मोदी की नार्वे यात्रा

Published
Mon, 06/01/2026 - 15:50

भारत के प्रधानमंत्री मोदी की नार्वे यात्रा काफी चर्चित रही। इस अचानक की गयी यात्रा के उद्देश्य और वहां नार्वे की पत्रकार के प्रश्न पर मोदी की चुप्पी दोनों चर्चा में रहे।     
    
औपचारिक तौर पर कहा गया कि प्रधानमंत्री मोदी भारत-यूरोपीय व्यापार समझौते को आगे बढ़ाने, भारत में निवेश आकर्षित करने नार्वे गये। यह किसी भारतीय राष्ट्राध्यक्ष की 43 वर्ष बाद नार्वे की यात्रा थी। इसके तहत तीसरे भारत-नार्डिक शिखर सम्मेलन में मोदी ने भाग लिया। भारत और नार्वे ने हरित ऊर्जा, पवन ऊर्जा और महासागर अर्थव्यवस्था सरीखे क्षेत्रों में समझौते किये। 
    
मोदी की इस यात्रा की घोषणा यात्रा से एक हफ्ते पूर्व ही भारत सरकार ने की। इसके चलते इस अचानक यात्रा पर कई कयास लगने लगे। विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया कि नार्वे के संप्रभु पेंशन फण्ड द्वारा अडाणी की दो प्रमुख कम्पनियों अडाणी एनर्जी व अडाणी पोटर््स को निवेश हेतु ब्लैकलिस्टेड करने के चलते मोदी ने अडाणी के पक्ष में नार्वे सरकार को मनाने के लिए यह यात्रा की। गौरतलब है कि इस विशाल संप्रभु फण्ड ने भ्रष्टाचार, वित्तीय अपराध के आरोपों के चलते अडाणी की इन कंपनियों को ब्लैकलिस्टेड किया। दुनिया के सबसे बड़े 13 खरब डालर के इस संप्रभु फण्ड से तमाम कम्पनियों में निवेश किया जाता है। 
    
इस तरह प्रधानमंत्री मोदी पर आरोप लगा कि वे अपने एक मित्र की खातिर नार्वे यात्रा पर गये। 
    
दूसरा प्रमुख चर्चा का मुद्दा नार्वे की एक युवा महिला पत्रकार के प्रश्न से मोदी सरकार की किनाराकशी रहा। नार्वे के दैनिक अखबार डैग्सविसन कि हेले लिंग स्वेन्डसेन ने मोदी से कहा कि वे दुनिया की सबसे स्वतंत्र प्रेस के कुछ सवाल क्यों नहीं लेते? मोदी ने इस पर भी पत्रकार को जवाब देने की जरूरत नहीं समझी। बाद में भारत के विदेश मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी से जब हेले लिंग ने भारत के मानवाधिकार रिकार्ड के बारे में प्रश्न पूछा तो वे सीधे जवाब देने के बजाय भारत की महानता का बखान करने लगे। मोदी के उलट नार्वे के प्रधानमंत्री ने नार्वे व भारत दोनों के पत्रकारों के सवालों के जवाब दिये। 
    
हेले लिंग द्वारा मोदी से सवाल पूछते ही भारत में मोदी भक्तों द्वारा हेले लिंग को बदनाम करने का अभियान छेड़ दिया गया। उन्हें भारत की छवि बिगाड़ने की टूलकिट का हिस्सा करार दिया गया। 
    
स्पष्ट है कि मोदी की यह नार्वे यात्रा अडाणी भक्ति व प्रेस स्वतंत्रता के मामले में पहले पायदान पर खड़े नार्वे की पत्रकार के सवाल से भागने के चलते मोदी की किरकिरी कराने वाली साबित हुयी। नार्वे के एक अखबार आप्टेनपोस्टन ने तो एक कार्टून में मोदी को सपेरे के तौर पर दिखाते हुए लिखा- एक चालाक और थोड़ा खीझ वाला आदमी। 

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