूती से खड़ी हो गई। यहां से अमरीकी साम्राज्यवादियों को समझ में आ गया कि वे ईरान पर कब्जा नहीं कर सकते।
अमेरिकी साम्राज्यवादी पश्चिम एशिया में और सारी दुनिया में अपनी साम्राज्यवादी जकड़न को खत्म नहीं होने देना चाहेंगे। वे इसके खिलाफ हर संभव प्रयास करेंगे। एक हमले में मुंह की खाने के बाद वे सबक लेकर आगे हमला करने से तौबा नहीं करेंगे। यह उनकी साम्राज्यवादी फितरत के खिलाफ होगा। यानी वे ईरान पर काबू पाने के लिए दूसरे तरीकों की खोज में लग जायेंगे।
पिछले दस-बारह सालों में हिन्दू फासीवादियों ने इस अनौपचारिक आपातकाल की शैली को काफी विकसित किया है। कहां किस छेद का इस्तेमाल करना है, इसमें उन्होंने महारत हासिल की है। इनके इस कृत्य में न्यायपालिका की सहभागिता से यह काम और आसान हो गया है। मतदाता सूची का विशेष गहन पुनर्रीक्षण इस सबका विशिष्ट उदाहरण है।
जैसा कि इंटरव्यू के शीर्षक से स्पष्ट है कि पिकेटी एक ऐसी दुनिया का ख्वाब परोसते हैं जिसमें बगैर पर्यावरण को नुकसान पहुंचाये ज्यादातर लोग खुशहाल बन सकते हैं। इस सुन्दर दुनिया को हासिल करने के लिए वे किसी वर्ग संघर्ष बढ़ाने या क्रांति की वकालत नहीं करते। बल्कि वे कुछ नुस्खे सुझाते हैं जिस पर चल कर मौजूदा पूंजीवादी-साम्राज्यवादी दुनिया को ही खुशनुमा बनाया जा सकता है।
अमरीकी साम्राज्यवादी वर्चस्व को बढ़ाने में पश्चिम एशिया में दृढ़ स्तम्भ इजरायल रहा है। 1979 से पहले ईरान का शासक शाह रजा पहलवी भी इस क्षेत्र में अमरीका का लठैत रहा है। 1979 में रजा पहलवी का तख्ता उलटने के बाद जो इस्लामी सत्ता आयी, वह लगातार अमरीकी साम्राज्यवाद की वर्चस्ववादी नीतियों का विरोध करती रही थी। यह सत्ता इजरायल द्वारा फिलिस्तीनियों को उजाड़े जाने और उनकी जमीनों पर यहूदी बस्तियां बसाने का विरोध करती रही है।