अंकिता भंडारी के लिए न्याय की मांग को लेकर जगह-जगह प्रदर्शन

Published
Fri, 01/16/2026 - 07:18
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अंकिता भण्डारी प्रकरण में संलिप्त वी आई पी का नाम सामने आने के बाद से समूचे उत्तराखण्ड में जनता सड़कों पर उतर आई। प्रदेश की जनता, विभिन्न क्रांतिकारी-जनवादी संगठन, कांग्रेस-यूकेडी आदि सीबीआई जांच की मांग के साथ जगह-जगह प्रदर्शन करने लगे, वहीं धामी सरकार मामले की लीपापोती व वी आई पी को बचाने में जुटी रही। अंततः जब 11 जनवरी को प्रदेश बंद का आह्वान किया गया तो सरकार को दबाव में आकर सीबीआई जांच की संस्तुति करनी पड़ी। हालांकि इस सीबीआई जांच का आधार पुरानी मूल एफआईआर की जगह नई एफआईआर को बना सरकार अभी भी वीआईपी भाजपा नेता को बचाने का काम कर रही है।  
    
गौरतलब है कि उत्तराखंड की अंकिता भंडारी की तीन साल पहले बर्बर हत्या कर दी गई थी। अंकिता पौड़ी जिले के यमकेश्वर स्थित वनंतरा नाम के रिजॉर्ट में काम करती थी। जहां उससे रिजॉर्ट के मालिक पुलकित आर्य और उसके साथ 2 अन्य लोगों ने किसी टप्च् को स्पेशल सर्विस देने की मांग की। जब स्वाभिमानी अंकिता ने इसके लिए मना किया तो उसकी दर्दनाक हत्या कर दी गई। पुलकित आर्य भारतीय जनता पार्टी के नेता और पूर्व राज्यमंत्री विनोद आर्य का बेटा है।
    
अंकिता को न्याय दिलाने के लिए उत्तराखंड की जनता तीन साल से संघर्ष कर रही है। इस पूरे संघर्ष में VIP पर कानूनी कार्रवाई करने को लेकर मांग होती रही है। लेकिन सरकार  SIT जांच के नाम पर लगातार आरोपियों तथा उस वीआईपी, जिसके लिए स्पेशल सर्विस की मांग की गई थी, को बचाती रही है।
    
कुछ दिन पहले उर्मिला सनावर पूर्व भाजपा विधायक सुरेश राठौर की पत्नी ने आडियो के जरिए इस मामले में VIP एंगल को लेकर महत्वपूर्ण दावे किए हैं जिससे यह मामला फिर से सुर्खियों में आ गया है। उत्तराखंड की जनता सड़कों पर उतरकर वीआईपी की पहचान कर उसे और उसको बचाने वालों को जेल में डालने की मांग कर रही है। 
    
उत्तराखण्ड के लगभग सभी प्रमुख शहरों में 11 जनवरी को अंकिता को न्याय की मांग के साथ विरोध प्रदर्शन हुए। पहाड़ी इलाकों में जहां बंद एक हद तक सफल रहा वहीं तराई के क्षेत्रों में इसका आंशिक प्रभाव रहा। पुलिस-प्रशासन भी सीबीआई जांच की मांग मानी जाने का हवाला दे बंद को असफल बनाने में जुटा रहा। संघ-भाजपा के लोग तो बंद को विफल बनाने में लगातार सक्रिय रहे। उनके व्यवहार ने दिखा दिया कि उनका ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ का नारा किस कदर खोखला है। 
    
प्रदर्शन में आए प्रतिनिधियों ने कहा कि उत्तराखंड की जनता के लगातार संघर्ष के बावजूद प्रशासन पूरी ताकत के साथ उस वीआईपी को बचाने का प्रयास कर रही है जिसके लिए अंकिता पर स्पेशल सर्विस देने का दबाव बनाया जा रहा था। जिस तरह इस मामले में तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया और रिजॉर्ट को गिरा दिया गया उससे पता चलता है कि ये वीआईपी भाजपा का कोई बड़ा नेता है जिसको बचाने के सारे प्रयास किए जा रहे हैं। कुलदीप सेंगर बृजभूषण से लेकर भाजपा के तमाम बड़े नेता बलात्कार में लिप्त हैं और भाजपा पूरी बेशर्मी के साथ इनको बचाती दिखती है। ‘बेटी पढ़ाओ बेटी बचाओ’ का नारा लगाती भाजपा सरकार के राज में न सिर्फ बेटियां सबसे ज्यादा असुरक्षित हैं बल्कि न्याय से वंचित भी हैं। 
    
वनंतरा जैसे न जाने कितने रिजॉर्ट इस समय चल रहे हैं जहां स्पेशल सर्विस के नाम पर गरीब मेहनतकश तबके से आने वाली लड़कियों का शोषण-उत्पीड़न किया जाता है। 
    
वक्ताओं ने आगे कहा कि हमें सिर्फ CBI जांच की मांग तक नहीं रुकना है क्योंकि जिस तरह भाजपा ने देश की हर एक संस्था पर कब्जा कर रखा है उसमें CBI से भी न्याय की उम्मीद करना खुद को धोखे में ही रखना होगा। ऐसे में जब तक अंकिता को न्याय नहीं मिल जाता और VIP समेत, मामले को छुपाने वाले सभी लोग जेल में नहीं जाते तब तक हमें लड़ाई जारी रखनी होगी।
    
8 जनवरी 2026 को दिल्ली के उत्तराखंड भवन पर विभिन्न सामाजिक संगठनों द्वारा अंकिता भंडारी के लिए न्याय की आवाज उठाते हुए एक विरोध प्रदर्शन का आयोजन किया गया। 
    
उत्तराखंड की जनता के इस न्याय के लिए संघर्ष के साथ एकजुटता जाहिर करने के लिए दिल्ली के विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि एक जुलूस की शक्ल में उत्तराखंड भवन पहुंचे जहां उन्होंने सभा करते हुए रेजिडेंट कमिश्नर के मार्फत मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपा।
    
प्रदर्शन में प्रगतिशील महिला एकता केंद्र, इंकलाबी मजदूर केन्द्र, परिवर्तनकामी छात्र संगठन, क्रांतिकारी लोक अधिकार संगठन, क्रांतिकारी युवा संगठन, भगत सिंह छात्र युवा मंच, टीयूसीआई, ग्रामीण मजदूर यूनियन आदि संगठनों सहित कई सामाजिक कार्यकर्ता मौजूद थे। 
    
महिलाओं के खिलाफ अपराधों में लिप्त भाजपा के नेताओं की सूची कुलभूषण सिंह, सेंगर से होती हुई काफी आगे तक जाती है। आज भाजपा के ‘‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’’ नारे का असल मतलब बेटियों को भाजपा से बचाओ बन गया है। आज महिलाओं को वास्तविक सुरक्षा सिर्फ जनता का मजबूत आंदोलन ही दे सकता है। अंकिता के दोषियों को जब तक जेल के पीछे न पहुंचा दिया जाए तब तक ये संघर्ष जारी रहेगा। -विशेष संवाददाता

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