अप्रासंगिक होती न्याय प्रणाली

/aprasangik-hoti-nyaay-pranaali

बीते कुछ समय से ड्रोन द्वारा चोरी की अफवाह या हकीकत सोशल मीडिया पर छाई हुई है। उत्तर प्रदेश के कुछ शहरों में हत्या और लूटपाट की खबरों में कितनी सच्चाई है यह तो तथ्यों की छानबीन करने वाली पुलिस व्यवस्था के दायरे में आता है लेकिन उक्त घटना, अफवाह ने अब तक न जाने कितनी ऐसी घटनाओं को अंजाम दिया है जिसका खामियाजा किसी आम मेहनतकश को भुगतना पड़ रहा है।
    
विगत दिनांक 27 जुलाई की रात उत्तराखंड के काशीपुर शहर में चैती चौराहा के पास खड़कपुर मोहल्ला में रहने वाला दीपक (उम्र 24-25 साल) जो एक आम मजदूर है, आई जी एल कंपनी में रात दस बजे की शिफ्ट छूटने के बाद अपने घर को वापस आ रहा था। घर पहुंचने से कुछ पहले ही एकदम से कुछ लोग चोर-चोर चिल्लाते हुए आए और उसके ऊपर हमला बोल दिया। गंभीर रूप से घायल मजदूर के सिर पर 40 टांके आए हैं और वह हास्पिटल में जीवन-मृत्यु के बीच जूझ रहा है।
    
कुछ स्थानीय लोगों का कहना है कि युवक को पुरानी रंजिश के चलते मारा गया है। घटना की मूल वजह चाहे जो भी हो परंतु इन सबके बीच एक बात जो सही है वह यह कि उक्त ड्रोन द्वारा चोरी वाले मामले में प्रशासन या तो अपाहिज बना हुआ है या फिर जान-बूझकर दहशत, आतंक के माहौल को बनने दे रहा है। न तो इन अफवाहों को वह स्वीकार कर रहा है और न इन अफवाह फैलाने वाली वीडियो पर रोक लगा रहा है। दहशत और आतंक के बीच शायद उसे ऐसे नौजवानों की भीड़ चाहिए जो जब चाहे लाठी, डंडे, रॉड लेकर किसी का भी सर फोड़ने को तत्पर हो, जब चाहे उससे आस्था के नाम पर नाले में डुबकी लगवाई जा सके और जब चाहे तब ताली बजवाकर कोरोना के वायरस को भस्म करवाया जा सके। हिंदू राष्ट्र को भविष्य में ऐसे ही नौजवानों की दरकार होगी। 
        -एक मजदूर, काशीपुर

आलेख

/west-asia-mein-badalata-shakti-santulan-samajhautaa-gyapan-ke-baad-ki-sthiti

अमरीकी साम्राज्यवादी और इजरायली शासक सोचते थे कि ईरान के शीर्ष नेतृत्व का सफाया करने के बाद ईरानी जनता अपनी सत्ता के विरुद्ध उठ खड़ी होगी और इसका फायदा उठाते हुए अमरीकी साम्राज्यवादी अपनी किसी कठपुतली को सत्ता में स्थापित कर देंगे। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। ईरानी अवाम अपनी सत्ता के समर्थन में मजबूती से खड़ी हो गई। यहां से अमरीकी साम्राज्यवादियों को समझ में आ गया कि वे ईरान पर कब्जा नहीं कर सकते।

/war-anay-sadhanon-se-politics-ka-hi-jaari-roop-hai

अमेरिकी साम्राज्यवादी पश्चिम एशिया में और सारी दुनिया में अपनी साम्राज्यवादी जकड़न को खत्म नहीं होने देना चाहेंगे। वे इसके खिलाफ हर संभव प्रयास करेंगे। एक हमले में मुंह की खाने के बाद वे सबक लेकर आगे हमला करने से तौबा नहीं करेंगे। यह उनकी साम्राज्यवादी फितरत के खिलाफ होगा। यानी वे ईरान पर काबू पाने के लिए दूसरे तरीकों की खोज में लग जायेंगे।

/emerjency-tab-aur-ab

पिछले दस-बारह सालों में हिन्दू फासीवादियों ने इस अनौपचारिक आपातकाल की शैली को काफी विकसित किया है। कहां किस छेद का इस्तेमाल करना है, इसमें उन्होंने महारत हासिल की है। इनके इस कृत्य में न्यायपालिका की सहभागिता से यह काम और आसान हो गया है। मतदाता सूची का विशेष गहन पुनर्रीक्षण इस सबका विशिष्ट उदाहरण है।

/piketi-ka-global-justice-project-samraajyavad-ki-pairokari

जैसा कि इंटरव्यू के शीर्षक से स्पष्ट है कि पिकेटी एक ऐसी दुनिया का ख्वाब परोसते हैं जिसमें बगैर पर्यावरण को नुकसान पहुंचाये ज्यादातर लोग खुशहाल बन सकते हैं। इस सुन्दर दुनिया को हासिल करने के लिए वे किसी वर्ग संघर्ष बढ़ाने या क्रांति की वकालत नहीं करते। बल्कि वे कुछ नुस्खे सुझाते हैं जिस पर चल कर मौजूदा पूंजीवादी-साम्राज्यवादी दुनिया को ही खुशनुमा बनाया जा सकता है। 

/amerika-dwaara-iran-par-naya-hamala-isake-doorgami-result

अमरीकी साम्राज्यवादी वर्चस्व को बढ़ाने में पश्चिम एशिया में दृढ़ स्तम्भ इजरायल रहा है। 1979 से पहले ईरान का शासक शाह रजा पहलवी  भी इस क्षेत्र में अमरीका का लठैत रहा है। 1979 में रजा पहलवी का तख्ता उलटने के बाद जो इस्लामी सत्ता आयी, वह लगातार अमरीकी साम्राज्यवाद की वर्चस्ववादी नीतियों का विरोध करती रही थी। यह सत्ता इजरायल द्वारा फिलिस्तीनियों को उजाड़े जाने और उनकी जमीनों पर यहूदी बस्तियां बसाने का विरोध करती रही है।