एस आई आर पर सेमिनार

Published
Sun, 01/04/2026 - 15:50
/s-i-r-par-seminar

आज क्रांतिकारी लोक अधिकार संगठन द्वारा जलियांवाला बाग हत्याकांड की पूर्व संध्या पर हल्द्वानी में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) पर सेमिनार आयोजित किया गया। सेमिनार में सबसे पहले जलियांवाला बाग हत्याकांड के शहीदों को श्रद्धांजलि देते हुए दो मिनट का मौन रखा गया। तदुपरांत एक जन गीत "ज़माने को बदलना है ...." के साथ सेमिनार शुरू हुआ। सेमिनार में संगठन के केंद्रीय अध्यक्ष पी. पी. आर्या ने SIR के बारे में विस्तार से बताते हुये कहा कि असल में SIR के नाम पर पिछले दरवाजे से देश में NRC लागू की जा रही है। यह असल में मज़दूर- मेहनतकश जनता, सरकार के राजनीतिक विरोधियों एवं मुस्लिमों से मत का अधिकार छीनने की साजिश है।

ठेका मजदूर कल्याण समिति के अभिलाख ने बताया कि देश में दिन प्रतिदिन मजदूरों की स्थिति ख़राब हो रही है। मजदूर अपने कागजात की देख-रेख करें या अपनी रोजी-रोटी बचाये। मजदूरों को पहले जो अधिकार मिले थे वह खत्म कर सरकार डिटेंशन कैम्प बना रही है। इसलिए मजदूरों को संगठित हो कर अपने अधिकारों की रक्षा करनी चाहिए।

उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी के अमीन उर रहमान ने कहा कि सरकार जिस प्रकार एस.आई.आर. लागू कर रही है उसकी आड़ पर वह मेहनतकश जनता को उसके जनवादी अधिकार से वंचित करना चाहती है।

परिवर्तनकामी छात्र संगठन के उमेश पाण्डेय ने कहा कि एस आई आर के नाम पर बहुत फर्जीवाडा हो रहा है। एन. आर. सी. असम इसका पहला उदाहरण था और बिहार चुनाव के दौरान सबने देखा। पूरे देश से इस आड़ में मेहनतकशों को उनके अधिकार से बेदखल करना है।

वरिष्ठ पत्रकार व संस्कृतिकर्मी उमेश तिवारी (विश्वास) ने अपने वक्तव्य में कहा कि आज इस रेत पर टिकी व्यवस्था का संकट बढ़ रहा है और मेहनतकशों को एकजुट होकर बेहतरीन समाज का निर्माण करना होगा।

इंकलाबी मजदूर केंद्र के पूर्व अध्यक्ष कैलाश भट्ट ने कहा कि इस देश में वोट का अधिकार मज़दूर वर्ग ने अपने संघर्षों से हासिल किया था। और आज जब मज़दूर आंदोलन पीछे हटे हैं तो पूंजीपति वर्ग ये अधिकार छीनने की तरफ बढ़ रहा है।

सामाजिक कार्यकर्ता तसलिम अंसारी ने कहा कि आज जो स्थिति है वह अंगरेजी राज से भी बुरी है। हल्द्वानी का बनभूलपुरा अंग्रेजों के समय से बसा है। इसके पास ही रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड, पुलिस चौकी आदि हैं लेकिन यह सरकार अपने ही लोगों के खिलाफ काम कर रही है। किसी को रोजगार से वंचित कर रही है तो किसी के खून पसीने से बने घर को बुलडोजर से गिरा रही है। और एस आई आर के बहाने जनता के वोट डालने के अधिकार को भी छीन लेना चाहती है।

प्रगतिशील महिला एकता केंद्र की अध्यक्ष बिंदु गुप्ता ने कहा की महिलाओं के साथ दिन प्रतिदिन अपराध बढ़ रहे हैं। एस आई आर से वंचित लोगों को जब डिटेंशन कैम्प में रखा जायेगा तो क्या वहां महिलाएं सुरक्षित रहेंगी।

उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी के महासचिव प्रभात ध्यानी ने कहा कि एस आई आर के नाम पर भाजपा के लोग अपने विरोधियों के वोट को हटाने का काम कर रही है। वह शुद्धिकरण के नाम अलपसंख्यकों को उनके अधिकार से भी वंचित कर रही है। इसके खिलाफ संयुक्त गोलबंदी कर बड़ा आंदोलन खड़ा करना चाहिए।

इसके अलावा सेमिनार को क्रांतिकारी किसान मंच के आनंद पाण्डेय, परिवर्तनकामी छात्र संगठन के महासचिव महेश, इंकालबी मजदूर केंद्र के पंकज, क्रांतिकारी लोक अधिकार संगठन के वरिष्ठ साथी शिवदेव सिंह, पाक्षिक अख़बार नागरिक के संपादक रोहित रुहेला सहित कई लोगों ने अपने विचार रखे। सेमिनार में दो प्रस्ताव 1.एस. आई. आर. को निरस्त करने और 2. हल्द्वानी की सबसे पुरानी रिहाईशी बस्ती बनभूलपुरा को उजाड़ने के खिलाफ लिये।

प्रस्ताव- 1

मतदाता शुद्धिकरण के नाम पर किया जा रहा एस०आई० आरo परोक्ष रूप से नागरिकता परीक्षण की दिशा में बढ़ा दिया गया है। इसके जरिए मतदाता सूची से बाहर होने वाले और अयोग्य करार दिए गए मतदाताओं के ऊपर संदिग्ध नागरिक होने की तलवार लटकी रहेगी।

यह एस.आई.आर, ई.आर.ओ. को विशेषाधिकार देता है जिससे वह अपने विवेक के आधार पर किसी को भी मतदाता सूची से बाहर कर सकता है। अंततः यह नागरिकता परीक्षण के लिए दरवाजा खोल देता है।

असम में नागरिकता परीक्षण के नतीजे कष्ट दायक अनुभव रहे हैं। जहाँ असम में 19 लाख लोगों को नागरिकता के दायरे से बाहर कर दिया गया था जबकि यह प्रक्रिया घोषित (NRC) एन. आर. सी. के आधार पर की गयी थी। इस भारी संख्या को शरणार्थियों की स्थिति में डाल दिया गया।

इस विशेष गहन पुनरीक्षण में संवैधानिक न्यायिक प्रक्रिया को उलट दिया गया है। चुनाव आयोग द्वारा मनमाने तरीके से नागरिकता के दस्तावेज तय किये गये। आधार कार्ड व वोटर आईडी को अमान्य कर दिया गया। नागरिकों पर नागरिकता के सबूत जुटाने का "बोझ" "राज्य" संस्था की जिम्मेदारी से हटा कर समग्र नागारिक आबादी पर लाद दिया। इस कारण करोडों स्वाभाविक नागरिकों को संदिग्ध नागरिक की श्रेणी में डाल दिया।

हम विभिन्न सामाजिक संगठनों, नागरिक अधिकार समूहों तथा सचेत नागरिक आज दिनांक 12 अप्रैल, 2026 में आयोजित सेमिनार जिसमे एस. आई. आर. की असंवैधानिक प्रक्रिया पर रोष व्यक्त करते हैं।

हम जोर देकर इस प्रस्ताव के माध्यम से मांग करते है :-

(1) वोटर कार्ड / आधार कार्ड को नागरिकता का आधार बनाया जाय।

(2) मतदाता होने के लिए पहले से चली प्रक्रिया की तरह शपथपत्र व स्वघोषणा को आधार बनाया जाय।

(3) मतदाता शुद्धिकरण की आड़ में नागरिकता के संवैधानिक अधिकार में हस्तक्षेप बन्द किया जाय।

हम देश की नागरिक आबादी का आव्हान करते हैं कि वह अपने नागरिक एवं जनवादी अधिकारों के लिए सजग हो।

प्रस्ताव -2

हल्द्वानी की सबसे पुरानी रिहाइशी बस्ती बनभूलपुरा को उजाड़े जाने के विरोध में।

सरकार मजदूरों मेहनतकशों की बस्तियों को अलग-अलग तरीके से उजाड़े जाने का बहाना बनाती रही है। ऐसा ही हल्द्वानी की सबसे पुरानी रिहाइशी बनभूलपुरा बस्ती के साथ किया जा रहा है। कभी हल्द्वानी रेलवे स्टेशन के पास गंदगी का बहाना बनाकर बस्ती को उजाड़ने की कोशिश की गई। एक व्यक्ति की गौला नदी पर बने पुल के टूटने की निजी शिकायत को बनभूलपुरा बस्ती को उजाड़ने की साजिश बना दिया। रेलवे स्टेशन विस्तार की कभी रेलवे द्वारा मांग न किये जाने के बावजूद स्टेशन विस्तार का बहाना बनाकर बनभूलपुरा के और भी बड़े इलाके को उजाड़ने की कवायद जारी है।

मेहनतकश जनता ने सड़कों से लेकर सर्वोच्च अदालत तक अपनी आवाज उठाई। इसके बावजूद न्यायालय से "न्याय" के बजाय उजाड़े जाने का फैसला आया।

यह सेमिनार बनभूलपुरा के पीड़ित परिवारों के साथ अपनी संवेदना व्यक्त करता है। सेमिनार हजारों बनभूलपुरावासियों के आवास की रक्षा के लिए हर संभव तरीके से अपनी आवाज बुलंद करने का संकल्प लेता है।

आलेख

/west-asia-mein-badalata-shakti-santulan-samajhautaa-gyapan-ke-baad-ki-sthiti

अमरीकी साम्राज्यवादी और इजरायली शासक सोचते थे कि ईरान के शीर्ष नेतृत्व का सफाया करने के बाद ईरानी जनता अपनी सत्ता के विरुद्ध उठ खड़ी होगी और इसका फायदा उठाते हुए अमरीकी साम्राज्यवादी अपनी किसी कठपुतली को सत्ता में स्थापित कर देंगे। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। ईरानी अवाम अपनी सत्ता के समर्थन में मजबूती से खड़ी हो गई। यहां से अमरीकी साम्राज्यवादियों को समझ में आ गया कि वे ईरान पर कब्जा नहीं कर सकते।

/war-anay-sadhanon-se-politics-ka-hi-jaari-roop-hai

अमेरिकी साम्राज्यवादी पश्चिम एशिया में और सारी दुनिया में अपनी साम्राज्यवादी जकड़न को खत्म नहीं होने देना चाहेंगे। वे इसके खिलाफ हर संभव प्रयास करेंगे। एक हमले में मुंह की खाने के बाद वे सबक लेकर आगे हमला करने से तौबा नहीं करेंगे। यह उनकी साम्राज्यवादी फितरत के खिलाफ होगा। यानी वे ईरान पर काबू पाने के लिए दूसरे तरीकों की खोज में लग जायेंगे।

/emerjency-tab-aur-ab

पिछले दस-बारह सालों में हिन्दू फासीवादियों ने इस अनौपचारिक आपातकाल की शैली को काफी विकसित किया है। कहां किस छेद का इस्तेमाल करना है, इसमें उन्होंने महारत हासिल की है। इनके इस कृत्य में न्यायपालिका की सहभागिता से यह काम और आसान हो गया है। मतदाता सूची का विशेष गहन पुनर्रीक्षण इस सबका विशिष्ट उदाहरण है।

/piketi-ka-global-justice-project-samraajyavad-ki-pairokari

जैसा कि इंटरव्यू के शीर्षक से स्पष्ट है कि पिकेटी एक ऐसी दुनिया का ख्वाब परोसते हैं जिसमें बगैर पर्यावरण को नुकसान पहुंचाये ज्यादातर लोग खुशहाल बन सकते हैं। इस सुन्दर दुनिया को हासिल करने के लिए वे किसी वर्ग संघर्ष बढ़ाने या क्रांति की वकालत नहीं करते। बल्कि वे कुछ नुस्खे सुझाते हैं जिस पर चल कर मौजूदा पूंजीवादी-साम्राज्यवादी दुनिया को ही खुशनुमा बनाया जा सकता है। 

/amerika-dwaara-iran-par-naya-hamala-isake-doorgami-result

अमरीकी साम्राज्यवादी वर्चस्व को बढ़ाने में पश्चिम एशिया में दृढ़ स्तम्भ इजरायल रहा है। 1979 से पहले ईरान का शासक शाह रजा पहलवी  भी इस क्षेत्र में अमरीका का लठैत रहा है। 1979 में रजा पहलवी का तख्ता उलटने के बाद जो इस्लामी सत्ता आयी, वह लगातार अमरीकी साम्राज्यवाद की वर्चस्ववादी नीतियों का विरोध करती रही थी। यह सत्ता इजरायल द्वारा फिलिस्तीनियों को उजाड़े जाने और उनकी जमीनों पर यहूदी बस्तियां बसाने का विरोध करती रही है।