न पुलिसिया दमन, न हिरासत, न नजरबंदी तोड़ सकी प्रदर्शनकारियों के हौंसले

Published
Fri, 10/16/2026 - 07:50
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पूरे देश में ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे, एस आई आर को रद्द करने को लेकर आंदोलन जोरों से चल रहा है। छात्र-नौजवान, आम नागरिक व विपक्षी दल निरंतर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। 
    
10 अक्टूबर के दिन दिल्ली में जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान फासीवादी मोदी सरकार ने सारे लोकतांत्रिक मूल्यों को किनारे फेंक दिया। बड़े पैमाने पर पुलिस, अर्द्धसैनिक बल दिल्ली में उतारे गये। दर्जनों ट्रेनें रद्द कर दी गयीं। लोग जंतर-मंतर न पहुंच पायें इसके लिए सारे प्रयास किये गये। इंटरनेट बंद करवा दिया गया। अपने समर्थित मीडिया को छोड़ बाकी मीडिया को रिपोर्ट करने से रोका गया। 
    
दिल्ली से 300 किमी. दूर बरेली शहर में इंकलाबी मजदूर केन्द्र के नेता डी सी मौर्या व इंकलाबी विचारों से प्रभावित कृष्णपाल जो कि आटो रिक्शा-ई रिक्शा वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष हैं, को हाउस अरेस्ट कर लिया गया। ऐसे ही फरीदाबाद में इंकलाबी मजदूर केन्द्र के नेताओं संजय कुमार और रंजना को भी हाउस अरेस्ट किया गया। दोनों ही जगह प्रदेश की भाजपा सरकार भली-भांति जानती है कि ये संगठन निरंतर मजदूर-किसानों की मांग उठाते रहे हैं और फासीवाद के खिलाफ मुखर आवाज बनते हैं। इस सबसे भय खाकर इन आवाजों को घरों में ही कैद कर दिया गया। इसके बावजूद इन संगठनों के तमाम नेता-कार्यकर्ता पूरे जोश से विरोध प्रदर्शनों में शामिल हुए और स्थानीय जगहों पर भी विरोध प्रदर्शन किया गया। 
    
प्रदर्शनों को रोकने के लिए फासीवादी सरकार ने सोशल मीडिया पर भी कड़ी निगरानी रखी। इसी का परिणाम है कि सोशल मीडिया में एक छात्राओं के ग्रुप जो प्रदर्शन में भागीदारी के लिए बनाया गया था उस ग्रुप की एडमिन विजेता को उनके घर से गिरफ्तार कर बुराडी थाने में हिरासत में रखा गया और उसके बाद बवाना स्टेडियम ले गये। विजेता ‘परिवर्तनकामी छात्र संगठन’ से जुड़ी हैं। विजेता ने बताया, ‘‘ग्रुप में पुलिस ने एंटर किया यहां से फोन न. निकालकर एक-एक छात्रा को धमकाया गया, उन्हें प्रदर्शन में शामिल होने पर कड़ी कार्यवाही का डर दिखाया गया। यहीं से मेरा नम्बर लेकर पता लेकर मुझे गिरफ्तार किया गया। 
    
गिरफ्तारी और घर पर नजरबंदी के बावजूद बड़ी संख्या में इंकलाबी मजदूर केन्द्र, परिवर्तनकामी छात्र संगठन, प्रगतिशील महिला एकता केन्द्र सहित मजदूर, ट्रेड यूनियन संगठन के लोग प्रदर्शन में शामिल हुए। 
    
10 अक्टूबर को ‘इंकलाबी मजदूर केन्द्र’ के अध्यक्ष खीमानंद, ‘परिवर्तनकामी छात्र संगठन’ के अध्यक्ष महेन्द्र सहित दर्जनों कार्यकर्ताओं को उस समय गिरफ्तार कर लिया गया जब वे नई दिल्ली रेलवे स्टेशन से जंतर-मंतर की ओर जा रहे थे। उन्हें गिरफ्तार कर बवाना डिटेंशन सेंटर भेज दिया गया। जहां 700 से अधिक प्रदर्शनकारी हिरासत में रखे गये थे। यहां सभी से मोबाइल फोन ले लिये और वीडियो डिलीट कर दिये गये। 
    
छात्र-नौजवान अपने पूरे जोश-उत्साह से आंदोलन में शामिल हैं। कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले जाती बस जब दिल्ली वि.वि. के पास पहुंची तो छात्र-छात्राओं ने बस रुकवा दी और आंदोलनकारियों को आजाद करवा दिया। ऐसे ही इंकलाबी मजदूर केन्द्र, प्रगतिशील महिला एकता केन्द्र और वकीलों द्वारा एक डिटेंशन बस से आंदोलनकारियों को मुक्त करवाया। 
    
पुलिसिया दमन और आंदोलन के समर्थन में दिल्ली के बाहर भी विरोध प्रदर्शन आयोजित किये गये। उत्तराखण्ड में देहरादूर, हरिद्वार, हल्द्वानी, रुद्रपुर, काशीपुर, रामनगर में विरोध प्रदर्शन किये गये। बरेली, फरीदाबाद आदि स्थानों पर भी विरोध प्रदर्शन किये गये।  
    
रामनगर में मोदी सरकार का पुतला दहन किया गया। विरोध-प्रदर्शन में इमके, उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी, प्रमएके, परिवर्तनकामी छात्र संगठन, प्रगतिशील भोजनमाता संगठन एवं देवभूमि व्यापार मंडल के कार्यकर्ताओं ने भागीदारी की। 
    
काशीपुर में संडे मार्केट पर विरोध-प्रदर्शन आयोजित किया गया। विरोध-प्रदर्शन में इंकलाबी मजदूर केंद्र, क्रांतिकारी लोक अधिकार संगठन एवं प्रगतिशील महिला एकता केंद्र के कार्यकर्ताओं के साथ अन्य सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भागीदारी की। 
    
हल्द्वानी में बुद्ध पार्क में ज्ञानेश कुमार का पुतला दहन किया गया। विरोध-प्रदर्शन में परिवर्तनकामी छात्र संगठन, आइसा, प्रगतिशील महिला एकता केंद्र, भाकपा (माले), भीम आर्मी और क्रांतिकारी लोक अधिकार संगठन के कार्यकर्ताओं ने भागीदारी की।
    
पंतनगर में ज्ञानेश कुमार एवं मोदी-शाह का पुतला फूंक कर विरोध जताया गया। कार्यक्रम में इमके एवं ठेका मजदूर कल्याण समिति के कार्यकर्ताओ ने भागीदारी की।
    
बरेली में विभिन्न जनसंगठनों द्वारा सेठ दामोदर स्वरूप पार्क में सभा कर कलेक्ट्रट जाकर राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन सौंपा गया। कार्यक्रम में इमके, पछास, क्रालोस और पी यू सी एल के कार्यकर्ता शामिल रहे।
    
फरीदाबाद में जन संघर्ष समिति द्वारा मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की बर्खास्तगी तथा जन विरोधी एस आई आर के खिलाफ चल रहे आंदोलन पर पुलिसिया दमन के खिलाफ प्रदर्शन किया गया और इमके के कार्यकर्ताओं को गैरकानूनी रूप से हाउस अरेस्ट किये जाने के विरोध में फरीदाबाद के उपायुक्त के माध्यम से राष्ट्रपति को ज्ञापन भेजा गया।        -विशेष संवाददाता
 

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