वाह री मुस्तैदी

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दिल्ली/ कौन कहता है भाजपा सरकार में पुलिस मुस्तैद नहीं है। दिल्ली में एक ‘खतरनाक साजिश’ का पर्दाफाश किया गया।
    
मामला कुछ यूं है कि 10 जुलाई को एक वीडियो के माध्यम से पता चला कि झिलमिल मेट्रो स्टेशन दिल्ली के पास सड़क पर कांच बिखरा हुआ है। 12 जुलाई को मुंह से तेजाब उगलने वाले कपिल मिश्रा ने इसे कांवर यात्रा के मार्ग को अवरुद्ध करने के लिए शरारती तत्वों की शरारत कहा। सड़क पर कांच बिखरने के मामले को लेकर उपराज्यपाल ने भी कार्यवाही के निर्देश दिये। मुख्यमंत्री तक ने इस मामले को संज्ञान में लिया और सड़क की सफाई होते समय स्थानीय विधायक मौजूद रहे।
    
12 जुलाई को एसीपी जांच करने पहुंचे। उन्हें सड़क पर कुछ कांच के टुकडे बिखरे हुए मिले। जूनियर इंजीनियर की शिकायत पर एफआईआर दर्ज की गयी और पुलिस टीम गहन जांच में जुट गयी।
    
13 जुलाई को जांच पूरी हुई और पता चला कि एक ई-रिक्शा चालक कांच के गैस ग्लास लाद कर ले जा रहा था। एक गाड़ी से टक्कर के बाद कुछ ग्लास टूट गये और सड़क पर बिखर गये। शुक्र है ई-रिक्शा चालक कोई मुसलमान न होकर 43 वर्षीय कुसुम पाल था। वरना यह मामला कुछ और ही रंग ले सकता था। गरीब कुसुम पाल जो गाजियाबाद में किराये के मकान में रहता है, और मेहनत से अपनी गुजर-बसर करता है। कुसुम पाल पर अब एक एफआईआर दर्ज है और वह गिरफ्तार है। बताया जा रहा है कि पुलिस की जांच अभी भी जारी है वह इस घटना में साजिश का एंगल तलाश रही है।
    
क्या हुआ अगर नजीब के बारे में कई सालों से पता नहीं चला, यमुना में मिली लड़की की लाश के अपराधियों का पता नहीं चला। परन्तु सड़क पर बिखरे कांच का पूरा मामला दो दिन में सुलझ गया और ‘अपराधी’ पुलिस की गिरफ्त में है।
        -दिल्ली संवाददाता

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जैसा कि इंटरव्यू के शीर्षक से स्पष्ट है कि पिकेटी एक ऐसी दुनिया का ख्वाब परोसते हैं जिसमें बगैर पर्यावरण को नुकसान पहुंचाये ज्यादातर लोग खुशहाल बन सकते हैं। इस सुन्दर दुनिया को हासिल करने के लिए वे किसी वर्ग संघर्ष बढ़ाने या क्रांति की वकालत नहीं करते। बल्कि वे कुछ नुस्खे सुझाते हैं जिस पर चल कर मौजूदा पूंजीवादी-साम्राज्यवादी दुनिया को ही खुशनुमा बनाया जा सकता है। 

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