गुड़गांव प्रशासन ने उजाड़ी 25 झुग्गियां

/gurugram-prashasan-ne-ujaadi-25-jhuggiyaan

गुड़गांव/ दिनांक 08 अक्टूबर 2025 को गुड़गांव प्रशासन ने सेक्टर-12, गुड़गांव के पास प्रेम नगर में लगभग 25 झुग्गियों को तोड़ दिया। यहां पर लगभग 80 के आस-पास झुग्गियां हैं जिनमें लगभग 150 परिवार रहते हैं। गुड़गांव प्रशासन ने इन झुग्गियों को अवैध बताकर बुल्डोजर चला दिया तथा झुग्गियों में रखे सामान को भी तोड़ डाला। 
    
झुग्गियों में रहने वाले एक व्यक्ति ने बताया कि वे यहां पर पिछले 50 वर्षों से रह रहे हैं। उनका यहां का आधार कार्ड व तमाम दस्तावेज बने हुए हैं। उसके बाद भी प्रशासन ने जबरदस्ती बिना किसी अदालती आदेश के उनकी झुग्गियों को तोड़ डाला। उक्त व्यक्ति ने यह भी बताया कि झुग्गियों में रहने वाले लगभग 80 परिवारों को सरकार ने आवास योजना के तहत वर्ष 2014 से मकान देने की बात कही थी लेकिन अभी तक भी उन्हें मकान प्राप्त नहीं हुआ है। मकान मिलना तो दूर अब इन गरीब मेहनतकशों को झुग्गियों से भी हटाया जा रहा है। 
    
इन झुग्गियों में रहने वाले कुछ लोग मजदूरी करते हैं तथा ज्यादातर झाड़ू, चटाई, टोकरियां इत्यादि बनाने का काम करते हैं। बड़ी मुश्किल से ये दो जून की रोटी जुटा पाते हैं। इन सभी मजदूरों-मेहनतकशों के बच्चे सरकारी स्कूल में पढ़ते हैं। 
    
जब गुड़गांव प्रशासन द्वारा झुग्गियों को उजाड़ा जा रहा था तो इन सभी लोगों ने विरोध भी किया लेकिन सरकार के बुल्डोजर राज ने इनके विरोध को अपने फासीवादी पंजों तले कुचल दिया और झुग्गियों को जमींदोज कर दिया। हालांकि कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं ने प्रशासन का विरोध इस बात पर किया कि प्रशासन के पास कोई आदेश नहीं है झुग्गियों को तोड़ने का। उसके बाद प्रशासन ने धमकी देते हुए कहा कि जल्द से जल्द इन झुग्गियों को यहां से हटाया जाए।
    
आज पूरे भारत में फासीवादी मोदी सरकार अवैध कब्जे के नाम पर गरीबों की झुग्गियों को उजाड़ रही है, अवैध प्रवासियों के नाम पर मुसलमानों-अल्पसंख्यकों, आदिवासियों के वोट काटकर उन्हें घुसपैठिया बता कर उनके जनवादी अधिकारों को खत्म कर रही है, मोदी सरकार का विरोध करने वाले मुस्लिमों के घरों को बुल्डोजर से तोड़ रही है। आज देश में मजदूरों-मेहनतकशों के लिए आवास की सुविधा एक बड़ी समस्या बन चुकी है। मोदी सरकार गरीबों की झुग्गियों को उजाड़ कर उनकी भूमि को पूंजीपतियों के सुपुर्द कर रही है और वहीं बड़े-बड़े जंगलों को भी अम्बानी-अडानी को सौंप रही है। इससे यह साफ प्रतीत होता है कि मोदी सरकार धर्म का शोरगुल करके मजदूरों-मेहनतकशों के श्रम को लूटने व उनके जीवन को तबाह करने पर तुली हुई है। झुग्गियों में रहने वाले, फैक्टरियों में काम करने वाले इत्यादि को समझना होगा कि मोदी सरकार उनके जीवन को भयानक दरिद्रता की ओर धकेल रही है।            -गुड़गांव संवाददाता   
 

आलेख

/janavad-ka-sawal-aur-majdoor-varg

मजदूर के पास पूंजी नहीं होती इसीलिए पूंजीवाद में उसकी कोई हैसियत नहीं होती। इतना ही नहीं, वह जिन्दा रहने के लिए पूंजीपति पर निर्भर होता है। वह पूंजीपति के लिए काम करता है और जिन्दा रहता है। इसके लिए वह पूंजीपति से जिन संबंधों में बंधता है वे उसे पूंजीपति का गुलाम बना देती हैं। इसीलिए मजदूर को उजरती गुलाम यानी मजदूरी करने वाला गुलाम कहा जाता है। स्वाभाविक है कि समाज में गुलाम व गुलाम मालिक की राजनीतिक-सामाजिक हैसियत एक नहीं हो सकती।

/punjivadi-jantantra-and-chunavi-corruption

अठारहवीं सदी के इंग्लैण्ड में होने वाले चुनावी भ्रष्टाचार पर गूगल से ‘सर्च’ करने पर उसका ए आई स्वतः ही यह जवाब हाजिर कर देता हैः 

/election-aayog-hindu-fascist-and-loktantra

एस.आई.आर. प्रक्रिया के दौरान बड़े पैमाने पर मतदाताओं की कटौती की गई। अब तक 13 करोड़ से ज्यादा मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए। जबकि 5-6 करोड़ लोगों को संदेह की आड़ में नोटिस भेजे गए। 13 करोड़ में से 70 प्रतिशत वो लोग थे जिन्हें स्थानांतरित या अनुपस्थित बता दिया गया। इस तरह बड़े स्तर पर मनमानी छंटनी की जा रही है। इसमें सबसे बड़ी संख्या अल्पसंख्यक, दलित, आदिवासी, महिलाओं और मलिन बस्तियों में रहने वालों की है।

/uddharak-ideology-ki-talaas

इस मजदूर आंदोलन की विचारधारा मार्क्सवाद का यह स्पष्ट कहना था कि महान फ्रांसीसी क्रांति के जमाने से ही पूंजीपति वर्ग ने अपने समाज के लिए जो आदर्श घोषित कर रखा है- स्वतंत्रता, समता, बंधुत्व का आदर्श- वह पूंजीवाद की निजी सम्पत्ति के कारण कभी भी हासिल नहीं किया जा सकता। पूंजी के रूप में निजी सम्पत्ति के रहते स्वतंत्रता का मतलब होगा बाजार में खरीद-बेच की स्वतंत्रता, समता का मतलब होगा बाजार में खरीददार व विक्रेता की समता तथा बंधुत्व का मतलब होगा खरीद-बेच की व्यवस्था पर सहमति।

/war-and-diplomacy-uthal-puthal-se-bhari-duniyaa

गाजापट्टी में इजरायल की कत्लेआम करने की मुहिम जारी है। इजरायली यहूदी नस्लवादी न तो किसी समझौते को मान रहे हैं और न ही वे अपनी विनाश लीला को रोक रहे हैं। वे नस्लीय सफाये की मुहिम चला रहे हैं। इसके जवाब में हमास और अन्य प्रतिरोध संगठन इजरायली कब्जाकारी सेना पर प्रहार कर रहे हैं।