राजनैतिक गिद्ध

Published
Fri, 01/16/2026 - 07:12
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वो जुमला गढ़ते हैं कि
बेटी बचाओ? बेटी पढ़ाओ?
मकसद साफ है
पहले बेटी तो बचाओ तभी तो पढ़ाओगे।
हर जगह नजर है उनकी हमारी बेटियों पर
कैसे और कहां तक छुपाओगे?

घर से लेकर स्कूल-कालेज तक
आफिस से लेकर बाबाओं के सत्संग तक
चारों तरफ उनका जाल है,
कहीं तो फंसेगी फंदे में चिड़िया
हर तरफ गर्म गोश्त के दलाल हैं।

देवियों की पूजा नारियों का भक्षण क्यों?
बलात्कारियों का शासन व सत्ता द्वारा संरक्षण क्यों?
अपराधियों, बलात्कारियों को बेल
सत्ता से सवाल करने वालों को जेल
क्या यही रामराज है?
ये कैसा लोकतंत्र है, कैसा समाज है?

ये राजनैतिक गिद्धों की जमात है
गिद्ध को हर हाल में बचायेंगे,
मौका मिलते ही बहन-बेटियों की
बोटी-बोटी नोंच खायेंगे।

पकड़े गये तो इनके लिए
गेस्ट हाउस है जेल भी
फरलो मिलेगी, पैरोल मिलेगी और मिलेगी बेल भी
यहां न्याय अपराध नहीं
चेहरा देखकर मिलता है।
स्वतंत्रता, समानता सब ढकोसला है
यहां केवल धनपतियों, बाहुबलियों का राज चलता है 
                  -भारत सिंह, आंवला

आलेख

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अमेरिकी साम्राज्यवादी पश्चिम एशिया में और सारी दुनिया में अपनी साम्राज्यवादी जकड़न को खत्म नहीं होने देना चाहेंगे। वे इसके खिलाफ हर संभव प्रयास करेंगे। एक हमले में मुंह की खाने के बाद वे सबक लेकर आगे हमला करने से तौबा नहीं करेंगे। यह उनकी साम्राज्यवादी फितरत के खिलाफ होगा। यानी वे ईरान पर काबू पाने के लिए दूसरे तरीकों की खोज में लग जायेंगे।

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पिछले दस-बारह सालों में हिन्दू फासीवादियों ने इस अनौपचारिक आपातकाल की शैली को काफी विकसित किया है। कहां किस छेद का इस्तेमाल करना है, इसमें उन्होंने महारत हासिल की है। इनके इस कृत्य में न्यायपालिका की सहभागिता से यह काम और आसान हो गया है। मतदाता सूची का विशेष गहन पुनर्रीक्षण इस सबका विशिष्ट उदाहरण है।

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जैसा कि इंटरव्यू के शीर्षक से स्पष्ट है कि पिकेटी एक ऐसी दुनिया का ख्वाब परोसते हैं जिसमें बगैर पर्यावरण को नुकसान पहुंचाये ज्यादातर लोग खुशहाल बन सकते हैं। इस सुन्दर दुनिया को हासिल करने के लिए वे किसी वर्ग संघर्ष बढ़ाने या क्रांति की वकालत नहीं करते। बल्कि वे कुछ नुस्खे सुझाते हैं जिस पर चल कर मौजूदा पूंजीवादी-साम्राज्यवादी दुनिया को ही खुशनुमा बनाया जा सकता है। 

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अमरीकी साम्राज्यवादी वर्चस्व को बढ़ाने में पश्चिम एशिया में दृढ़ स्तम्भ इजरायल रहा है। 1979 से पहले ईरान का शासक शाह रजा पहलवी  भी इस क्षेत्र में अमरीका का लठैत रहा है। 1979 में रजा पहलवी का तख्ता उलटने के बाद जो इस्लामी सत्ता आयी, वह लगातार अमरीकी साम्राज्यवाद की वर्चस्ववादी नीतियों का विरोध करती रही थी। यह सत्ता इजरायल द्वारा फिलिस्तीनियों को उजाड़े जाने और उनकी जमीनों पर यहूदी बस्तियां बसाने का विरोध करती रही है।