अमेरिका : न्यूयार्क में हजारों नर्सें हड़ताल पर

Published
Fri, 01/16/2026 - 07:06
/amerika-newyork-mein-hajaron-nurses-strike-par

अमेरिका के न्यूयार्क शहर में 15,000 नर्सें 12 जनवरी की सुबह 6 बजे से हड़ताल पर चली गयी हैं। ये नर्सें न्यूयार्क शहर के तीन सबसे धनी अस्पतालों माउंट सिनाई, मोन्तेफियोरे और न्यूयार्क प्रेसबाइटन में काम करती हैं। ज्ञात हो कि माउंट सिनाई के तीन अस्पताल हैं - माउंट सिनाई, माउंट सिनाई मार्निंग और माउंट सिनाई वेस्ट। इस तरह कुल मिलाकर 5 अस्पताल की 15,000 नर्सें अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं। 
    
हड़ताली नर्सों की मांग कोई नई नहीं हैं। आस्ट्रेलिया हो या न्यूजीलैंड या फिर कनाडा, सब जगह नर्सों की मांग की तरह यहां भी मांग है कि मरीजों के अनुपात में नर्सों की भर्ती की जाए यानी नर्सों और मरीजों का अनुपात उचित हो ताकि मरीजों की देखभाल सही तरह से हो। यह मांग जहां एक तरफ नर्सों के ऊपर बढ़ रहे काम के दबाव के फलस्वरूप है वहीं यह मांग मरीजों के दृष्टिकोण से भी उचित बनती है।
    
इसके अलावा हड़ताली नर्सों की मांग है कि वे एक तरफ तो स्वास्थ्य व्यवस्था की रीढ़ हैं लेकिन उनकी खुद की स्वास्थ्य व्यवस्था को अस्पताल मालिक खत्म करने की तरफ बढ़ रहे हैं। इसका मतलब साफ है कि अब अपने स्वास्थ्य का खर्चा खुद नर्सों को अपने वेतन से उठाना होगा। 
    
साथ ही हड़ताली नर्सों की कार्यस्थलों पर होने वाली हिंसा को रोकने की भी मांग है। 
    
पिछले लम्बे समय से न्यूयार्क नर्सेज एसोसिएशन अस्पतालों के मालिक के साथ वार्ता कर रही थी लेकिन कोई हल न निकल पाने के कारण अंततः नर्सों को हड़ताल पर जाने को मजबूर होना पड़ा। और अस्पतालों के प्रबंधकों ने नर्सों को डराने के लिए हड़ताल से कुछ घंटे पहले तीन नर्सों को काम से निकाल दिया जो अपनी मांगों को मुखर तरीके से उठा रही थी। इसके अलावा उन 14 नर्सों को भी काम से निकाल दिया जो कार्यस्थलों पर होने वाली हिंसा का मुद्दा उठा रही थीं। 
    
इस हड़ताल का एक मुद्दा वेतन बढ़ोत्तरी भी है। हड़ताली नर्सें अपने वेतन में 5 प्रतिशत सालाना की वृद्धि चाहती हैं। इसके साथ ही पेंशन भी एक अन्य मांग है। 
    
अगर अस्पतालों के मुनाफे की बात की जाये तो 2024 में माउंट सिनाई का कुल मुनाफा 1140 लाख डालर, माउंटफियोरे का मुनाफा 2880 लाख डालर और न्यूयार्क प्रेसबाइटन का मुनाफा 5470 लाख डालर रहा है। ये अस्पताल अपने खर्च कम करने के लिए कम वेतन और अस्पतालों में कम स्टाफ रखना, स्टाफ के सामाजिक कल्याण के खर्च को कम करना आदि सभी तरीके अपनाते हैं। मुनाफा ही इनका मूलमंत्र है।
    
नर्सों की इस हड़ताल की पिकेटिंग में न्यूयार्क शहर के मेयर ममदानी भी पहुंचे हैं। ममदानी अभी हाल ही में न्यूयार्क के मेयर बने हैं और समाजवादी होने का एक टैग इनके ऊपर लगा है। अपने चुनावों के दौरान गरीबों की बातें ये करते रहे हैं। अब यह देखना है कि इनका समाजवादी होने का टैग इसी हड़ताल में उतरता है या उसमें समय लगेगा।
 

आलेख

/punjivadi-jantantra-and-chunavi-corruption

अठारहवीं सदी के इंग्लैण्ड में होने वाले चुनावी भ्रष्टाचार पर गूगल से ‘सर्च’ करने पर उसका ए आई स्वतः ही यह जवाब हाजिर कर देता हैः 

/election-aayog-hindu-fascist-and-loktantra

एस.आई.आर. प्रक्रिया के दौरान बड़े पैमाने पर मतदाताओं की कटौती की गई। अब तक 13 करोड़ से ज्यादा मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए। जबकि 5-6 करोड़ लोगों को संदेह की आड़ में नोटिस भेजे गए। 13 करोड़ में से 70 प्रतिशत वो लोग थे जिन्हें स्थानांतरित या अनुपस्थित बता दिया गया। इस तरह बड़े स्तर पर मनमानी छंटनी की जा रही है। इसमें सबसे बड़ी संख्या अल्पसंख्यक, दलित, आदिवासी, महिलाओं और मलिन बस्तियों में रहने वालों की है।

/uddharak-ideology-ki-talaas

इस मजदूर आंदोलन की विचारधारा मार्क्सवाद का यह स्पष्ट कहना था कि महान फ्रांसीसी क्रांति के जमाने से ही पूंजीपति वर्ग ने अपने समाज के लिए जो आदर्श घोषित कर रखा है- स्वतंत्रता, समता, बंधुत्व का आदर्श- वह पूंजीवाद की निजी सम्पत्ति के कारण कभी भी हासिल नहीं किया जा सकता। पूंजी के रूप में निजी सम्पत्ति के रहते स्वतंत्रता का मतलब होगा बाजार में खरीद-बेच की स्वतंत्रता, समता का मतलब होगा बाजार में खरीददार व विक्रेता की समता तथा बंधुत्व का मतलब होगा खरीद-बेच की व्यवस्था पर सहमति।

/war-and-diplomacy-uthal-puthal-se-bhari-duniyaa

गाजापट्टी में इजरायल की कत्लेआम करने की मुहिम जारी है। इजरायली यहूदी नस्लवादी न तो किसी समझौते को मान रहे हैं और न ही वे अपनी विनाश लीला को रोक रहे हैं। वे नस्लीय सफाये की मुहिम चला रहे हैं। इसके जवाब में हमास और अन्य प्रतिरोध संगठन इजरायली कब्जाकारी सेना पर प्रहार कर रहे हैं। 

/amerika-ka-iran-par-operation-d-day-hatasha-ka-parinam

अपने व्यापक नुकसान को देखते हुए अमरीकी साम्राज्यवादियों ने अप्रैल महीने में युद्ध विराम किया और फिर पाकिस्तान की मध्यस्थता में एक ज्ञापन समझौता किया। इस ज्ञापन समझौते में अधिकांशतः ईरान की मांगें स्वीकार की गयीं। यह वस्तुतः अमरीका की पराजय थी। इस समझौते के थोड़े ही दिनों बाद अमरीका ने इसका उल्लंघन शुरू कर दिया। इजरायल ने एक भी दिन इस समझौते को नहीं माना।