विविध

केन-बेतवा लिंक परियोजना: संघर्षरत आदिवासियों का दमन

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बुंदेलखण्ड के आदिवासी केन व बेतवा नदी को जोड़ने वाली परियोजना के खिलाफ संघर्षरत हैं। इस परियोजना के तहत बनने वाले दैढ़न बांध में इन आदिवासियों का समूचा रिहाईश क्षेत्र डूब ज

तितली प्रभाव: कुछ इतिहास से, कुछ वर्तमान में

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तितली प्रभाव अथवा बटरफ्लाई इफेक्ट विश्रंखलता सिद्धान्त (Chaos Theory) में काफी प्रचलित धारणा है जिसका सरल सा मतलब यह है कि यदि कोई सिस्टम या व्यवस्था विश्रंखल अवस्था में हो तो कोई बहुत छोटा सा कारण भी बहुत बड़ा परिणाम पैदा कर सकता है। प्रचलित भाषा में, यदि बंगाल की खाड़ी में कोई तितली पंख फड़फड़ाये तो उससे हजारों किमी. दूर अरब सागर में तूफान आ सकता है। 

छात्रों-युवाओं की जीत के बाद सरकार व संघी लम्पटों के हमले

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जंतर-मंतर पर छात्रों-युवाओं का संघर्ष इतिहास रच चुका है। किसी के आगे न झुकने का दम्भ भरने वाली मोदी सरकार को छात्रों-युवाओं ने झुकने को मजबूर कर दिया। शिक्षा मंत्री धर्मे

20 जुलाई जंतर-मंतर के दृश्य

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19 जुलाई को जंतर मंतर धरनास्थल पर शाम के लगभग 4 बजे मैंने प्रवेश किया। पटेल चैक मेट्रो स्टेशन के गेट से जंतर मंतर धरनास्थल पर पहुंचने में आधा घंटा से अधिक लगा। इसकी दूरी

आपका नजरिया- नीट पेपर लीक, काकरोच जनता पार्टी व वर्तमान आंदोलन और क्रांति

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हमारा देश घोर राजनीतिक संकट के दौर से गुजर रहा है। इस राजनीतिक संकट के दौर में कभी भी कोई घटना राष्ट्रीय उद्वेलन पैदा कर सकती है। जैसा कि वर्तमान काकरोच जनता पार्टी के उभ

गैर कानूनी ले आफ के खिलाफ मजदूरों का कम्पनी गेट पर धरना

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रुद्रपुर/ भगवती प्रोडक्ट्स लिमिटेड, प्लाट नं-18, सेक्टर-2, आई.आई.ई., सिडकुल पंतनगर के कर्मकार विगत 12-14 वर्षों से स्थाई रूप से कार्यरत हैं। प्रबंधन द्वा

किसान संगठनों का कन्वेंशन

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8 जुलाई को बरनाला के तर्कशील भवन में किसान संगठनों का एक दिनी कन्वेंशन हुआ। इसमें भारतीय किसान यूनियन एकता (डकोंदा), क्रांतिकारी किसान मंच, किसान एकता केन्द्र, संग्रामी क

आलेख

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अठारहवीं सदी के इंग्लैण्ड में होने वाले चुनावी भ्रष्टाचार पर गूगल से ‘सर्च’ करने पर उसका ए आई स्वतः ही यह जवाब हाजिर कर देता हैः 

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एस.आई.आर. प्रक्रिया के दौरान बड़े पैमाने पर मतदाताओं की कटौती की गई। अब तक 13 करोड़ से ज्यादा मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए। जबकि 5-6 करोड़ लोगों को संदेह की आड़ में नोटिस भेजे गए। 13 करोड़ में से 70 प्रतिशत वो लोग थे जिन्हें स्थानांतरित या अनुपस्थित बता दिया गया। इस तरह बड़े स्तर पर मनमानी छंटनी की जा रही है। इसमें सबसे बड़ी संख्या अल्पसंख्यक, दलित, आदिवासी, महिलाओं और मलिन बस्तियों में रहने वालों की है।

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इस मजदूर आंदोलन की विचारधारा मार्क्सवाद का यह स्पष्ट कहना था कि महान फ्रांसीसी क्रांति के जमाने से ही पूंजीपति वर्ग ने अपने समाज के लिए जो आदर्श घोषित कर रखा है- स्वतंत्रता, समता, बंधुत्व का आदर्श- वह पूंजीवाद की निजी सम्पत्ति के कारण कभी भी हासिल नहीं किया जा सकता। पूंजी के रूप में निजी सम्पत्ति के रहते स्वतंत्रता का मतलब होगा बाजार में खरीद-बेच की स्वतंत्रता, समता का मतलब होगा बाजार में खरीददार व विक्रेता की समता तथा बंधुत्व का मतलब होगा खरीद-बेच की व्यवस्था पर सहमति।

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गाजापट्टी में इजरायल की कत्लेआम करने की मुहिम जारी है। इजरायली यहूदी नस्लवादी न तो किसी समझौते को मान रहे हैं और न ही वे अपनी विनाश लीला को रोक रहे हैं। वे नस्लीय सफाये की मुहिम चला रहे हैं। इसके जवाब में हमास और अन्य प्रतिरोध संगठन इजरायली कब्जाकारी सेना पर प्रहार कर रहे हैं। 

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अपने व्यापक नुकसान को देखते हुए अमरीकी साम्राज्यवादियों ने अप्रैल महीने में युद्ध विराम किया और फिर पाकिस्तान की मध्यस्थता में एक ज्ञापन समझौता किया। इस ज्ञापन समझौते में अधिकांशतः ईरान की मांगें स्वीकार की गयीं। यह वस्तुतः अमरीका की पराजय थी। इस समझौते के थोड़े ही दिनों बाद अमरीका ने इसका उल्लंघन शुरू कर दिया। इजरायल ने एक भी दिन इस समझौते को नहीं माना।