राजनीति

उच्चतम न्यायालय के दो फैसले : खोई साख को पाने की एक कोशिश

11 मई को भारत के उच्चतम न्यायालय ने एक के बाद एक दो फैसले सुनाये। पहला फैसला दिल्ली में अरविंद केजरीवाल की सरकार व उप राज्यपाल के बीच से उपजे विवाद के बाद दिल्ली राज्य सरकार व उप राज्यपाल की शक्तिय

भाजपा का दोगला चरित्र

    हमारे देश में दोहरा चरित्र दर्शाने वाले ऐसे तमाम नेता, राजनेता, सांसद, विधायक बेनकाब होते रहे हैं जो बातों में, प्रवचनों में महिलाओं की बराबरी, महिलाओं के सम्मान, महिला सशक्तिकरण की डींगें हांक

जी-20 का शिखर सम्मेलन और मोदी सरकार

    आने वाली 9-10 सितम्बर को देश की राजधानी दिल्ली में जी-20 का शिखर सम्मेलन आयोजित होने जा रहा है। इस बार भारत इसकी अध्यक्षता कर रहा है और मोदी सरकार इसे अपनी विशेष उपलब्धि बता रही है। क्या जी-20

‘सामाजिक न्याय’ के झण्डे में छेद ही छेद

    इस वक्त ‘सामाजिक न्याय’ का मुद्दा गरमाने के लिए नीतिश कुमार, एम.के.स्टालिन से लेकर राहुल गांधी ने कमर कसी हुयी है। ‘सामाजिक न्याय’ को सुनिश्चित कराने के लिए जातिगत जनगणना की मांग की जा रही है।

केशवानन्द भारती मामले के पचास साल बाद

    पचास साल पहले 24 अप्रैल 1973 को सर्वोच्च न्यायालय ने केशवानन्द भारती मामले में अपना फैसला सुनाया था। इस फैसले में सर्वोच्च न्यायालय के सभी 13 न्यायाधीशों में से 7 ने यह कहा कि संविधान का एक बुन

पाठ्यक्रम से डार्विन की छुट्टी

    मोदी सरकार का फासीवादी अभियान तेजी से आगे बढ़ रहा है। इसी अभियान की कड़ी में राष्ट्रीय शिक्षा नीति के बहाने पाठ्यक्रमों में परिवर्तन किया जा रहा है। कहने को तो छात्रों पर कई पाठों का बोझ घटाया जा

भारत : सबसे ज्यादा आबादी वाला देश

    पिछले दिनों यह खबर आयी कि भारत ने आबादी के मामले में चीन को भी पीछे छोड़ दिया है। वह दुनिया में सबसे ज्यादा आबादी वाला देश बन गया। ऐसे मौके पर मजाकिया ढंग से देश के रहनुमा को बधाई दी जा सकती है।

‘जिसकी जितनी आबादी, उसका उतना हक’

‘जिसकी जि    कांग्रेस पार्टी ने आजकल एक नया नारा दिया है- ‘जिसकी जितनी आबादी, उसका उतना हक’। उसे लगता है कि यह नारा आने वाले चुनावों में उसका बेड़ा पार लगायेगा। जनता के विभिन्न हिस्से उसे हाथों-हाथ

भाजपा का दोगला चरित्र

    हमारे देश में दोहरा चरित्र दर्शाने वाले ऐसे तमाम नेता, राजनेता, सांसद, विधायक बेनकाब होते रहे हैं जो बातों में, प्रवचनों में महिलाओं की बराबरी, महिलाओं के सम्मान, महिला सशक्तिकरण की डींगें हांक

भाजपा का दोगला चरित्र

    हमारे देश में दोहरा चरित्र दर्शाने वाले ऐसे तमाम नेता, राजनेता, सांसद, विधायक बेनकाब होते रहे हैं जो बातों में, प्रवचनों में महिलाओं की बराबरी, महिलाओं के सम्मान, महिला सशक्तिकरण की डींगें हांक

आलेख

/punjivadi-jantantra-and-chunavi-corruption

अठारहवीं सदी के इंग्लैण्ड में होने वाले चुनावी भ्रष्टाचार पर गूगल से ‘सर्च’ करने पर उसका ए आई स्वतः ही यह जवाब हाजिर कर देता हैः 

/election-aayog-hindu-fascist-and-loktantra

एस.आई.आर. प्रक्रिया के दौरान बड़े पैमाने पर मतदाताओं की कटौती की गई। अब तक 13 करोड़ से ज्यादा मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए। जबकि 5-6 करोड़ लोगों को संदेह की आड़ में नोटिस भेजे गए। 13 करोड़ में से 70 प्रतिशत वो लोग थे जिन्हें स्थानांतरित या अनुपस्थित बता दिया गया। इस तरह बड़े स्तर पर मनमानी छंटनी की जा रही है। इसमें सबसे बड़ी संख्या अल्पसंख्यक, दलित, आदिवासी, महिलाओं और मलिन बस्तियों में रहने वालों की है।

/uddharak-ideology-ki-talaas

इस मजदूर आंदोलन की विचारधारा मार्क्सवाद का यह स्पष्ट कहना था कि महान फ्रांसीसी क्रांति के जमाने से ही पूंजीपति वर्ग ने अपने समाज के लिए जो आदर्श घोषित कर रखा है- स्वतंत्रता, समता, बंधुत्व का आदर्श- वह पूंजीवाद की निजी सम्पत्ति के कारण कभी भी हासिल नहीं किया जा सकता। पूंजी के रूप में निजी सम्पत्ति के रहते स्वतंत्रता का मतलब होगा बाजार में खरीद-बेच की स्वतंत्रता, समता का मतलब होगा बाजार में खरीददार व विक्रेता की समता तथा बंधुत्व का मतलब होगा खरीद-बेच की व्यवस्था पर सहमति।

/war-and-diplomacy-uthal-puthal-se-bhari-duniyaa

गाजापट्टी में इजरायल की कत्लेआम करने की मुहिम जारी है। इजरायली यहूदी नस्लवादी न तो किसी समझौते को मान रहे हैं और न ही वे अपनी विनाश लीला को रोक रहे हैं। वे नस्लीय सफाये की मुहिम चला रहे हैं। इसके जवाब में हमास और अन्य प्रतिरोध संगठन इजरायली कब्जाकारी सेना पर प्रहार कर रहे हैं। 

/amerika-ka-iran-par-operation-d-day-hatasha-ka-parinam

अपने व्यापक नुकसान को देखते हुए अमरीकी साम्राज्यवादियों ने अप्रैल महीने में युद्ध विराम किया और फिर पाकिस्तान की मध्यस्थता में एक ज्ञापन समझौता किया। इस ज्ञापन समझौते में अधिकांशतः ईरान की मांगें स्वीकार की गयीं। यह वस्तुतः अमरीका की पराजय थी। इस समझौते के थोड़े ही दिनों बाद अमरीका ने इसका उल्लंघन शुरू कर दिया। इजरायल ने एक भी दिन इस समझौते को नहीं माना।