पंजाब में मेडिकल कैंप का आयोजन

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पंजाब के अमृतसर से 35-40 किमी दूर स्थित गांवों में 23 सितम्बर से मेडिकल कैंप का आयोजन किया जा रहा है। मेडिकल कैंप संयुक्त तौर पर चलाया जा रहा है। इसे संयुक्त रूप से आयोजित करने वाले संगठन क्रांतिकारी लोक अधिकार संगठन, परिवर्तनकामी छात्र संगठन, इंकलाबी मजदूर केंद्र, प्रोग्रेसिव मेडिकोज फोरम और प्रगतिशील महिला एकता केंद्र तथा नागरिक पाक्षिक अखबार हैं। संयुक्त तौर पर आपदा राहत मंच के बैनर तले मेडिकल कैंप चलाए जा रहे हैं। 
    
मेडिकल कैंप लगाने के लिए टीम 22 सितम्बर को पंजाब के अमृतसर के लिया रवाना हुई। 23 सितम्बर को अमृतसर से 27 किमी दूर अजनाला होते हुए भीतर गांवों की ओर गई। यहां 10 किमी दूर भीतर जसराऊर क्षेत्र में दो दिन गुरुद्वारा सिंह सभा में मेडिकल कैंप लगाया गया। इस इलाके से रावी नदी 10-15 किमी दूर है। पानी अब तक यहां उतर चुका था और बस अब गहरे निशान छोड़ गया था। बाढ़ का पानी इस इलाके में नहर से होता हुआ घुसा था। अब भी कई खेतों में फसल सड़ने की स्थिति में थी। पानी कई खेतों में भरा हुआ था। जबकि कहीं-कहीं सड़कों पर पानी के साथ आई सिल्ट सूख चुकी थी। गाड़ियों की आवाजाही से यह धूल बनकर चारों ओर उड़ रही थी।
    
इस क्षेत्र में कीर्ति किसान यूनियन के साथ बातचीत करके मेडिकल कैंप लगाया गया। इनका काम इस इलाके में है। कैंप के संबंध में प्रचार हेतु गुरुद्वारे से घोषणा करवाई गई और एक वीडियो सोशल मीडिया पर डालकर भी कैंप का प्रचार किया गया। 12 बजे से 5 बजे तक कैंप यहां लगा। इस बीच कई दर्जन मरीज कैंप में चेकअप और दवा के लिए आए। अगले दिन भी 12 बजे तक यहां मेडिकल कैंप लगाने के बाद कैंप की जगह बदल दी गई। 
    
यहां से 16-17 किमी दूर दयालभट्टी क्षेत्र की ओर टीम ने प्रस्थान किया। 2 बजे से यहां दयालभट्टी में मेडिकल कैंप लगाया गया। यहां जम्हूरी किसान सभा के साथ बातचीत करने के बाद कैंप लगाया गया। यह इलाका बाढ़ से ज्यादा प्रभावित है। खेतों में फसल खड़ी है जिसे देखकर लगता है कि इलाके में नुकसान कम हुआ है। मगर स्थिति यह है कि इस सही दिखती फसल में अब दाना नहीं बन सकता। खेतों से पानी निकालने के लिए डीजल पंप का इस्तेमाल हो रहा है ताकि कुछ फसल बच सके। 
     
इस इलाके में मरीजों की संख्या ज्यादा है। अधिकतर मरीज त्वचा, बुखार, खांसी, पेट के मर्ज से संबंधित हैं। इसके अलावा अधिकतर मरीज लंबे समय से ही किसी न किसी बीमारी से ग्रस्त भी हैं इसमें उच्च रक्तचाप (हाई बी पी), शुगर और जोड़ों में दर्द की शिकायत संबधी मामले अधिक हैं। कैम्प में ढेरों मरीज तेजी से इलाज के लिए आए। 
    
24-25 सितम्बर को इलाके के बारे में जानकारी ली गई। स्कूटर से इलाके का भ्रमण किया गया। ताकि और ज्यादा प्रभावित लोगों तक पहुंचा जा सके। गांव दूर-दूर हैं। एक केंद्र बनाकर काम करने में समस्या भी थी कि दूर के मरीज कैंप में नहीं आ सकते थे। रावी नदी के समीप के गांव में भी स्थिति को जाकर देखा गया। इसके बाद तीन जगह मेडिकल कैंप लगाया गए जिसमें कई दर्जन मरीज देखे गए। अभी मेडिकल कैंप यहां दो-तीन जगह लगाए जा रहे हैं- दयालभट्टी, गगोमहल, रावी के पास। 
    
पहले जो राहत कैंप बाढ़ के वक्त लगाए गए थे अब पानी उतरने के बाद बंद हो चुके हैं। एक कैंप जानवरों को चारा उपलब्ध करवाने के लिए भारतीय किसान यूनियन एकता संघर्ष (रंजीत) ने गगोमहल पर लगाया है। इनके सहयोग से यहां भी मेडिकल कैंप लगाया जा रहा है। 
    
मेडिकल कैंप में आने वाले अधिकतर मरीज जो त्वचा आदि बीमारी से संक्रमित हैं उनकी स्थिति, सरकारी तंत्र और सरकार के खोखले दावों की पोल खोल देती है। स्वास्थ्य के मामले में गंभीर स्थिति है। आम लोगों में अधिकतर को पता ही नहीं कि वे शुगर और हाई बी.पी. के मरीज हैं। इस बीमारी से अपरिचित मगर इसके लक्षणों को झेलते हुए अधिकतर लोग अपनी जिंदगी जी रहे हैं। सरकार के लिए यह कोई मुद्दा ही नहीं बनता कि आम जनता को स्वास्थ्य के मामले में सचेत, जागरूक, शिक्षित करने के अभियान निरंतर चलाए जाएं। सरकार के पास पूरा तंत्र है सरकार और इस तंत्र का पूरा जोर निजी चिकित्सा पर है ताकि भरपूर मुनाफा कमाया जा सके। अन्यथा तो इस आधुनिक जमाने में सरकार जरूरी टेस्टिंग और इलाज से संबंधित चीजों के साथ सचल दस्ते गाड़ियां हर गांव तक भेजकर बेहद आसानी से जागरूकता और इलाज के लिए निःशुल्क अभियान बार-बार चला सकती थी। मगर पूंजीपरस्त सरकार के लिए यह मुमकिन नहीं।     -विशेष संवाददाता

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