आपका नजरिया

आपका नजरिया - 18वीं लोकसभा, मोदी 3.0, उम्मीद और संभावनाएं

लोकसभा चुनाव 2024 के परिणाम में भाजपा को बहुमत से कम जब 240 सीटें मिलीं तो मोदी की सरकार बनाने में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के घटक दलों खासकर जेडीयू प्रमुख नीत

आपका नजरिया - व्यापार की भेंट चढ़ते हुए भगतसिंह

भगतसिंह पर बहुत सारी किताबें लिखी जा चुकी हैं, बहुत सारी किताबें लिखी जा रही हैं और बहुत सारी किताबें आगे भी लिखी जाती रहेंगी, इसका कारण यह है कि उस 23 साल के नौजवान ने अ

आपका नजरिया - अम्बेडकरवादी संगठनों का हश्र

14 अप्रैल को अम्बेडकर जयंती कार्यक्रम में दो जगह पर मैं शामिल हुआ। पिछले साल भी 14 अप्रैल को दो कार्यक्रमों में शामिल हुआ था। पिछले साल और इस साल के अनुभव लगभग समान हैं।

जब अपनी पर गुजरी, तो दिखी तानाशाही

पिछले कुछ समय से मोदी सरकार के इशारे पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने विपक्षी पार्टियों विशेष रूप से आम आदमी पार्टी के प्रमुख नेताओं पर प्रिवेंशन आफ मनी लान्ड्रिंग एक्ट 2002

‘मिट्टी में माफिया’ की हकीकत क्या है?

पिछले दिनों पूर्वांचल ही नहीं बल्कि प्रदेश के गैंगस्टर माफिया और पांच बार लगातार विधायक रहे मुख्तार अंसारी की उत्तर प्रदेश के बांदा जेल में मौत हो गयी। उसकी मौत के बाद लग

आपका नजरिया : बढ़ती गरीबी वाला ‘नया भारत’

मोदी  राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर बोलते नहीं थकते कि भारत में विकास की गंगा बहे जा रही है। लेकिन ये विकास की परिभाषा मोदी सरकार की है न कि आम जनता की। आम जनता की वि

संस्थान में आत्महत्याओं के खिलाफ आई आई टी कानपुर के छात्र

19 जनवरी को आई आई टी कानपुर के छात्रों ने प्रशासन के खिलाफ संस्थान में प्रदर्शन और सभा की। 18 जनवरी को संस्थान में शोध छात्रा प्रियंका की आत्महत्या से छात्र आंदोलित हो गए

भू कानून और मूल निवास को लेकर फिर सुगबुगाहट

मूल निवास, भू-कानून समन्वय संघर्ष समिति के बैनर तले हल्द्वानी में मूल निवास स्वाभिमान महारैली निकाली गई। इसमें मुख्यतः कुमाऊं से कई संगठनों और लोगों ने हिस्सा लिया। इससे पूर्व देहरादून में भी ऐसी र

राम मंदिर और हिंदू धर्म

इन दिनों प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के द्वारा अयोध्या में राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा की तैयारियां जोरों पर हैं। इसके लिए तमाम लोगों को निमंत्रण भेजे जा रहे हैं। अयोध्या व

जे एन यू के भगवाकरण में जुटा संघ

जेएनयू में विगत 22 अक्टूबर को आरएसएस के स्वयंसेवकों ने पथ संचलन किया। पथ संचलन संघ की फासीवादी वर्दी में हुआ। इस कार्यक्रम का जेएनयू छात्र संघ और उससे जुड़े संगठनों ने विरोध किया। विश्वविद्यालय प्रश

आलेख

/punjivadi-jantantra-and-chunavi-corruption

अठारहवीं सदी के इंग्लैण्ड में होने वाले चुनावी भ्रष्टाचार पर गूगल से ‘सर्च’ करने पर उसका ए आई स्वतः ही यह जवाब हाजिर कर देता हैः 

/election-aayog-hindu-fascist-and-loktantra

एस.आई.आर. प्रक्रिया के दौरान बड़े पैमाने पर मतदाताओं की कटौती की गई। अब तक 13 करोड़ से ज्यादा मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए। जबकि 5-6 करोड़ लोगों को संदेह की आड़ में नोटिस भेजे गए। 13 करोड़ में से 70 प्रतिशत वो लोग थे जिन्हें स्थानांतरित या अनुपस्थित बता दिया गया। इस तरह बड़े स्तर पर मनमानी छंटनी की जा रही है। इसमें सबसे बड़ी संख्या अल्पसंख्यक, दलित, आदिवासी, महिलाओं और मलिन बस्तियों में रहने वालों की है।

/uddharak-ideology-ki-talaas

इस मजदूर आंदोलन की विचारधारा मार्क्सवाद का यह स्पष्ट कहना था कि महान फ्रांसीसी क्रांति के जमाने से ही पूंजीपति वर्ग ने अपने समाज के लिए जो आदर्श घोषित कर रखा है- स्वतंत्रता, समता, बंधुत्व का आदर्श- वह पूंजीवाद की निजी सम्पत्ति के कारण कभी भी हासिल नहीं किया जा सकता। पूंजी के रूप में निजी सम्पत्ति के रहते स्वतंत्रता का मतलब होगा बाजार में खरीद-बेच की स्वतंत्रता, समता का मतलब होगा बाजार में खरीददार व विक्रेता की समता तथा बंधुत्व का मतलब होगा खरीद-बेच की व्यवस्था पर सहमति।

/war-and-diplomacy-uthal-puthal-se-bhari-duniyaa

गाजापट्टी में इजरायल की कत्लेआम करने की मुहिम जारी है। इजरायली यहूदी नस्लवादी न तो किसी समझौते को मान रहे हैं और न ही वे अपनी विनाश लीला को रोक रहे हैं। वे नस्लीय सफाये की मुहिम चला रहे हैं। इसके जवाब में हमास और अन्य प्रतिरोध संगठन इजरायली कब्जाकारी सेना पर प्रहार कर रहे हैं। 

/amerika-ka-iran-par-operation-d-day-hatasha-ka-parinam

अपने व्यापक नुकसान को देखते हुए अमरीकी साम्राज्यवादियों ने अप्रैल महीने में युद्ध विराम किया और फिर पाकिस्तान की मध्यस्थता में एक ज्ञापन समझौता किया। इस ज्ञापन समझौते में अधिकांशतः ईरान की मांगें स्वीकार की गयीं। यह वस्तुतः अमरीका की पराजय थी। इस समझौते के थोड़े ही दिनों बाद अमरीका ने इसका उल्लंघन शुरू कर दिया। इजरायल ने एक भी दिन इस समझौते को नहीं माना।