गाजा में जारी नरसंहार

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गाजा में धूर्त व क्रूर जियनवादी, फासीवादी इजरायली शासकों का नरसंहार जारी है। यह नरसंहार हमास के 7 अक्टूबर 2023 के हमले के पहले भी जारी था और इस हमले के बाद तो मानो सारी हदें पार हो गयी हैं। इजरायली सेना बेरहमी से गाजा और वेस्ट बैंक में आम निर्दोष, निहत्थे लोगां का नाजी स्टाइल में कत्ल कर रही है। यहां तक कि औरतें, बच्चे व नवजात शिशुओं की भी हत्या की जा रही है। 
    
गाजा में नरसंहार तब भी जारी था जब इजरायली फौजें ईरान के ऊपर हमले और युद्ध में व्यस्त थीं। गाजा में नरसंहार इस हमले व युद्ध के दौरान भी नहीं रुका। और अब जब इजरायल व अमेरिका के साथ ईरान का युद्ध विराम हो गया तब भी गाजा में नरसंहार नहीं रुका है। 
    
रोज ही इजरायली सेना निहत्थे फिलिस्तीनियों का कत्ल कर रही है। ये कत्लेआम इस तर्क के आधार पर अंजाम दिये जाते हैं कि लोग सहायता पाने के दौरान इजरायली सैनिकों की ओर बढ़े। यह सब झूठ सरासर झूठ है। गाजा से आये समाचारों के अनुसार इजरायली सेना टैंक व ड्रोनों से सहायता पाने के लिए इकट्ठा हुयी भीड़ पर गोलियां बरसा रही थी। गाजा में यह कई-कई हफ्तों से चल रहा है। इजरायली सेना जिसके सैनिक सिर से पैर तक हथियार व सुरक्षा सामग्री से लैस हैं और पूरे गाजा की आसमान से निरन्तर निगरानी की जाती है वहां उन पर हमले की बात बेमानी है। इजरायली सेना ने अब तक अपने सैन्य अभियान में 56,000 से ज्यादा लोगों को मार डाला है और करीब डेढ़ लाख लोगों को घायल कर डाला है। 23 लाख की आबादी के करीब दस प्रतिशत लोगों को इस समय तक मारा या घायल किया जा चुका है। 
    
असल में इजरायली जियनवादी शासक फिलिस्तीन के बाकी बचे-खुचे हिस्से में अपना पूर्ण कब्जा चाहते हैं। वे चाहते हैं कि सारे फिलिस्तीनी भाग जायें। और अगर वे भागते नहीं हैं, गाजा पट्टी व वेस्ट बैंक को खाली नहीं करते हैं तो किसी न किसी बहाने से सब फिलिस्तीनियों को मार दिया जाए। अमेरिकी साम्राज्यवादियों के खुले व नंगे समर्थन से इजरायली जियनवादियों को गाजा में नरसंहार की खुली छूट मिली हुयी है। 

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अठारहवीं सदी के इंग्लैण्ड में होने वाले चुनावी भ्रष्टाचार पर गूगल से ‘सर्च’ करने पर उसका ए आई स्वतः ही यह जवाब हाजिर कर देता हैः 

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एस.आई.आर. प्रक्रिया के दौरान बड़े पैमाने पर मतदाताओं की कटौती की गई। अब तक 13 करोड़ से ज्यादा मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए। जबकि 5-6 करोड़ लोगों को संदेह की आड़ में नोटिस भेजे गए। 13 करोड़ में से 70 प्रतिशत वो लोग थे जिन्हें स्थानांतरित या अनुपस्थित बता दिया गया। इस तरह बड़े स्तर पर मनमानी छंटनी की जा रही है। इसमें सबसे बड़ी संख्या अल्पसंख्यक, दलित, आदिवासी, महिलाओं और मलिन बस्तियों में रहने वालों की है।

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इस मजदूर आंदोलन की विचारधारा मार्क्सवाद का यह स्पष्ट कहना था कि महान फ्रांसीसी क्रांति के जमाने से ही पूंजीपति वर्ग ने अपने समाज के लिए जो आदर्श घोषित कर रखा है- स्वतंत्रता, समता, बंधुत्व का आदर्श- वह पूंजीवाद की निजी सम्पत्ति के कारण कभी भी हासिल नहीं किया जा सकता। पूंजी के रूप में निजी सम्पत्ति के रहते स्वतंत्रता का मतलब होगा बाजार में खरीद-बेच की स्वतंत्रता, समता का मतलब होगा बाजार में खरीददार व विक्रेता की समता तथा बंधुत्व का मतलब होगा खरीद-बेच की व्यवस्था पर सहमति।

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गाजापट्टी में इजरायल की कत्लेआम करने की मुहिम जारी है। इजरायली यहूदी नस्लवादी न तो किसी समझौते को मान रहे हैं और न ही वे अपनी विनाश लीला को रोक रहे हैं। वे नस्लीय सफाये की मुहिम चला रहे हैं। इसके जवाब में हमास और अन्य प्रतिरोध संगठन इजरायली कब्जाकारी सेना पर प्रहार कर रहे हैं। 

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अपने व्यापक नुकसान को देखते हुए अमरीकी साम्राज्यवादियों ने अप्रैल महीने में युद्ध विराम किया और फिर पाकिस्तान की मध्यस्थता में एक ज्ञापन समझौता किया। इस ज्ञापन समझौते में अधिकांशतः ईरान की मांगें स्वीकार की गयीं। यह वस्तुतः अमरीका की पराजय थी। इस समझौते के थोड़े ही दिनों बाद अमरीका ने इसका उल्लंघन शुरू कर दिया। इजरायल ने एक भी दिन इस समझौते को नहीं माना।